24 सितंबर 2026
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शिवसेना (यूबीटी) का ECI पर बड़ा हमला: CEC ज्ञानेश कुमार पर '14 बार आपत्ति' और 13 करोड़ मतदाताओं के नाम हटाने का आरोप

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शिवसेना (यूबीटी) का ECI पर बड़ा हमला: CEC ज्ञानेश कुमार पर '14 बार आपत्ति' और 13 करोड़ मतदाताओं के नाम हटाने का आरोप

सारांश

शिवसेना (यूबीटी) के मुखपत्र 'सामना' ने ECI को 'सत्ता का नौकर' बताया और CEC ज्ञानेश कुमार पर 14 बार औपचारिक आपत्तियाँ नजरअंदाज करने का आरोप लगाया। 13 करोड़ मतदाताओं के नाम हटाने और महाराष्ट्र में 42 लाख वोटों की अचानक बढ़ोतरी के दावों के साथ यह हमला चुनावी विश्वसनीयता पर गहरे सवाल खड़े करता है।

मुख्य बातें

शिवसेना (यूबीटी) ने 24 सितंबर 2026 को 'सामना' संपादकीय के ज़रिए ECI और गृह मंत्री अमित शाह पर तीखा हमला किया।
आयुक्त सुखबीर संधू और विवेक जोशी ने पिछले दस महीनों में CEC ज्ञानेश कुमार के कामकाज पर कम से कम 14 बार औपचारिक आपत्ति दर्ज कराई — ऐसा संपादकीय में दावा किया गया।
कथित तौर पर देशभर में 13 करोड़ मतदाताओं को SSR प्रक्रिया की आड़ में मताधिकार से वंचित किया गया; महाराष्ट्र में 2 करोड़ से अधिक नाम हटाए जाने का दावा।
हाल के महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों में मतों की संख्या में अचानक 42 लाख की बढ़ोतरी का आरोप।
संपादकीय में PM मोदी से अमित शाह और CEC ज्ञानेश कुमार को तत्काल हटाने की माँग की गई।
ECI और केंद्र सरकार की ओर से इन आरोपों पर अभी कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।

शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) ने 24 सितंबर 2026 को भारत निर्वाचन आयोग (ECI) और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर तीखा प्रहार करते हुए आरोप लगाया कि चुनाव आयोग 'घर के नौकर' की तरह काम कर रहा है और संवैधानिक संस्थाओं में जनता का विश्वास खत्म हो रहा है। पार्टी के मुखपत्र 'सामना' के एक विस्तृत संपादकीय में ये आरोप लगाए गए, जो मीडिया में आई जाँच रिपोर्टों पर आधारित बताए गए।

मुख्य आरोप: 14 बार दर्ज हुई आपत्तियाँ

संपादकीय में दावा किया गया कि साथी चुनाव आयुक्त सुखबीर संधू और विवेक जोशी ने पिछले दस महीनों में मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के कामकाज के तरीके पर कम से कम 14 बार औपचारिक रूप से आपत्ति दर्ज कराई। कथित तौर पर इन आपत्तियों को बार-बार नजरअंदाज किया गया।

संपादकीय के अनुसार, जब कोई विकल्प नहीं बचा, तो दोनों असहमत आयुक्तों ने यह मामला सीधे कैबिनेट सचिवालय तक पहुँचाया, जिससे प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) को चुनाव आयोग के भीतर चल रहे कथित आंतरिक संकट की जानकारी मिली। ये आरोप अत्यंत गंभीर हैं, हालाँकि ECI या सरकार की ओर से इन पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

मतदाता सूची पर 'व्यवस्थागत घोटाले' का दावा

संपादकीय में 'विशेष सारांश संशोधन' (SSR) प्रक्रिया को एक 'सिस्टमैटिक स्कैम' यानी व्यवस्थागत घोटाला करार दिया गया। पार्टी ने आरोप लगाया कि इस प्रक्रिया की आड़ में पूरे भारत में कथित तौर पर लगभग 13 करोड़ मतदाताओं को मताधिकार से वंचित किया गया, जिनमें प्रमुख नागरिक और जानी-मानी हस्तियाँ भी शामिल हैं।

विशेष रूप से महाराष्ट्र का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया गया कि राज्य की मतदाता सूची से कथित तौर पर दो करोड़ से अधिक नाम हटाए गए। इससे भी आगे, संपादकीय में दावा किया गया कि हाल के महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों के दौरान मतों की संख्या में अचानक 42 लाख की बढ़ोतरी दर्ज की गई, जिसने कथित तौर पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेतृत्व वाले गठबंधन की जीत का मार्ग प्रशस्त किया।

अमित शाह और CEC पर सीधा निशाना

उद्धव ठाकरे की पार्टी ने गृह मंत्री अमित शाह को संवैधानिक गिरावट का मुख्य 'मास्टरमाइंड' बताया। संपादकीय में पूर्व CEC राजीव कुमार और वर्तमान CEC ज्ञानेश कुमार को 'संवैधानिक माफिया' और 'लोकतंत्र का हत्यारा' जैसे कड़े शब्दों से नवाजा गया। साथ ही यह आरोप भी लगाया गया कि ECI नेतृत्व ने पार्टियों में फूट को बढ़ावा देकर और असली नाम व चुनाव चिह्न अलग हुए गुटों को सौंपकर लोकतंत्र को कमज़ोर किया।

