शिवसेना (यूबीटी) की माँग: मोदी सरकार के 12 साल के कार्यकाल की हो निष्पक्ष जाँच, 'सामना' में तीखा हमला
सारांश
मुख्य बातें
शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) ने 11 जून 2026 को अपने मुखपत्र 'सामना' के संपादकीय के माध्यम से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली भारतीय जनता पार्टी (BJP) सरकार के 12 वर्षों के कार्यकाल की निष्पक्ष जाँच अथवा 'ऑडिट' की माँग की। पार्टी का आरोप है कि यह कार्यकाल भारत की ऐतिहासिक शासन परंपरा से मेल नहीं खाता और इसमें बुनियादी अंतर दिखाई देता है।
संपादकीय में क्या कहा गया
पार्टी के मुखपत्र में प्रकाशित संपादकीय में कहा गया कि पंडित जवाहरलाल नेहरू के नेतृत्व में AIIMS, IIT और IIM जैसी राष्ट्रीय संस्थाओं की नींव रखी गई थी। संपादकीय के अनुसार, उस दौर का शासन राष्ट्र निर्माण, अंतरराष्ट्रीय सम्मान और सांप्रदायिक व धार्मिक घृणा से मुक्त सामाजिक वातावरण बनाने पर केंद्रित था।
संपादकीय में आरोप लगाया गया कि पिछले 12 वर्षों में प्रवर्तन निदेशालय (ED), केंद्रीय जाँच ब्यूरो (CBI), आयकर विभाग और पुलिस जैसी केंद्रीय एजेंसियों का कथित तौर पर राजनीतिक उपयोग किया गया है। इसके साथ ही यह भी कहा गया कि इससे संवैधानिक ढाँचे को क्षति पहुँची है तथा चुनाव आयोग (ECI) और शीर्ष न्यायिक संस्थाओं की स्वतंत्रता प्रभावित हुई है।
आर्थिक और सामाजिक मोर्चे पर आरोप
संपादकीय में दावा किया गया कि इस अवधि में भारतीय अर्थव्यवस्था कमज़ोर हुई है, रुपये के मूल्य में गिरावट आई है और विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव बढ़ा है। पार्टी ने यह भी आरोप लगाया कि राष्ट्रीय हितों को कुछ बड़े उद्योगपतियों के पक्ष में किया गया है। इसके अलावा बेरोज़गारी में वृद्धि, महिलाओं के विरुद्ध अपराधों में बढ़ोतरी और किसानों की आत्महत्याओं पर भी गहरी चिंता व्यक्त की गई। संपादकीय में यह भी उल्लेख किया गया कि लगभग 80 करोड़ लोग मुफ़्त राशन पर निर्भर हैं।
ऐतिहासिक घटनाओं को लेकर आपत्ति
शिवसेना (यूबीटी) ने आरोप लगाया कि वर्तमान राजनीतिक व्यवस्था में ऐतिहासिक बलिदानों और सैन्य घटनाओं को कथित तौर पर गलत तरीके से प्रस्तुत किया जा रहा है। संपादकीय में ऑपरेशन ब्लू स्टार, पुलवामा हमला, पहलगाम घटना और कारगिल युद्ध का विशेष रूप से उल्लेख किया गया।
निष्पक्ष जाँच की माँग
पार्टी ने कहा कि पहले ब्रिटिश शासन ने देश का शोषण किया था, परंतु उसके अनुसार पिछले 12 वर्षों की व्यवस्था में शोषण और भी गंभीर रूप ले चुका है। शिवसेना (यूबीटी) ने इस पूरे कार्यकाल की निष्पक्ष जाँच या 'ऑडिट' की माँग की है, ताकि भारत की वैश्विक और घरेलू स्थिति का सही मूल्यांकन हो सके। यह माँग ऐसे समय में आई है जब विपक्षी दल केंद्र सरकार की नीतियों पर लगातार सवाल उठा रहे हैं।