4 अक्टूबर 2026
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सीईसी के खिलाफ राज-उद्धव का संयुक्त मार्च, संजय राउत बोले — '1857 जैसा विद्रोह है यह आंदोलन'

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सीईसी के खिलाफ राज-उद्धव का संयुक्त मार्च, संजय राउत बोले — '1857 जैसा विद्रोह है यह आंदोलन'

सारांश

लंबे अरसे बाद राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे एक मंच पर — सीईसी ज्ञानेश कुमार के खिलाफ संयुक्त मार्च में। संजय राउत ने इसे '1857 का विद्रोह' बताकर सभी चुनाव रद्द करने की माँग उठाई। MVA की इस एकजुटता को महाराष्ट्र में विपक्षी राजनीति का नया मोड़ माना जा रहा है।

मुख्य बातें

मनसे प्रमुख राज ठाकरे और शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे 4 अक्टूबर 2026 को मुंबई में सीईसी ज्ञानेश कुमार के खिलाफ संयुक्त विरोध मार्च का नेतृत्व कर रहे हैं।
शिवसेना (यूबीटी) सांसद संजय राउत ने इसे ' 1857 जैसा विद्रोह' बताया और सभी चुनाव रद्द कर पुनर्मतदान कराने की माँग की।
राउत ने पूर्व सीईसी राजीव कुमार और वर्तमान सीईसी ज्ञानेश कुमार दोनों की भूमिका को 'संदिग्ध' करार दिया।
महाविकास अघाड़ी (MVA) ने मार्च को पूरा समर्थन दिया है; कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने भी चुनावों को 'गैर-कानूनी' बताया था।
पुणे में एमपीएससी छात्र तीन-चार दिनों से धरने पर; राउत ने शाम 6:30 बजे धरनास्थल पर पहुँचने की घोषणा की।

शिवसेना (यूबीटी) सांसद संजय राउत ने 4 अक्टूबर 2026 को मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रस्तावित संयुक्त विरोध मार्च को '1857 के विद्रोह' जैसा बताते हुए केंद्र सरकार और चुनाव आयोग पर तीखा हमला बोला। मनसे प्रमुख राज ठाकरे और शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे इस मार्च का संयुक्त नेतृत्व कर रहे हैं — लंबे अरसे बाद दोनों ठाकरे बंधु एक मंच पर साथ दिखेंगे। महाविकास अघाड़ी (MVA) ने भी इस मार्च को अपना पूर्ण समर्थन दिया है।

राउत के तीखे आरोप

राउत ने इस विरोध की प्रकृति स्पष्ट करते हुए कहा, 'यह विरोध देश में चल रही तानाशाही, चुनावों को हाईजैक करने, चुनाव आयोग और सुप्रीम कोर्ट को अपनी जेब में रखने, वोट और चुनाव चुराने, और सांसदों व विधायकों को तोड़ने के खिलाफ है। यह उन सभी चीजों के खिलाफ एक विद्रोह है, ठीक वैसा ही जैसा 1857 में हुआ था।' उन्होंने यह भी कहा कि राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे की संयुक्त घोषणा को पूरे MVA का समर्थन प्राप्त है।

पूर्व व वर्तमान सीईसी पर निशाना

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे द्वारा सभी चुनावों को 'गैर-कानूनी' बताए जाने के बाद राउत ने और आक्रामक रुख अपनाया। उन्होंने कहा, 'चुनावों में धोखाधड़ी, भ्रष्टाचार और हेरफेर हुई है। पूर्व सीईसी राजीव कुमार और मौजूदा सीईसी ज्ञानेश कुमार की भूमिका संदिग्ध है।' राउत ने माँग की कि सभी चुनाव रद्द कर विधानसभा और लोकसभा के नए सिरे से चुनाव कराए जाएँ — यह माँग विपक्ष की अब तक की सबसे तीखी संवैधानिक चुनौती मानी जा रही है।

उन्होंने एक अन्य बयान में चुनाव आयुक्तों पर प्रहार करते हुए कहा, 'जिस तरह से चुनाव कराए गए हैं, उसमें गड़बड़ी, भ्रष्टाचार और धांधली के आरोप लगे हैं — ज्ञानेश कुमार और पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार, दोनों ही देश के दुश्मन हैं।' गौरतलब है कि यह बयान चुनाव आयोग की संवैधानिक स्वायत्तता पर सीधा प्रश्नचिह्न लगाता है और विपक्ष की बयानबाजी में नया तल्खीपन दर्शाता है।

ठाकरे बंधुओं का दुर्लभ एकजुटता का क्षण

यह ऐसे समय में आया है जब राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे के बीच वर्षों पुरानी राजनीतिक दूरी किसी साझे मंच को लेकर अचर्चित रही है। दोनों के एक साथ मार्च में उतरने को महाराष्ट्र की विपक्षी राजनीति में एक असामान्य पल के रूप में देखा जा रहा है। विश्लेषकों का कहना है कि चुनाव आयोग जैसे संस्थागत मुद्दे पर एकता, विपक्ष को सत्ता-पक्ष के खिलाफ नैरेटिव की नई धार दे सकती है।

