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राज ठाकरे की माँग: CEC ज्ञानेश कुमार दें इस्तीफा, चुनाव से EVM हटाई जाए

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राज ठाकरे की माँग: CEC ज्ञानेश कुमार दें इस्तीफा, चुनाव से EVM हटाई जाए

सारांश

राज ठाकरे ने एक्स पर लंबी पोस्ट कर CEC ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा, EVM की विदाई और मौजूदा सरकार तक से इस्तीफे की माँग कर दी। वोटर लिस्ट हेरफेर, गोवा में 97 मतदाताओं के वोट न डाल पाने और बंगाल की 16.1 लाख अपीलों का हवाला देते हुए उन्होंने विपक्ष से देशव्यापी आंदोलन की अपील की।

मुख्य बातें

मनसे प्रमुख राज ठाकरे ने 24 सितंबर 2026 को एक्स पर पोस्ट कर CEC ज्ञानेश कुमार के तत्काल इस्तीफे की माँग की।
ठाकरे ने आरोप लगाया कि तीन में से दो चुनाव आयुक्तों को अंधेरे में रखकर वोटर लिस्ट में मनमाना हेरफेर किया गया।
पश्चिम बंगाल में दायर 16.1 लाख अपीलों और गोवा में 97 वेरिफाइड वोटरों के मतदान से वंचित रहने का विशेष उल्लेख।
चार माँगें: CEC का इस्तीफा , स्वतंत्र जाँच, सरकार का इस्तीफा और EVM हटाकर पेपर बैलेट की वापसी।
ठाकरे ने सभी विपक्षी दलों से चुनावी गड़बड़ियों के खिलाफ देशव्यापी आंदोलन में एकजुट होने की अपील की।

महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के प्रमुख राज ठाकरे ने 24 सितंबर 2026 को भारत निर्वाचन आयोग (ECI) पर जोरदार हमला बोला और कहा कि हाल ही के मीडिया खुलासों ने यह सिद्ध कर दिया है कि चुनाव आयोग की संवैधानिक स्वायत्तता पूरी तरह समाप्त हो चुकी है। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के तत्काल इस्तीफे और आने वाले सभी चुनावों में इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों (EVM) को हटाकर पारंपरिक पेपर बैलेट की वापसी की माँग की।

एक्स पर लंबी पोस्ट से उठाया मुद्दा

ठाकरे ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक विस्तृत पोस्ट के ज़रिए आरोप लगाया कि मुख्य चुनाव आयुक्त ने स्वतंत्र रूप से काम नहीं किया, बल्कि उन्हें सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (BJP) के पक्ष में मनमाने निर्णय लेने के लिए 'मजबूर' किया गया। उन्होंने कहा कि स्वतंत्र चुनाव आयोग की अवधारणा अब केवल किताबों तक सिमट कर रह गई है और मौजूदा राजनीतिक माहौल में 'आज़ादी' का अर्थ सत्ताधारी दल की पूर्ण अधीनता बन चुका है।

आयुक्तों की असहमति और गंभीर आरोप

ठाकरे ने चुनाव आयुक्त संधू और जोशी द्वारा फ़ाइलों पर दर्ज असहमति की तारीफ करते हुए कहा, 'चुनाव आयुक्त संधू और जोशी द्वारा उठाए गए सवाल इतने गंभीर हैं कि उन्हें नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता। जब तीन में से दो आयुक्तों को अंधेरे में रखा जाता है और दरकिनार कर दिया जाता है, तो यह साबित होता है कि वोटर लिस्ट में मनमाने ढंग से हेरफेर की गई थी।'

उन्होंने सवाल उठाया कि वोटर लिस्ट सॉफ़्टवेयर, कानूनी फॉर्म में बदलाव और पश्चिम बंगाल में दायर 16.1 लाख अपीलों जैसे अहम निर्देश पूरे आयोग की मंजूरी के बिना कैसे जारी किए जा सकते हैं। उन्होंने गोवा में हुई तकनीकी खराबी का भी उल्लेख किया, जिसके चलते 97 वेरिफाइड वोटर मतदान नहीं कर पाए — इसे उन्होंने जानबूझकर किए गए केंद्रीकरण और सिस्टम में हेरफेर का प्रमाण बताया।

चार बड़ी माँगें

मनसे प्रमुख ने चार स्पष्ट माँगें रखीं: पहली, CEC ज्ञानेश कुमार का तत्काल इस्तीफा; दूसरी, ECI के निर्णयों को कथित तौर पर 'निर्देशित' करने वाले 'मास्टरमाइंड्स' की उच्चस्तरीय स्वतंत्र जाँच; तीसरी, चुनावी निष्पक्षता से समझौते के आधार पर मौजूदा सरकार का इस्तीफा; और चौथी, आगामी सभी चुनावों में EVM हटाकर पेपर बैलेट की वापसी।

