शिवसेना (यूबीटी) का 'सामना' में आरोप: दल-बदल और ईवीएम विवाद के बीच लोकतंत्र संकट में
सारांश
मुख्य बातें
शिवसेना (यूबीटी) ने मंगलवार, 16 जून को अपने पार्टी मुखपत्र 'सामना' के संपादकीय में दावा किया कि भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था में गंभीर 'गिरावट' आ रही है — और इसके संकेत सुनियोजित दल-बदल, कथित ईवीएम विनाश, संस्थाओं की चुप्पी तथा जनता का ध्यान भटकाने की रणनीति में साफ़ दिखते हैं। पार्टी के अनुसार, ये घटनाएँ मिलकर तानाशाही की दिशा में बढ़ने के संकेत देती हैं।
मीडिया एजेंडा और ध्यान भटकाने का आरोप
संपादकीय में आरोप लगाया गया कि देश के टीवी चैनलों और अखबारों पर दल-बदल करने वाले विधायकों-सांसदों की खबरें छाई हुई हैं, जबकि कथित तौर पर चार हज़ार ईवीएम जलाए जाने की घटना पर कोई राष्ट्रीय बहस नहीं हुई। पार्टी ने कहा कि एक सांसद का शिवसेना की बैठक में शामिल न होना राष्ट्रीय सुर्खी बना दिया गया, जबकि बुनियादी सवाल दबा दिए गए।
संपादकीय में कहा गया, 'तानाशाह सरकारें दुनिया भर में ठीक ऐसा ही करती हैं — बुनियादी मुद्दों से जनता का ध्यान हटाने के लिए रोज़ नए विवाद खड़े किए जाते हैं।'
भाजपा पर 'अफवाहों के चोर बाज़ार' का आरोप
शिवसेना (यूबीटी) ने सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर 'अफवाहों का चोर बाज़ार' चलाने का आरोप लगाया। पार्टी ने कहा कि इसी बाज़ार से यह अफवाह फैलाई गई कि 'प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सबसे लंबे समय तक सेवा करने वाले प्रधानमंत्री हैं', जबकि अयोध्या राम मंदिर से ₹5 करोड़ के कथित गबन की खबर पर पूरी तरह चुप्पी साधी गई।
पार्टी ने यह भी आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री मोदी अमेरिकी हमले में मारे गए तीन भारतीय नाविकों की मौत पर संवेदना जताने के बजाय फ्रांस दौरे पर चले गए, जबकि उन नाविकों के शव ओमान के एक बंदरगाह पर पड़े रहे। संपादकीय में इसे 'भारतीय नागरिकों के शवों का अपमान' करार दिया गया।
दल-बदल और 'ऑपरेशन टाइगर' का दावा
उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना ने आरोप लगाया कि भाजपा ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) को खत्म करने पर आमादा है और टीएमसी के विधायक-सांसद रोज़ पार्टी छोड़ रहे हैं। संपादकीय में दावा किया गया कि भाजपा और उसके सहयोगी खुलेआम कह रहे हैं — 'हमने तृणमूल को तोड़ा, अब शिवसेना को भी फिर से तोड़ देंगे' — और इस अभियान को 'ऑपरेशन टाइगर' नाम दिया जा रहा है।
संस्थाओं पर गंभीर सवाल
संपादकीय में यह भी कहा गया कि लोकसभा और राज्य विधानसभाओं के स्पीकर दसवीं अनुसूची (दल-बदल विरोधी कानून) को व्यावहारिक रूप से निष्प्रभावी कर रहे हैं। पार्टी ने आरोप लगाया कि दल-बदल करने वाले नेता स्पीकर के पास जाकर मान्यता माँगते हैं और स्पीकर इन गैर-कानूनी कामों में खुलेआम शामिल दिखते हैं। यहाँ तक कि चुनाव आयोग (ECI) और सर्वोच्च न्यायालय पर भी 'गद्दारों के रक्षक' की तरह काम करने का आरोप लगाया गया।
लोकतंत्र और संविधान पर खतरे का दावा
ठाकरे गुट ने दावा किया कि भाजपा का असली मकसद देश में एकदलीय शासन थोपना, संविधान बदलना और तानाशाही वाली राष्ट्रपति प्रणाली लागू करना है। पार्टी ने कहा कि राज्यों की क्षेत्रीय पार्टियों को खत्म करने की यह प्रक्रिया शुरू हो चुकी है।
संपादकीय में यह भी कहा गया कि सरकार महँगाई, परीक्षा पेपर लीक, बेरोज़गारी, रुपये की गिरती कीमत और महिलाओं के खिलाफ अत्याचार जैसे गंभीर संकटों पर सोची-समझी चुप्पी साधे हुए है। आगे क्या होगा, यह इस बात पर निर्भर करेगा कि विपक्षी दल और नागरिक समाज इन दावों पर कितनी तेज़ी से प्रतिक्रिया देते हैं।