सीईसी के खिलाफ राज-उद्धव का संयुक्त मार्च, संजय राउत बोले — '1857 जैसा विद्रोह है यह आंदोलन'
सारांश
मुख्य बातें
शिवसेना (यूबीटी) सांसद संजय राउत ने 4 अक्टूबर 2026 को मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रस्तावित संयुक्त विरोध मार्च को '1857 के विद्रोह' जैसा बताते हुए केंद्र सरकार और चुनाव आयोग पर तीखा हमला बोला। मनसे प्रमुख राज ठाकरे और शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे इस मार्च का संयुक्त नेतृत्व कर रहे हैं — लंबे अरसे बाद दोनों ठाकरे बंधु एक मंच पर साथ दिखेंगे। महाविकास अघाड़ी (MVA) ने भी इस मार्च को अपना पूर्ण समर्थन दिया है।
राउत के तीखे आरोप
राउत ने इस विरोध की प्रकृति स्पष्ट करते हुए कहा, 'यह विरोध देश में चल रही तानाशाही, चुनावों को हाईजैक करने, चुनाव आयोग और सुप्रीम कोर्ट को अपनी जेब में रखने, वोट और चुनाव चुराने, और सांसदों व विधायकों को तोड़ने के खिलाफ है। यह उन सभी चीजों के खिलाफ एक विद्रोह है, ठीक वैसा ही जैसा 1857 में हुआ था।' उन्होंने यह भी कहा कि राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे की संयुक्त घोषणा को पूरे MVA का समर्थन प्राप्त है।
पूर्व व वर्तमान सीईसी पर निशाना
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे द्वारा सभी चुनावों को 'गैर-कानूनी' बताए जाने के बाद राउत ने और आक्रामक रुख अपनाया। उन्होंने कहा, 'चुनावों में धोखाधड़ी, भ्रष्टाचार और हेरफेर हुई है। पूर्व सीईसी राजीव कुमार और मौजूदा सीईसी ज्ञानेश कुमार की भूमिका संदिग्ध है।' राउत ने माँग की कि सभी चुनाव रद्द कर विधानसभा और लोकसभा के नए सिरे से चुनाव कराए जाएँ — यह माँग विपक्ष की अब तक की सबसे तीखी संवैधानिक चुनौती मानी जा रही है।
उन्होंने एक अन्य बयान में चुनाव आयुक्तों पर प्रहार करते हुए कहा, 'जिस तरह से चुनाव कराए गए हैं, उसमें गड़बड़ी, भ्रष्टाचार और धांधली के आरोप लगे हैं — ज्ञानेश कुमार और पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार, दोनों ही देश के दुश्मन हैं।' गौरतलब है कि यह बयान चुनाव आयोग की संवैधानिक स्वायत्तता पर सीधा प्रश्नचिह्न लगाता है और विपक्ष की बयानबाजी में नया तल्खीपन दर्शाता है।
ठाकरे बंधुओं का दुर्लभ एकजुटता का क्षण
यह ऐसे समय में आया है जब राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे के बीच वर्षों पुरानी राजनीतिक दूरी किसी साझे मंच को लेकर अचर्चित रही है। दोनों के एक साथ मार्च में उतरने को महाराष्ट्र की विपक्षी राजनीति में एक असामान्य पल के रूप में देखा जा रहा है। विश्लेषकों का कहना है कि चुनाव आयोग जैसे संस्थागत मुद्दे पर एकता, विपक्ष को सत्ता-पक्ष के खिलाफ नैरेटिव की नई धार दे सकती है।
एमपीएससी आंदोलन और राउत का हस्तक्षेप
इस सियासी हलचल के बीच पुणे में एमपीएससी (MPSC) की तैयारी कर रहे छात्र पिछले तीन-चार दिनों से लगातार धरने पर बैठे हैं। राउत ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर पोस्ट करते हुए कहा कि विधायक रोहित पवार ने इस मुद्दे को उठाया है और छात्रों का गुस्सा पेपर लीक, प्रक्रियागत गड़बड़ी और अनिश्चित भविष्य के कारण है। उन्होंने एमपीएससी घोटालों की निष्पक्ष जाँच और हजारों रिक्त पदों पर तत्काल भर्ती की माँग का समर्थन किया, और घोषणा की कि वे उसी शाम 6:30 बजे धरनास्थल पर जाएँगे।
राउत ने यह भी कहा कि छात्रों को बाँटने की कोशिश की गई है और उन्हें नोटिस भेजे गए हैं, जबकि सरकार कई आश्वासन दे चुकी है फिर भी प्रदर्शन जारी है। आने वाले दिनों में यह आंदोलन महाराष्ट्र की राजनीतिक तस्वीर को और तेज़ी से बदल सकता है।