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मतदाता सूची विवाद: रामदास अठावले बोले — CEC ज्ञानेश कुमार इस्तीफा नहीं देंगे, RPI को महाराष्ट्र में प्रतिनिधित्व की माँग

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मतदाता सूची विवाद: रामदास अठावले बोले — CEC ज्ञानेश कुमार इस्तीफा नहीं देंगे, RPI को महाराष्ट्र में प्रतिनिधित्व की माँग

सारांश

केंद्रीय राज्यमंत्री रामदास अठावले ने साफ कह दिया — CEC ज्ञानेश कुमार इस्तीफा नहीं देंगे और मतदाता सूची पर स्थिति पहले ही स्पष्ट हो चुकी है। साथ ही उन्होंने महाराष्ट्र सरकार से आरपीआई के लिए दो चेयरमैन पद और एक एमएलसी सीट की माँग भी रख दी।

मुख्य बातें

रामदास अठावले ने 3 सितंबर को नवी मुंबई में स्पष्ट किया कि CEC ज्ञानेश कुमार इस्तीफा नहीं देंगे।
मतदाता सूची से नाम हटने पर ज्ञानेश कुमार पहले ही स्थिति स्पष्ट कर चुके हैं; नाम पुनः जुड़वाने की प्रक्रिया शुरू।
अठावले ने अभिजीत दिपके के आंदोलन को 'केवल इशारे' बताया और प्रधानमंत्री मोदी के विरुद्ध उत्तेजनापूर्ण बयानबाजी पर आपत्ति जताई।
आरपीआई (ए) ने महाराष्ट्र सरकार से आगामी निगम चुनावों में कम से कम दो चेयरमैन पद और राज्यपाल कोटे से एक एमएलसी सीट की माँग रखी।
अठावले ने जिला, तालुका और राज्य स्तर की समितियों में आरपीआई कार्यकर्ताओं को उचित प्रतिनिधित्व देने की भी अपील की।

केंद्रीय राज्यमंत्री और रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (आरपीआई-ए) के अध्यक्ष रामदास अठावले ने 3 सितंबर को नवी मुंबई में स्पष्ट किया कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को इस्तीफा देने की कोई आवश्यकता नहीं है। उन्होंने कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के संस्थापक अभिजीत दिपके के आंदोलन और सीईसी के इस्तीफे की माँग को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि मतदाता सूची संबंधी स्थिति पहले ही स्पष्ट की जा चुकी है।

मुख्य घटनाक्रम

अठावले ने कहा कि ज्ञानेश कुमार ने मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के आरोपों पर अपना पक्ष सार्वजनिक रूप से रख दिया है। उनके अनुसार, यदि किसी मतदाता का नाम स्थानीय प्रक्रिया के दौरान गलती से हटा है, तो उसे पुनः जुड़वाने की प्रक्रिया पहले ही शुरू की जा चुकी है। ऐसे में इस्तीफे की माँग अनुचित है।

अठावले ने यह भी कहा कि आरपीआई (ए) का स्पष्ट मत है कि मुख्य चुनाव आयुक्त को पद नहीं छोड़ना चाहिए। उन्होंने जोड़ा कि आंदोलनकारी जितना चाहें आंदोलन कर सकते हैं, परंतु इससे स्थिति नहीं बदलेगी।

अभिजीत दिपके के आंदोलन पर प्रतिक्रिया

अठावले ने अभिजीत दिपके के बयानों पर टिप्पणी करते हुए कहा कि आंदोलनकारी केवल 'इशारे' देते हैं, लेकिन इशारों से कोई ठोस समाधान नहीं निकलता। उन्होंने स्वीकार किया कि एक बार धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के रूप में आंदोलनकारियों को सफलता मिली थी, किंतु यह आवश्यक नहीं कि हर बार ऐसा हो।

अठावले ने अपने स्वयं के आंदोलन के दिनों का उल्लेख करते हुए कहा कि उस दौर में पुलिस ने उन्हें कई बार गिरफ्तार कर जेल भेजा था। उनके अनुसार, यदि इस प्रकार के इशारे जारी रहे और पुलिस अपना कर्तव्य निभाती रही, तो आंदोलनकारियों को स्वयं समझ आएगा कि वास्तविक आंदोलन क्या होता है।

