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शिवसेना (यूबीटी) की माँग: मोदी सरकार के 12 साल के कार्यकाल की हो निष्पक्ष जाँच, 'सामना' में तीखा हमला

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शिवसेना (यूबीटी) की माँग: मोदी सरकार के 12 साल के कार्यकाल की हो निष्पक्ष जाँच, 'सामना' में तीखा हमला

सारांश

शिवसेना (यूबीटी) ने 'सामना' के संपादकीय में मोदी सरकार के 12 साल के कार्यकाल पर तीखा हमला बोला — ED, CBI के कथित राजनीतिक दुरुपयोग से लेकर 80 करोड़ लोगों की मुफ़्त राशन पर निर्भरता तक। पार्टी ने इस पूरे दौर की निष्पक्ष 'ऑडिट' की माँग की है।

मुख्य बातें

शिवसेना (यूबीटी) ने 11 जून 2026 को मुखपत्र 'सामना' में BJP सरकार के 12 साल के कार्यकाल की निष्पक्ष जाँच की माँग की।
संपादकीय में ED , CBI , आयकर विभाग और पुलिस के कथित राजनीतिक उपयोग का आरोप लगाया गया।
पार्टी का दावा — लगभग 80 करोड़ लोग मुफ़्त राशन पर निर्भर; रुपये का मूल्य गिरा, विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव बढ़ा।
संपादकीय में ऑपरेशन ब्लू स्टार , पुलवामा हमला , पहलगाम घटना और कारगिल युद्ध की प्रस्तुति पर आपत्ति जताई गई।
पार्टी ने पंडित नेहरू के कार्यकाल की तुलना करते हुए AIIMS , IIT , IIM जैसी संस्थाओं की स्थापना को राष्ट्र निर्माण का उदाहरण बताया।

शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) ने 11 जून 2026 को अपने मुखपत्र 'सामना' के संपादकीय के माध्यम से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली भारतीय जनता पार्टी (BJP) सरकार के 12 वर्षों के कार्यकाल की निष्पक्ष जाँच अथवा 'ऑडिट' की माँग की। पार्टी का आरोप है कि यह कार्यकाल भारत की ऐतिहासिक शासन परंपरा से मेल नहीं खाता और इसमें बुनियादी अंतर दिखाई देता है।

संपादकीय में क्या कहा गया

पार्टी के मुखपत्र में प्रकाशित संपादकीय में कहा गया कि पंडित जवाहरलाल नेहरू के नेतृत्व में AIIMS, IIT और IIM जैसी राष्ट्रीय संस्थाओं की नींव रखी गई थी। संपादकीय के अनुसार, उस दौर का शासन राष्ट्र निर्माण, अंतरराष्ट्रीय सम्मान और सांप्रदायिक व धार्मिक घृणा से मुक्त सामाजिक वातावरण बनाने पर केंद्रित था।

संपादकीय में आरोप लगाया गया कि पिछले 12 वर्षों में प्रवर्तन निदेशालय (ED), केंद्रीय जाँच ब्यूरो (CBI), आयकर विभाग और पुलिस जैसी केंद्रीय एजेंसियों का कथित तौर पर राजनीतिक उपयोग किया गया है। इसके साथ ही यह भी कहा गया कि इससे संवैधानिक ढाँचे को क्षति पहुँची है तथा चुनाव आयोग (ECI) और शीर्ष न्यायिक संस्थाओं की स्वतंत्रता प्रभावित हुई है।

आर्थिक और सामाजिक मोर्चे पर आरोप

संपादकीय में दावा किया गया कि इस अवधि में भारतीय अर्थव्यवस्था कमज़ोर हुई है, रुपये के मूल्य में गिरावट आई है और विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव बढ़ा है। पार्टी ने यह भी आरोप लगाया कि राष्ट्रीय हितों को कुछ बड़े उद्योगपतियों के पक्ष में किया गया है। इसके अलावा बेरोज़गारी में वृद्धि, महिलाओं के विरुद्ध अपराधों में बढ़ोतरी और किसानों की आत्महत्याओं पर भी गहरी चिंता व्यक्त की गई। संपादकीय में यह भी उल्लेख किया गया कि लगभग 80 करोड़ लोग मुफ़्त राशन पर निर्भर हैं।

ऐतिहासिक घटनाओं को लेकर आपत्ति

शिवसेना (यूबीटी) ने आरोप लगाया कि वर्तमान राजनीतिक व्यवस्था में ऐतिहासिक बलिदानों और सैन्य घटनाओं को कथित तौर पर गलत तरीके से प्रस्तुत किया जा रहा है। संपादकीय में ऑपरेशन ब्लू स्टार, पुलवामा हमला, पहलगाम घटना और कारगिल युद्ध का विशेष रूप से उल्लेख किया गया।

