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शिवसेना (यूबीटी) का 'सामना' में आरोप: दल-बदल और ईवीएम विवाद के बीच लोकतंत्र संकट में

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शिवसेना (यूबीटी) का 'सामना' में आरोप: दल-बदल और ईवीएम विवाद के बीच लोकतंत्र संकट में

सारांश

शिवसेना (यूबीटी) ने 'सामना' संपादकीय में भाजपा पर दल-बदल अभियान, संस्थाओं को कमज़ोर करने और एकदलीय शासन थोपने का आरोप लगाया। पार्टी का कहना है कि 'ऑपरेशन टाइगर' के ज़रिए विपक्ष को खत्म किया जा रहा है और भारत तेज़ी से तानाशाही की ओर बढ़ रहा है।

मुख्य बातें

शिवसेना (यूबीटी) ने 16 जून को 'सामना' संपादकीय में भारतीय लोकतंत्र में 'चिंताजनक गिरावट' का दावा किया।
पार्टी ने आरोप लगाया कि कथित तौर पर चार हज़ार ईवीएम जलाए जाने पर मीडिया में कोई बहस नहीं हुई।
भाजपा पर तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) को तोड़ने के लिए 'ऑपरेशन टाइगर' चलाने का आरोप।
अयोध्या राम मंदिर से ₹5 करोड़ के कथित गबन और तीन भारतीय नाविकों की मौत पर सरकार की चुप्पी पर सवाल।
पार्टी ने चुनाव आयोग और सर्वोच्च न्यायालय पर भी दल-बदल के मामलों में निष्पक्षता न बरतने का आरोप लगाया।
संपादकीय में दावा किया गया कि भाजपा का लक्ष्य संविधान बदलकर राष्ट्रपति प्रणाली लागू करना है।

शिवसेना (यूबीटी) ने मंगलवार, 16 जून को अपने पार्टी मुखपत्र 'सामना' के संपादकीय में दावा किया कि भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था में गंभीर 'गिरावट' आ रही है — और इसके संकेत सुनियोजित दल-बदल, कथित ईवीएम विनाश, संस्थाओं की चुप्पी तथा जनता का ध्यान भटकाने की रणनीति में साफ़ दिखते हैं। पार्टी के अनुसार, ये घटनाएँ मिलकर तानाशाही की दिशा में बढ़ने के संकेत देती हैं।

मीडिया एजेंडा और ध्यान भटकाने का आरोप

संपादकीय में आरोप लगाया गया कि देश के टीवी चैनलों और अखबारों पर दल-बदल करने वाले विधायकों-सांसदों की खबरें छाई हुई हैं, जबकि कथित तौर पर चार हज़ार ईवीएम जलाए जाने की घटना पर कोई राष्ट्रीय बहस नहीं हुई। पार्टी ने कहा कि एक सांसद का शिवसेना की बैठक में शामिल न होना राष्ट्रीय सुर्खी बना दिया गया, जबकि बुनियादी सवाल दबा दिए गए।

संपादकीय में कहा गया, 'तानाशाह सरकारें दुनिया भर में ठीक ऐसा ही करती हैं — बुनियादी मुद्दों से जनता का ध्यान हटाने के लिए रोज़ नए विवाद खड़े किए जाते हैं।'

भाजपा पर 'अफवाहों के चोर बाज़ार' का आरोप

शिवसेना (यूबीटी) ने सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर 'अफवाहों का चोर बाज़ार' चलाने का आरोप लगाया। पार्टी ने कहा कि इसी बाज़ार से यह अफवाह फैलाई गई कि 'प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सबसे लंबे समय तक सेवा करने वाले प्रधानमंत्री हैं', जबकि अयोध्या राम मंदिर से ₹5 करोड़ के कथित गबन की खबर पर पूरी तरह चुप्पी साधी गई।

पार्टी ने यह भी आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री मोदी अमेरिकी हमले में मारे गए तीन भारतीय नाविकों की मौत पर संवेदना जताने के बजाय फ्रांस दौरे पर चले गए, जबकि उन नाविकों के शव ओमान के एक बंदरगाह पर पड़े रहे। संपादकीय में इसे 'भारतीय नागरिकों के शवों का अपमान' करार दिया गया।

दल-बदल और 'ऑपरेशन टाइगर' का दावा

उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना ने आरोप लगाया कि भाजपा ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) को खत्म करने पर आमादा है और टीएमसी के विधायक-सांसद रोज़ पार्टी छोड़ रहे हैं। संपादकीय में दावा किया गया कि भाजपा और उसके सहयोगी खुलेआम कह रहे हैं — 'हमने तृणमूल को तोड़ा, अब शिवसेना को भी फिर से तोड़ देंगे' — और इस अभियान को 'ऑपरेशन टाइगर' नाम दिया जा रहा है।