एमपीएससी आंदोलन और राउत का हस्तक्षेप

इस सियासी हलचल के बीच पुणे में एमपीएससी (MPSC) की तैयारी कर रहे छात्र पिछले तीन-चार दिनों से लगातार धरने पर बैठे हैं। राउत ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर पोस्ट करते हुए कहा कि विधायक रोहित पवार ने इस मुद्दे को उठाया है और छात्रों का गुस्सा पेपर लीक, प्रक्रियागत गड़बड़ी और अनिश्चित भविष्य के कारण है। उन्होंने एमपीएससी घोटालों की निष्पक्ष जाँच और हजारों रिक्त पदों पर तत्काल भर्ती की माँग का समर्थन किया, और घोषणा की कि वे उसी शाम 6:30 बजे धरनास्थल पर जाएँगे।

राउत ने यह भी कहा कि छात्रों को बाँटने की कोशिश की गई है और उन्हें नोटिस भेजे गए हैं, जबकि सरकार कई आश्वासन दे चुकी है फिर भी प्रदर्शन जारी है। आने वाले दिनों में यह आंदोलन महाराष्ट्र की राजनीतिक तस्वीर को और तेज़ी से बदल सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

विपक्ष की भावनात्मक तीव्रता को तो दर्शाते हैं, लेकिन संवैधानिक व्यवहार्यता के सवाल से बचते हैं — भारत में पिछले परिणामों के आधार पर चुनाव रद्द करने का कोई स्थापित कानूनी ढाँचा नहीं है। असली कहानी यह है कि राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे का एक मंच पर आना एक संस्थागत मुद्दे को व्यक्तिगत राजनीतिक सुलह का वाहन बनाता है — और यह MVA के लिए संख्या-बल से बड़ा प्रतीकात्मक लाभ है। एमपीएससी छात्रों के आंदोलन को इस मार्च से जोड़ना विपक्ष की 'जनता बनाम व्यवस्था' वाली कथा को व्यापक आधार देने की कोशिश है, जो 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले महाराष्ट्र की जमीनी राजनीति पर असर डाल सकती है।
RashtraPress
4 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सीईसी ज्ञानेश कुमार के खिलाफ मुंबई में विरोध मार्च क्यों निकाला जा रहा है?
मनसे प्रमुख राज ठाकरे और शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे के नेतृत्व में यह मार्च मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों के विरोध में निकाला जा रहा है। महाविकास अघाड़ी का पूरा समर्थन इस मार्च को प्राप्त है।
संजय राउत ने '1857 जैसा विद्रोह' किस संदर्भ में कहा?
संजय राउत ने 4 अक्टूबर 2026 को कहा कि यह विरोध तानाशाही, चुनाव चोरी, चुनाव आयोग और सुप्रीम कोर्ट को कथित रूप से प्रभावित करने तथा जनप्रतिनिधियों को तोड़ने के खिलाफ एक विद्रोह है, जिसकी तुलना उन्होंने 1857 के स्वतंत्रता संग्राम से की।
राउत ने किन चुनावों को रद्द करने की माँग की है?
राउत ने माँग की है कि चुनावों में हुई कथित धोखाधड़ी और भ्रष्टाचार के मद्देनज़र सभी मौजूदा चुनाव रद्द कर विधानसभा और लोकसभा के चुनाव नए सिरे से कराए जाएँ। उन्होंने पूर्व सीईसी राजीव कुमार और वर्तमान सीईसी ज्ञानेश कुमार दोनों की भूमिका को संदिग्ध बताया।
राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे का एक साथ आना क्यों महत्वपूर्ण है?
दोनों ठाकरे बंधु लंबे समय से अलग-अलग राजनीतिक राहों पर थे और उनका एक साझे मंच पर आना दुर्लभ माना जा रहा है। विश्लेषकों के अनुसार यह एकजुटता महाराष्ट्र में विपक्षी खेमे को सत्तारूढ़ दल के खिलाफ नई प्रतीकात्मक और राजनीतिक ताकत दे सकती है।
एमपीएससी छात्रों का आंदोलन और संजय राउत की भूमिका क्या है?
पुणे में एमपीएससी की तैयारी करने वाले छात्र पेपर लीक, प्रक्रियागत गड़बड़ी और हजारों रिक्त पदों पर भर्ती न होने के विरोध में तीन-चार दिनों से धरने पर बैठे हैं। राउत ने एक्स पर पोस्ट कर आंदोलन का समर्थन किया और उसी शाम 6:30 बजे धरनास्थल पर पहुँचने की घोषणा की।
राष्ट्र प्रेस
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