प्रधानमंत्री के विरुद्ध बयानबाजी पर आपत्ति

अठावले ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ की जा रही भाषा पर भी आपत्ति दर्ज कराई। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में सरकार से अपनी माँगें रखना हर नागरिक का अधिकार है, परंतु इस प्रकार की उत्तेजनापूर्ण बयानबाजी — कि 'ऐसा होगा या वैसा होगा' — उचित नहीं है। उन्होंने दिपके से ऐसी भाषा से परहेज करने की अपील की।

महाराष्ट्र में आरपीआई को प्रतिनिधित्व की माँग

अठावले ने इस अवसर पर महाराष्ट्र सरकार में आरपीआई (ए) को अपेक्षित राजनीतिक भागीदारी न मिलने पर भी असंतोष जताया। उन्होंने कहा कि पार्टी को न तो विधान परिषद (एमएलसी) की सीट मिली है और न ही विधानसभा में स्थान। उन्होंने माँग की कि आगामी निगम चुनावों में कम से कम दो चेयरमैन पद आरपीआई को दिए जाएँ।

इसके अतिरिक्त, राज्यपाल कोटे से होने वाली पाँच एमएलसी नियुक्तियों में से कम से कम एक सीट आरपीआई को देने की माँग भी उन्होंने रखी। अठावले ने यह भी कहा कि जिला, तालुका और राज्य स्तर की विभिन्न समितियों में पार्टी के कार्यकर्ताओं को उचित प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए।

आगे क्या

यह विवाद ऐसे समय में उभरा है जब महाराष्ट्र में मतदाता सूची की सटीकता को लेकर विपक्षी दलों और कुछ सामाजिक संगठनों में असंतोष बना हुआ है। गौरतलब है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की भूमिका पर राष्ट्रीय स्तर पर भी बहस जारी है। अठावले का यह बयान सत्तारूढ़ गठबंधन के एक घटक दल की आधिकारिक स्थिति को दर्शाता है और आगामी निगम चुनावों में आरपीआई की सौदेबाजी की शक्ति का भी संकेत देता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

दूसरी ओर उसी साँस में महाराष्ट्र सरकार से अपनी पार्टी के लिए पद और सीटें माँगते हैं। यह विरोधाभास बताता है कि गठबंधन के भीतर भी असंतोष की परतें हैं। मतदाता सूची की सटीकता का सवाल केवल प्रशासनिक नहीं, बल्कि राजनीतिक भी है — और जब तक स्वतंत्र सत्यापन तंत्र नहीं बनता, 'स्थिति स्पष्ट हो चुकी है' जैसे बयान जनता का भरोसा पूरी तरह नहीं जीत पाएँगे।
RashtraPress
4 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

रामदास अठावले ने CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की माँग पर क्या कहा?
अठावले ने स्पष्ट किया कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार इस्तीफा नहीं देंगे और उनकी पार्टी आरपीआई (ए) इस माँग के पक्ष में नहीं है। उन्होंने कहा कि मतदाता सूची पर स्थिति पहले ही स्पष्ट की जा चुकी है।
मतदाता सूची से नाम हटने पर क्या प्रक्रिया अपनाई जा रही है?
अठावले के अनुसार, यदि किसी मतदाता का नाम स्थानीय प्रक्रिया के दौरान गलती से हटा है, तो उसे पुनः जुड़वाने का अधिकार है और इसके लिए प्रक्रिया पहले ही शुरू की जा चुकी है।
अभिजीत दिपके के आंदोलन पर अठावले का क्या रुख है?
अठावले ने कहा कि आंदोलनकारी केवल इशारे देते हैं, जिनसे ठोस समाधान नहीं निकलता। उन्होंने दिपके से प्रधानमंत्री मोदी के विरुद्ध उत्तेजनापूर्ण बयानबाजी से बचने की अपील भी की।
आरपीआई (ए) ने महाराष्ट्र सरकार से क्या माँगें रखी हैं?
आरपीआई (ए) ने माँग की है कि आगामी निगम चुनावों में कम से कम दो चेयरमैन पद पार्टी को दिए जाएँ। इसके अलावा राज्यपाल कोटे से होने वाली पाँच एमएलसी नियुक्तियों में से कम से कम एक सीट आरपीआई को दी जाए।
क्या गठबंधन के भीतर आरपीआई और महाराष्ट्र सरकार के बीच तनाव है?
अठावले ने स्वयं माना कि पार्टी को न विधान परिषद में सीट मिली है और न विधानसभा में जगह, जो असंतोष का संकेत है। हालाँकि उन्होंने गठबंधन से बाहर जाने की कोई बात नहीं कही और माँगें सहयोगी दल के रूप में रखीं।
राष्ट्र प्रेस
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