निष्पक्ष जाँच की माँग

पार्टी ने कहा कि पहले ब्रिटिश शासन ने देश का शोषण किया था, परंतु उसके अनुसार पिछले 12 वर्षों की व्यवस्था में शोषण और भी गंभीर रूप ले चुका है। शिवसेना (यूबीटी) ने इस पूरे कार्यकाल की निष्पक्ष जाँच या 'ऑडिट' की माँग की है, ताकि भारत की वैश्विक और घरेलू स्थिति का सही मूल्यांकन हो सके। यह माँग ऐसे समय में आई है जब विपक्षी दल केंद्र सरकार की नीतियों पर लगातार सवाल उठा रहे हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि शिवसेना (यूबीटी) की उस बड़ी रणनीति का हिस्सा है जिसमें वह महाराष्ट्र में खोई ज़मीन वापस पाने के लिए केंद्र सरकार को निशाना बना रही है। 'ऑडिट' की माँग राजनीतिक रूप से प्रभावशाली लगती है, लेकिन इसका कोई संवैधानिक या संस्थागत तंत्र नहीं बताया गया — जो इसे एक नैरेटिव-निर्माण का औज़ार अधिक बनाता है। आलोचकों का कहना है कि जिस दौर में शिवसेना स्वयं BJP के साथ सत्ता में थी, उस कार्यकाल की जवाबदेही का सवाल भी उठना स्वाभाविक है। मुख्यधारा की कवरेज इस विरोधाभास को अक्सर नज़रअंदाज़ करती है।
RashtraPress
27 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

शिवसेना (यूबीटी) ने 12 साल के कार्यकाल की जाँच की माँग क्यों की?
शिवसेना (यूबीटी) का आरोप है कि BJP सरकार के 12 साल के कार्यकाल में केंद्रीय एजेंसियों का राजनीतिक दुरुपयोग हुआ, अर्थव्यवस्था कमज़ोर हुई और संवैधानिक संस्थाओं की स्वतंत्रता प्रभावित हुई। पार्टी चाहती है कि इस पूरे दौर का निष्पक्ष 'ऑडिट' हो ताकि भारत की वास्तविक स्थिति सामने आए।
'सामना' संपादकीय में BJP सरकार पर क्या-क्या आरोप लगाए गए?
संपादकीय में ED, CBI, आयकर विभाग और पुलिस के कथित राजनीतिक उपयोग, रुपये के मूल्य में गिरावट, बेरोज़गारी में वृद्धि, किसानों की आत्महत्या, महिलाओं के विरुद्ध अपराधों में बढ़ोतरी और लगभग 80 करोड़ लोगों की मुफ़्त राशन पर निर्भरता का उल्लेख किया गया। साथ ही राष्ट्रीय हितों को कुछ बड़े उद्योगपतियों के पक्ष में करने का भी आरोप लगाया गया।
शिवसेना (यूबीटी) ने पंडित नेहरू का उल्लेख क्यों किया?
संपादकीय में पंडित नेहरू के कार्यकाल को तुलनात्मक संदर्भ के रूप में प्रस्तुत किया गया, जिसमें AIIMS, IIT और IIM जैसी संस्थाओं की स्थापना को राष्ट्र निर्माण का प्रतीक बताया गया। पार्टी का तर्क है कि उस दौर में सांप्रदायिक घृणा से मुक्त माहौल और अंतरराष्ट्रीय सम्मान था, जो वर्तमान में कथित तौर पर कम हुआ है।
संपादकीय में किन ऐतिहासिक घटनाओं का ज़िक्र किया गया?
संपादकीय में ऑपरेशन ब्लू स्टार, पुलवामा हमला, पहलगाम घटना और कारगिल युद्ध का उल्लेख किया गया। पार्टी का आरोप है कि इन घटनाओं और ऐतिहासिक बलिदानों को वर्तमान राजनीतिक व्यवस्था में कथित तौर पर गलत तरीके से प्रस्तुत किया जा रहा है।
शिवसेना (यूबीटी) और BJP के बीच संबंध कैसे रहे हैं?
शिवसेना और BJP लंबे समय तक महाराष्ट्र में गठबंधन सहयोगी रहे। 2019 में सत्ता-साझेदारी विवाद के बाद दोनों दलों के रास्ते अलग हो गए और बाद में शिवसेना में विभाजन हुआ, जिससे उद्धव ठाकरे गुट 'शिवसेना (यूबीटी)' के नाम से अलग दल बना। तब से यह गुट BJP का कड़ा विरोधी बना हुआ है।
राष्ट्र प्रेस
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