संजय राउत का बड़ा आरोप: CEC ज्ञानेश कुमार और अमित शाह को तुरंत बर्खास्त करें, 13 करोड़ वोटर नाम हटाए गए
सारांश
मुख्य बातें
शिवसेना (यूबीटी) के सांसद संजय राउत ने 23 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर लोकतंत्र को कमज़ोर करने का आरोप लगाया और दोनों को तत्काल पद से हटाने की माँग की। राउत के अनुसार, विशेष सारांश पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया में कथित गड़बड़ी के कारण पूरे देश में 13 करोड़ मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाए गए हैं।
मुख्य आरोप और घटनाक्रम
राउत ने इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में SIR और फॉर्म 6 में बदलावों को लेकर 14 बार आपत्ति जताई, लेकिन मुख्य चुनाव आयुक्त ने उन्हें नज़रअंदाज़ किया। उन्होंने आरोप लगाया कि कैबिनेट सेक्रेटरी से शिकायत करने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हुई।
राउत ने कहा, 'चुनाव आयोग तीन लोगों को मिलकर चलता है — मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी। संधू और जोशी ने शिकायत की है कि 10 महीने में हमने SIR, फॉर्म 6 में बदलाव को लेकर 14 बार आपत्ति जताई है लेकिन उसे नज़रअंदाज़ किया गया।'
राउत की माँग: मोदी अमित शाह को हटाएँ
राउत ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से माँग की कि वे गृह मंत्री अमित शाह को तुरंत कैबिनेट से बर्खास्त करें। उन्होंने कहा, 'अगर पीएम मोदी कार्रवाई नहीं करते हैं, तो मैं राष्ट्रपति से ज्ञानेश कुमार को हटाने की अपील करूँगा।' उनके बयान में यह भी कहा गया कि अगर राष्ट्रपति भी कोई कार्रवाई नहीं करते, तो 'सेना प्रमुख को देश को ऐसे हुक्मशाहों से बचाने के लिए आगे आना चाहिए' — जो कि एक अत्यंत तीखी और विवादास्पद टिप्पणी है।
एक्स पोस्ट में 'वोटों की डकैती' का आरोप
राउत ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर एक पोस्ट में लिखा कि 'यह वोट की चोरी नहीं बल्कि वोटों की डकैती है, जो एक सॉफ्टवेयर के ज़रिए और सरकार के इशारे पर की जा रही है।' उन्होंने कथित सॉफ्टवेयर का नाम 'ईसीआई नेट' बताया और दावा किया कि इसे अदालतों का 'प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष समर्थन' मिला हुआ है।
गौरतलब है कि राउत ने यह भी आरोप लगाया कि बिना किसी गजट नोटिफिकेशन के फॉर्म 6 में बदलाव किए गए और मतदाताओं के नाम जोड़ने-हटाने का अधिकार — जो निर्वाचन पंजीकरण अधिकारियों (EROs) के पास होता है — छीनकर निजी कंपनियों को सौंप दिया गया।
बिहार और पश्चिम बंगाल का संदर्भ
राउत ने विशेष रूप से बिहार और पश्चिम बंगाल का उल्लेख करते हुए कहा कि 'इसका मतलब है कि इन राज्यों में अमित शाह चुनाव जीत गए हैं।' उन्होंने यह भी कहा कि 'यह स्पष्ट हो गया है कि मुख्य चुनाव आयुक्त की वजह से भाजपा चुनाव जीत रही है।' ये सभी आरोप राउत के अपने बयान हैं और इन्हें स्वतंत्र रूप से सत्यापित नहीं किया गया है।
सुप्रीम कोर्ट से संज्ञान लेने की माँग
राउत ने सर्वोच्च न्यायालय से इस पूरे मामले का संज्ञान लेने की माँग की। उनका कहना है कि जब आयोग के भीतर के 'ईमानदार अधिकारी' विरोध करते हैं तो उन्हें किनारे कर दिया जाता है, लेकिन अब दो चुनाव आयुक्तों ने 'खुलकर बगावत' कर दी है। यह ऐसे समय में आया है जब देश में चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता और मतदाता सूची की शुद्धता को लेकर विपक्षी दलों की आपत्तियाँ तेज़ होती जा रही हैं। सरकार और चुनाव आयोग की ओर से इन आरोपों पर तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है।