राजस्थान निकाय चुनाव 2026: SEC आज 309 शहरी निकायों का चुनाव कार्यक्रम घोषित करेगा, आचार संहिता तत्काल लागू
सारांश
मुख्य बातें
राजस्थान राज्य चुनाव आयोग (SEC) बुधवार, 19 अगस्त को प्रदेश के सभी 309 शहरी स्थानीय निकायों के लिए चुनाव कार्यक्रम की घोषणा करने जा रहा है। राज्य चुनाव आयुक्त राजेश्वर सिंह प्रेस कॉन्फ्रेंस में इस कार्यक्रम की विधिवत घोषणा करेंगे, जिसके साथ ही इन निकायों में आदर्श आचार संहिता (MCC) तत्काल प्रभाव से लागू हो जाएगी और चुनाव प्रक्रिया पूर्ण होने तक जारी रहेगी।
चुनाव का दायरा और सीटों का विवरण
इन चुनावों में 10,245 पार्षद सीटों पर मतदान होगा। 309 शहरी स्थानीय निकायों में 10 नगर निगम, 51 नगर परिषद और 248 नगरपालिकाएँ शामिल हैं। चुनाव प्रक्रिया के तहत पहले पार्षद पद के लिए मतदान होगा, उसके बाद मेयर, नगर परिषद अध्यक्ष और नगरपालिका अध्यक्षों के चुनाव संपन्न कराए जाएँगे।
आरक्षण व्यवस्था
मेयर और अध्यक्ष पदों में 60 पद अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के लिए, 50 पद अनुसूचित जाति (SC) के लिए और 11 पद अनुसूचित जनजाति (ST) के लिए आरक्षित किए गए हैं। महिलाओं के लिए कुल 3,356 सीटें आरक्षित हैं, जो सभी वर्गों में 33 प्रतिशत आरक्षण सुनिश्चित करती हैं।
10,245 वार्डों में से 1,933 OBC के लिए, 1,794 SC के लिए और 395 ST के लिए आरक्षित हैं। 6,123 वार्ड अनारक्षित हैं, जिनमें 4,120 ओपन सीटें और 2,003 महिला आरक्षित सीटें शामिल हैं। स्थानीय स्वशासन विभाग आरक्षण लॉटरी प्रक्रिया पूर्ण कर विवरण राज्य चुनाव आयोग को भेज चुका है।
राजस्थान हाईकोर्ट के निर्देश
गौरतलब है कि ये चुनाव राजस्थान हाईकोर्ट के निर्देशों के परिणामस्वरूप कराए जा रहे हैं। न्यायालय ने शहरी स्थानीय निकाय और पंचायती राज चुनावों में हो रही देरी पर गंभीर चिंता व्यक्त की थी और आदेश दिया था कि ये चुनाव 15 नवंबर तक पूरे किए जाएँ। साथ ही, आरक्षण लॉटरी प्रक्रिया 15 अगस्त तक संपन्न करने का निर्देश भी दिया गया था।
आचार संहिता का सरकारी कामकाज पर असर
आदर्श आचार संहिता लागू होते ही सरकार उन शहरी क्षेत्रों में नए विकास प्रोजेक्ट्स की घोषणा, नए वर्क ऑर्डर जारी करने और नई परियोजनाओं के उद्घाटन व शिलान्यास समारोहों पर रोक के दायरे में आ जाएगी। हालाँकि, पूर्व स्वीकृत कार्य निर्बाध जारी रहेंगे।
यह ऐसे समय में आया है जब प्रदेश सरकार के विधायी एजेंडे पर भी इसका सीधा असर पड़ने की संभावना है। यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) विधेयक और खेजड़ी वृक्ष संरक्षण से जुड़े प्रस्तावित कानून के आगामी मानसून सत्र में पारित होने की संभावना अब कम मानी जा रही है। मानसून सत्र गुरुवार से शुरू होकर दो दिन चलेगा, जिसमें दोनों विधेयक पेश तो किए जा सकते हैं, लेकिन पूर्ण विधायी प्रक्रिया के लिए सरकार नवंबर में विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने पर विचार कर सकती है।