राजस्थान पंचायत चुनाव 2026: चार चरणों में मतदान, 23 अक्टूबर से शुरुआत, 4.03 करोड़ मतदाता
सारांश
मुख्य बातें
राजस्थान राज्य चुनाव आयोग ने 3 अक्टूबर 2026 को प्रदेश में पंचायती राज चुनावों का पूरा कार्यक्रम घोषित कर दिया, जिसके तहत राज्यभर में चार चरणों में मतदान होगा और लगभग 1.69 लाख पंचायती राज प्रतिनिधि चुने जाएंगे। इन चुनावों में 4.03 करोड़ पंजीकृत मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे। चुनाव कार्यक्रम की घोषणा होते ही ग्रामीण राजस्थान में आदर्श आचार संहिता तत्काल प्रभाव से लागू हो गई है।
मतदान का चरणवार कार्यक्रम
जिला परिषद और पंचायत समिति सदस्यों के चुनाव क्रमशः 23 अक्टूबर, 29 अक्टूबर, 4 नवंबर और 14 नवंबर को होंगे। इन पदों के लिए मतदान ईवीएम (इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन) से कराया जाएगा और इनके वोटों की गिनती 20 नवंबर को होगी।
सरपंच और वार्ड पंच पदों के लिए मतदान 25 अक्टूबर, 31 अक्टूबर, 6 नवंबर और 16 नवंबर को होगा। इन पदों के लिए बैलेट पेपर से वोटिंग होगी और मतगणना उसी दिन संपन्न होगी। जिला प्रमुख और प्रधान के चुनाव 25 नवंबर को निर्धारित हैं और पूरी चुनाव प्रक्रिया 28 नवंबर 2026 तक पूरी होने की उम्मीद है।
कितनी सीटें और कौन होंगे प्रतिनिधि
इन चुनावों में 1,403 जिला परिषद सदस्य, 8,245 पंचायत समिति सदस्य और 14,403 सरपंच चुने जाएंगे। चुने गए जिला परिषद सदस्य बाद में 41 जिला प्रमुखों का चुनाव करेंगे, जबकि पंचायत समिति सदस्य 457 प्रधानों को निर्वाचित करेंगे।
उल्लेखनीय है कि कोटा, श्रीगंगानगर, बारां और करौली में मौजूदा जिला प्रमुखों और प्रधानों का कार्यकाल दिसंबर 2026 में समाप्त होगा। हालांकि, इन जिलों में जिला परिषद और पंचायत समिति सदस्यों के चुनाव शेष राज्य के साथ ही आयोजित किए जाएंगे।
महिला आरक्षण और सामाजिक प्रतिनिधित्व
पंचायती राज संस्थाओं में महिलाओं को 50 प्रतिशत आरक्षण दिया गया है। अनुमान है कि लगभग 7,200 महिलाएं सरपंच चुनी जाएंगी, जबकि 63,000 से अधिक वार्ड पंच पद महिलाओं के लिए आरक्षित हैं। इसके अलावा, जिला प्रमुख के 41 में से 20 पद और प्रधान के 457 में से 221 पद महिलाओं के लिए आरक्षित हैं।
सरपंच पदों में 3,058 सीटें अनुसूचित जनजाति (ST), 2,493 अनुसूचित जाति (SC) और 1,961 अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के लिए आरक्षित हैं। वार्ड पंच की लगभग 1.30 लाख सीटों में से 21,962 SC, 19,117 ST और लगभग 15,000 OBC उम्मीदवारों के लिए आरक्षित हैं।
मतदाता और आचार संहिता
इन चुनावों में सर्वाधिक मतदाता जयपुर जिले में हैं, जहाँ लगभग 18.99 लाख वोटर पंजीकृत हैं। सबसे कम मतदाता जैसलमेर में हैं, जहाँ लगभग 4.36 लाख मतदाता हैं।
आचार संहिता लागू होने के साथ ही सरकारी कर्मचारियों के तबादलों पर रोक लगा दी गई है। मंत्रियों और जन-प्रतिनिधियों द्वारा राजनीतिक उद्देश्यों के लिए सरकारी सुविधाओं के उपयोग पर भी पाबंदी है। राजस्थान सरकार चुनाव अवधि के दौरान कोई नई योजना या कार्यक्रम घोषित नहीं कर सकती जो मतदाताओं को प्रभावित करे।
राजनीतिक दलों की परीक्षा
सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (BJP) और विपक्षी भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस दोनों के लिए ये चुनाव संगठनात्मक ताकत की अग्निपरीक्षा साबित होंगे। गाँव और ब्लॉक स्तर की बड़ी संख्या में सीटें होने के कारण यह जमीनी समर्थन का वास्तविक पैमाना होगा। 457 पंचायत समितियों और 41 जिला परिषदों का गठन इन्हीं चुनावों से तय होगा, जो भविष्य के राजनीतिक समीकरणों को भी आकार देंगे।