ठाकरे ने टिप्पणी की, 'मुख्य चुनाव आयुक्त को निश्चित रूप से इस्तीफा देना चाहिए, लेकिन जो सरकार ऐसे कमजोर चुनाव आयोग का फायदा उठाकर सत्ता में आई है, उसे भी हट जाना चाहिए। बहुमत का दावा करने वाली सरकार के चुने जाने के बाद सड़कों पर कोई जश्न नहीं मनाया गया — यह बात बहुत कुछ कहती है।'

विपक्षी एकजुटता की अपील

ठाकरे ने देशभर के सभी विपक्षी दलों से एक व्यापक आंदोलन के लिए एकजुट होने की अपील की। उन्होंने कहा कि जब तक चुनाव आयोग वास्तव में स्वतंत्र नहीं हो जाता, तब तक सत्ताधारी सरकार को लोकतांत्रिक प्रक्रिया के ज़रिए चुनौती देना असंभव है और यह लड़ाई अनंत काल तक जारी रहेगी।

यह ऐसे समय में आया है जब EVM की विश्वसनीयता को लेकर कई विपक्षी दलों की आपत्तियाँ पहले से ही चर्चा में हैं। गौरतलब है कि ठाकरे की अपनी रैलियों में उमड़ने वाली भीड़ और मनसे को मिलने वाली सीटों के बीच के अंतर पर भी वे सीधे सवाल उठाते रहे हैं — उन्होंने कहा कि ECI के भीतर से मिली अंदरूनी जानकारी इस सवाल का जवाब देती है।

आगे क्या होगा

ठाकरे की माँगों पर अब तक ECI या केंद्र सरकार की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह बयान आगामी चुनावी मौसम से पहले विपक्षी गठजोड़ की भूमिका तय करने की कोशिश हो सकती है। मनसे प्रमुख की यह माँग विपक्षी राजनीति में EVM बनाम पेपर बैलेट की बहस को एक बार फिर केंद्र में ले आई है।

संपादकीय दृष्टिकोण

या यह भी पिछले EVM-विरोधी आंदोलनों की तरह चुनाव बाद की भावनात्मक प्रतिक्रिया बनकर रह जाएगा। चुनाव आयोग की विश्वसनीयता का प्रश्न अब केवल मनसे का नहीं, पूरे लोकतांत्रिक विमर्श का हिस्सा बन चुका है।
RashtraPress
24 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राज ठाकरे ने CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की माँग क्यों की?
राज ठाकरे ने आरोप लगाया कि हाल के मीडिया खुलासों से स्पष्ट हुआ है कि CEC ज्ञानेश कुमार ने स्वतंत्र रूप से काम नहीं किया और उन्हें BJP के पक्ष में फैसले लेने के लिए 'मजबूर' किया गया। इसके साथ ही उन्होंने दो अन्य चुनाव आयुक्तों की दर्ज असहमति को इस आरोप का प्रमाण बताया।
राज ठाकरे ने EVM के खिलाफ क्या तर्क दिए?
ठाकरे ने गोवा में 97 वेरिफाइड वोटरों के मतदान से वंचित रहने और पूरे आयोग की मंजूरी के बिना जारी निर्देशों को EVM व चुनावी प्रक्रिया में हेरफेर का प्रमाण बताया। उन्होंने माँग की कि आगामी सभी चुनावों में EVM हटाकर पारंपरिक पेपर बैलेट लाया जाए।
राज ठाकरे ने किन अन्य चुनावी अनियमितताओं का उल्लेख किया?
उन्होंने पश्चिम बंगाल में दायर 16.1 लाख वोटर अपीलों का हवाला देते हुए कहा कि इतने बड़े पैमाने पर कदम पूरे आयोग की सहमति के बिना नहीं उठाए जा सकते। इसके अलावा वोटर लिस्ट सॉफ़्टवेयर और कानूनी फॉर्मों में बदलाव को लेकर भी उन्होंने सवाल उठाए।
मनसे प्रमुख ने विपक्षी दलों से क्या अपील की?
राज ठाकरे ने सभी विपक्षी दलों से एकजुट होकर चुनावी गड़बड़ियों के खिलाफ एक देशव्यापी आंदोलन छेड़ने की अपील की। उनका कहना था कि जब तक ECI वास्तव में स्वतंत्र नहीं होती, तब तक लोकतांत्रिक मुकाबले बुनियादी रूप से कमजोर बने रहेंगे।
ECI या केंद्र सरकार ने ठाकरे के आरोपों पर क्या कहा?
ठाकरे के बयान के समय तक ECI या केंद्र सरकार की ओर से इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। यह मामला अभी राजनीतिक विमर्श में सक्रिय रूप से चल रहा है।
राष्ट्र प्रेस
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