संस्थाओं पर गंभीर सवाल

संपादकीय में यह भी कहा गया कि लोकसभा और राज्य विधानसभाओं के स्पीकर दसवीं अनुसूची (दल-बदल विरोधी कानून) को व्यावहारिक रूप से निष्प्रभावी कर रहे हैं। पार्टी ने आरोप लगाया कि दल-बदल करने वाले नेता स्पीकर के पास जाकर मान्यता माँगते हैं और स्पीकर इन गैर-कानूनी कामों में खुलेआम शामिल दिखते हैं। यहाँ तक कि चुनाव आयोग (ECI) और सर्वोच्च न्यायालय पर भी 'गद्दारों के रक्षक' की तरह काम करने का आरोप लगाया गया।

लोकतंत्र और संविधान पर खतरे का दावा

ठाकरे गुट ने दावा किया कि भाजपा का असली मकसद देश में एकदलीय शासन थोपना, संविधान बदलना और तानाशाही वाली राष्ट्रपति प्रणाली लागू करना है। पार्टी ने कहा कि राज्यों की क्षेत्रीय पार्टियों को खत्म करने की यह प्रक्रिया शुरू हो चुकी है।

संपादकीय में यह भी कहा गया कि सरकार महँगाई, परीक्षा पेपर लीक, बेरोज़गारी, रुपये की गिरती कीमत और महिलाओं के खिलाफ अत्याचार जैसे गंभीर संकटों पर सोची-समझी चुप्पी साधे हुए है। आगे क्या होगा, यह इस बात पर निर्भर करेगा कि विपक्षी दल और नागरिक समाज इन दावों पर कितनी तेज़ी से प्रतिक्रिया देते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि ज़रूरी है — खासकर ईवीएम विनाश और संस्थागत मिलीभगत जैसे गंभीर आरोपों की। दसवीं अनुसूची की अनदेखी का सवाल वाकई संवैधानिक है, लेकिन इसे केवल एक पार्टी के नज़रिए से नहीं, बल्कि न्यायिक और संसदीय रिकॉर्ड की कसौटी पर परखा जाना चाहिए। मुख्यधारा की कवरेज अक्सर इन संपादकीयों को 'राजनीतिक बयानबाज़ी' मानकर छोड़ देती है, जबकि इनमें उठाए गए संस्थागत सवाल गहरी पड़ताल की माँग करते हैं।
RashtraPress
2 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

शिवसेना (यूबीटी) ने 'सामना' में लोकतंत्र को लेकर क्या दावा किया?
शिवसेना (यूबीटी) ने 16 जून के 'सामना' संपादकीय में दावा किया कि सुनियोजित दल-बदल, कथित ईवीएम विनाश और संस्थाओं की चुप्पी से भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था में गंभीर गिरावट आ रही है। पार्टी के अनुसार, ये घटनाएँ तानाशाही की दिशा में बढ़ने के संकेत हैं।
'ऑपरेशन टाइगर' क्या है जिसका ज़िक्र संपादकीय में किया गया?
शिवसेना (यूबीटी) के अनुसार, 'ऑपरेशन टाइगर' भाजपा और उसके सहयोगियों का कथित अभियान है जिसके तहत विपक्षी दलों — खासकर तृणमूल कांग्रेस और शिवसेना — के विधायकों-सांसदों को तोड़ा जा रहा है। पार्टी का दावा है कि भाजपा खुलेआम इस अभियान की बात कर रही है।
ईवीएम विनाश को लेकर शिवसेना (यूबीटी) ने क्या आरोप लगाए?
संपादकीय में दावा किया गया कि कथित तौर पर चार हज़ार इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनें (ईवीएम) जलाई गईं, लेकिन इस पर मीडिया में कोई राष्ट्रीय बहस नहीं हुई। यह आरोप पार्टी की ओर से लगाया गया है और इसकी स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है।
शिवसेना (यूबीटी) ने चुनाव आयोग और सुप्रीम कोर्ट पर क्या आरोप लगाए?
पार्टी ने दावा किया कि चुनाव आयोग (ECI) और सर्वोच्च न्यायालय दल-बदल के मामलों में 'गद्दारों के रक्षक' की तरह काम कर रहे हैं। संपादकीय में कहा गया कि लोकसभा और विधानसभाओं के स्पीकर दसवीं अनुसूची (दल-बदल विरोधी कानून) को व्यावहारिक रूप से निष्प्रभावी कर रहे हैं।
शिवसेना (यूबीटी) ने किन बुनियादी मुद्दों पर सरकार की चुप्पी का आरोप लगाया?
संपादकीय में दावा किया गया कि सरकार महँगाई, परीक्षा पेपर लीक, बेरोज़गारी, रुपये की गिरती कीमत और महिलाओं के खिलाफ अत्याचार जैसे संकटों पर सोची-समझी चुप्पी साधे हुए है। पार्टी ने अयोध्या राम मंदिर से ₹5 करोड़ के कथित गबन और तीन भारतीय नाविकों की मौत पर भी सरकार के रवैये पर सवाल उठाए।
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