राज ठाकरे की माँग: CEC ज्ञानेश कुमार दें इस्तीफा, चुनाव से EVM हटाई जाए
सारांश
मुख्य बातें
महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के प्रमुख राज ठाकरे ने 24 सितंबर 2026 को भारत निर्वाचन आयोग (ECI) पर जोरदार हमला बोला और कहा कि हाल ही के मीडिया खुलासों ने यह सिद्ध कर दिया है कि चुनाव आयोग की संवैधानिक स्वायत्तता पूरी तरह समाप्त हो चुकी है। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के तत्काल इस्तीफे और आने वाले सभी चुनावों में इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों (EVM) को हटाकर पारंपरिक पेपर बैलेट की वापसी की माँग की।
एक्स पर लंबी पोस्ट से उठाया मुद्दा
ठाकरे ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक विस्तृत पोस्ट के ज़रिए आरोप लगाया कि मुख्य चुनाव आयुक्त ने स्वतंत्र रूप से काम नहीं किया, बल्कि उन्हें सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (BJP) के पक्ष में मनमाने निर्णय लेने के लिए 'मजबूर' किया गया। उन्होंने कहा कि स्वतंत्र चुनाव आयोग की अवधारणा अब केवल किताबों तक सिमट कर रह गई है और मौजूदा राजनीतिक माहौल में 'आज़ादी' का अर्थ सत्ताधारी दल की पूर्ण अधीनता बन चुका है।
आयुक्तों की असहमति और गंभीर आरोप
ठाकरे ने चुनाव आयुक्त संधू और जोशी द्वारा फ़ाइलों पर दर्ज असहमति की तारीफ करते हुए कहा, 'चुनाव आयुक्त संधू और जोशी द्वारा उठाए गए सवाल इतने गंभीर हैं कि उन्हें नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता। जब तीन में से दो आयुक्तों को अंधेरे में रखा जाता है और दरकिनार कर दिया जाता है, तो यह साबित होता है कि वोटर लिस्ट में मनमाने ढंग से हेरफेर की गई थी।'
उन्होंने सवाल उठाया कि वोटर लिस्ट सॉफ़्टवेयर, कानूनी फॉर्म में बदलाव और पश्चिम बंगाल में दायर 16.1 लाख अपीलों जैसे अहम निर्देश पूरे आयोग की मंजूरी के बिना कैसे जारी किए जा सकते हैं। उन्होंने गोवा में हुई तकनीकी खराबी का भी उल्लेख किया, जिसके चलते 97 वेरिफाइड वोटर मतदान नहीं कर पाए — इसे उन्होंने जानबूझकर किए गए केंद्रीकरण और सिस्टम में हेरफेर का प्रमाण बताया।
चार बड़ी माँगें
मनसे प्रमुख ने चार स्पष्ट माँगें रखीं: पहली, CEC ज्ञानेश कुमार का तत्काल इस्तीफा; दूसरी, ECI के निर्णयों को कथित तौर पर 'निर्देशित' करने वाले 'मास्टरमाइंड्स' की उच्चस्तरीय स्वतंत्र जाँच; तीसरी, चुनावी निष्पक्षता से समझौते के आधार पर मौजूदा सरकार का इस्तीफा; और चौथी, आगामी सभी चुनावों में EVM हटाकर पेपर बैलेट की वापसी।
ठाकरे ने टिप्पणी की, 'मुख्य चुनाव आयुक्त को निश्चित रूप से इस्तीफा देना चाहिए, लेकिन जो सरकार ऐसे कमजोर चुनाव आयोग का फायदा उठाकर सत्ता में आई है, उसे भी हट जाना चाहिए। बहुमत का दावा करने वाली सरकार के चुने जाने के बाद सड़कों पर कोई जश्न नहीं मनाया गया — यह बात बहुत कुछ कहती है।'
विपक्षी एकजुटता की अपील
ठाकरे ने देशभर के सभी विपक्षी दलों से एक व्यापक आंदोलन के लिए एकजुट होने की अपील की। उन्होंने कहा कि जब तक चुनाव आयोग वास्तव में स्वतंत्र नहीं हो जाता, तब तक सत्ताधारी सरकार को लोकतांत्रिक प्रक्रिया के ज़रिए चुनौती देना असंभव है और यह लड़ाई अनंत काल तक जारी रहेगी।
यह ऐसे समय में आया है जब EVM की विश्वसनीयता को लेकर कई विपक्षी दलों की आपत्तियाँ पहले से ही चर्चा में हैं। गौरतलब है कि ठाकरे की अपनी रैलियों में उमड़ने वाली भीड़ और मनसे को मिलने वाली सीटों के बीच के अंतर पर भी वे सीधे सवाल उठाते रहे हैं — उन्होंने कहा कि ECI के भीतर से मिली अंदरूनी जानकारी इस सवाल का जवाब देती है।
आगे क्या होगा
ठाकरे की माँगों पर अब तक ECI या केंद्र सरकार की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह बयान आगामी चुनावी मौसम से पहले विपक्षी गठजोड़ की भूमिका तय करने की कोशिश हो सकती है। मनसे प्रमुख की यह माँग विपक्षी राजनीति में EVM बनाम पेपर बैलेट की बहस को एक बार फिर केंद्र में ले आई है।