गौरतलब है कि यह आरोप ऐसे समय में आया है जब शिवसेना खुद नाम और चुनाव चिह्न को लेकर एकनाथ शिंदे गुट के साथ कानूनी लड़ाई में उलझी है और ECI के उस फैसले को चुनौती दे रही है, जिसमें 'शिवसेना' नाम व चुनाव चिह्न शिंदे गुट को दिया गया था।

विपक्ष की एकजुटता और PM से माँग

संपादकीय में राहुल गांधी, ममता बनर्जी, उद्धव ठाकरे और तेजस्वी यादव जैसे विपक्षी नेताओं की चुनावी गड़बड़ियों के खिलाफ लगातार आवाज़ उठाने के लिए सराहना की गई। साथ ही कमिश्नर संधू और जोशी की भी अंदरूनी विसंगतियाँ सामने लाने के लिए प्रशंसा की गई।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से तत्काल हस्तक्षेप की माँग करते हुए संपादकीय में कहा गया कि 'जब तक अमित शाह और ज्ञानेश कुमार जैसे लोग सत्ता में हैं, भारत के संविधान का कोई मतलब नहीं है। प्रधानमंत्री को उन्हें तुरंत हटा देना चाहिए — तभी देश को बचाया जा सकता है। चूँकि शाह और कुमार खुद इस्तीफ़ा नहीं देंगे, इसलिए उन्हें हटाना ही पीएम मोदी के पास एकमात्र विकल्प है।'

क्या होगा आगे

यह विवाद ऐसे समय में उठा है जब पश्चिम बंगाल और बिहार में आगामी विधानसभा चुनावों की तैयारियाँ चल रही हैं। संपादकीय में इन राज्यों में भी पिछले चुनावों के दौरान लाखों मतदाताओं के नाम जानबूझकर हटाए जाने का आरोप लगाया गया है। ECI, केंद्र सरकार और CEC कार्यालय की इन आरोपों पर प्रतिक्रिया का इंतज़ार है, जो इस विवाद की दिशा तय करेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो यह स्थापित करना चाहती है कि भारत की चुनावी संस्थाएँ अपनी स्वायत्तता खो रही हैं — लेकिन इस बार भिन्नता यह है कि दावे अंदरूनी असहमति के दस्तावेजों पर आधारित बताए जा रहे हैं, न कि केवल बाहरी आलोचना पर। यदि यह सच है कि दो आयुक्तों ने 14 बार दर्ज आपत्तियों के बाद मामला PMO तक पहुँचाया, तो यह संस्थागत संकट की गंभीर मिसाल है जिसकी स्वतंत्र जाँच होनी चाहिए। दूसरी ओर, यह भी उल्लेखनीय है कि यही पार्टी ECI के उस फैसले से खुद प्रभावित है, जिसमें उससे नाम और चुनाव चिह्न छीना गया — जो इन आरोपों के पीछे की प्रेरणा पर वैध प्रश्न खड़े करता है। मुख्यधारा की कवरेज इन दोनों पहलुओं को एक साथ रखने से चूकती है।
RashtraPress
24 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

शिवसेना (यूबीटी) ने ECI पर क्या आरोप लगाए हैं?
पार्टी ने अपने मुखपत्र 'सामना' के संपादकीय में आरोप लगाया कि ECI 'घर के नौकर' की तरह सत्तारूढ़ दल के हित में काम कर रहा है। कथित तौर पर CEC ज्ञानेश कुमार ने दस महीनों में 14 बार दर्ज आपत्तियों को नजरअंदाज किया और SSR प्रक्रिया के जरिए 13 करोड़ मतदाताओं को सूची से हटाया गया।
CEC ज्ञानेश कुमार पर क्या विशेष आरोप हैं?
'सामना' संपादकीय के अनुसार, CEC ज्ञानेश कुमार ने सहयोगी आयुक्तों की कम से कम 14 औपचारिक आपत्तियों को नजरअंदाज किया और कथित रूप से एकतरफा तरीके से मतदाता सूचियों में फेरबदल किया। असहमत आयुक्तों ने अंततः यह मामला कैबिनेट सचिवालय तक पहुँचाया।
महाराष्ट्र की मतदाता सूची को लेकर क्या दावे किए गए हैं?
संपादकीय में दावा किया गया है कि महाराष्ट्र की मतदाता सूची से कथित तौर पर 2 करोड़ से अधिक नाम हटाए गए। इसके अलावा हाल के विधानसभा चुनावों के दौरान मतों की संख्या में अचानक 42 लाख की बढ़ोतरी हुई, जिसने BJP नेतृत्व वाले गठबंधन की जीत का रास्ता साफ किया — ऐसा आरोप लगाया गया है।
क्या ECI या सरकार ने इन आरोपों का जवाब दिया है?
24 सितंबर 2026 तक ECI, केंद्र सरकार या CEC कार्यालय की ओर से इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। ये दावे शिवसेना (यूबीटी) के पार्टी मुखपत्र द्वारा लगाए गए हैं और स्वतंत्र रूप से सत्यापित नहीं हैं।
उद्धव ठाकरे गुट ने PM मोदी से क्या माँग की है?
संपादकीय में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से तत्काल हस्तक्षेप की माँग करते हुए कहा गया कि गृह मंत्री अमित शाह और CEC ज्ञानेश कुमार को तुरंत हटाया जाए। पार्टी का तर्क है कि चूँकि ये दोनों स्वयं इस्तीफ़ा नहीं देंगे, इसलिए PM को ही यह कदम उठाना होगा।
राष्ट्र प्रेस
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