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दलबदल पर शिवसेना (यूबीटी) का वार: 'राजनीति निजी स्वार्थ का धंधा बन गई, सायोनी घोष बड़ा उदाहरण'

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दलबदल पर शिवसेना (यूबीटी) का वार: 'राजनीति निजी स्वार्थ का धंधा बन गई, सायोनी घोष बड़ा उदाहरण'

सारांश

बंगाल में TMC की हार के बाद पाला बदलने की लहर पर शिवसेना (यूबीटी) ने 'सामना' के ज़रिए करारा हमला बोला। सायोनी घोष का उदाहरण देते हुए कहा — जो नेता कल दलबदल की निंदा करते थे, वे आज खुद उसी राह पर हैं। पार्टी ने इसे भारतीय लोकतंत्र और विचारधारा के गंभीर पतन का संकेत बताया।

मुख्य बातें

शिवसेना (यूबीटी) ने 12 जून को मुखपत्र 'सामना' के ज़रिए दलबदल की बढ़ती प्रवृत्ति पर तीखा हमला बोला।
बंगाल में TMC की हार के बाद कई सांसदों-विधायकों के पार्टी छोड़ने की पृष्ठभूमि में यह संपादकीय आया।
सायोनी घोष को 'अवसरवादी राजनीति' के प्रतीक के रूप में उद्धृत किया गया — जिन्होंने पहले राघव चड्ढा के दलबदल की निंदा की थी, अब खुद BJP में शामिल हो गई हैं।
पार्टी ने दलबदलू नेताओं की तुलना 'थाली के बैंगन' से की — जिनका अपना कोई स्वाद या पहचान नहीं।
उद्धव ठाकरे गुट ने इसे देश की राजनीति और विचारधारा के 'गंभीर पतन' का संकेत बताया।

शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) ने शुक्रवार, 12 जून को आरोप लगाया कि भारत की राजनीति अब विचारधारा से नहीं, बल्कि निजी स्वार्थ से संचालित हो रही है — और बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (TMC) की करारी हार के बाद सांसदों-विधायकों के पाला बदलने की लहर ने इस प्रवृत्ति को एक बार फिर उजागर कर दिया है।

मुखपत्र 'सामना' में तीखा संपादकीय

शिवसेना (यूबीटी) के मुखपत्र 'सामना' में प्रकाशित संपादकीय में कहा गया कि मतदाता किसी पार्टी के चुनाव चिह्न और विचारधारा के आधार पर वोट देते हैं, लेकिन 'अवसरवादी नेता अपने निजी फायदे के लिए तुरंत एक पार्टी से दूसरी पार्टी में कूद जाते हैं।' संपादकीय में व्यंग्यात्मक लहजे में कहा गया — 'नर्सरी राइम हॉप अलोंग, लिटिल कद्दू की तरह, ये अवसरवादी नेता और उनके लीडर कूदते-फांदते दिल्ली पहुंच जाते हैं।'

संपादकीय में अंगूर और आम की नई किस्मों से तुलना करते हुए कहा गया कि इन अस्थिर नेताओं की भी नई नस्लें उभरी हैं — और इनमें सबसे चर्चित 'सायोनी घोष किस्म' है।

सायोनी घोष: केस स्टडी के रूप में

TMC की पूर्व सांसद सायोनी घोष का नाम संपादकीय में विशेष रूप से उठाया गया। 'सामना' के अनुसार, चुनाव प्रचार के दौरान घोष ने तीखे भाषणों से 'मिनी-ममता' की छवि बनाई, हर रैली में भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर निशाना साधा और ममता बनर्जी को 'मातृ-तुल्य' नेता बताया।

मुखपत्र ने याद दिलाया कि जब आम आदमी पार्टी (AAP) के राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने BJP का दामन थामा था, तब घोष ने उनकी आलोचना करते हुए कहा था — 'मैं घोष हूं, चड्ढा नहीं, जो शॉर्ट्स पहनकर पाला बदल ले।' लेकिन 'सामना' के अनुसार, बंगाल में TMC की स्थिति बदलते ही घोष ने खुद पार्टी छोड़ BJP की राह पकड़ ली।

महाराष्ट्र की राजनीति पर निशाना

संपादकीय में आरोप लगाया गया कि महाराष्ट्र की राजनीति में हाल के वर्षों में दलबदलू नेताओं की बाढ़ आ गई है और उन्हें 'खूब बढ़ावा दिया जा रहा है।' 'सामना' ने लिखा — 'दल-बदलू नेता बैंगन की तरह होता है, जिसे चूल्हे पर पक रही किसी भी डिश में मिलाया जा सकता है, चाहे वह भरता हो या भजिया; उसका अपना कोई खास स्वाद नहीं होता।'

उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली पार्टी ने कहा कि बेतहाशा महत्वाकांक्षा और धोखेबाजी नेताओं को 'थाली में रखे बैंगन' यानी 'दलबदलू' बना देती है।

विचारधारा के पतन पर चिंता

'सामना' ने चेतावनी दी कि यह चलन 'देश की राजनीति और विचारधारा के गंभीर पतन को दर्शाता है।' संपादकीय में कहा गया — 'ये नेता सस्ती और हर जगह आसानी से मिलने वाली चीजें बन गए हैं। इनमें न तो कोई मजबूती है और न ही कोई खास पहचान; राजनीतिक दबाव पड़ते ही ये नरम पड़ जाते हैं और मुरझा जाते हैं।'

यह संपादकीय ऐसे समय में आया है जब बंगाल में TMC की हार के बाद पार्टी छोड़ने वाले सांसदों ने फिलहाल एक स्वतंत्र समूह बनाया है, लेकिन रिपोर्टों के अनुसार वे जल्द ही BJP में शामिल हो सकते हैं। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि दलबदल-विरोधी कानून के तहत इन मामलों में क्या कार्रवाई होती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

'थाली के बैंगन' जैसे मुहावरे चुनावी बयानबाज़ी तक ही सीमित रहेंगे।
RashtraPress
27 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

शिवसेना (यूबीटी) ने दलबदल पर क्या कहा?
शिवसेना (यूबीटी) ने अपने मुखपत्र 'सामना' के संपादकीय में कहा कि भारत की राजनीति अब निजी स्वार्थ का धंधा बन गई है। पार्टी ने दलबदलू नेताओं की तुलना 'थाली के बैंगन' से करते हुए कहा कि इनकी अपनी कोई विचारधारा या पहचान नहीं होती।
सायोनी घोष का मामला क्यों उठाया गया?
TMC की पूर्व सांसद सायोनी घोष ने पहले राघव चड्ढा के BJP में शामिल होने की कड़ी आलोचना की थी और कहा था कि वे कभी ऐसा नहीं करेंगी। बंगाल में TMC की हार के बाद घोष ने खुद पार्टी छोड़ BJP का दामन थाम लिया, जिसे 'सामना' ने राजनीतिक अवसरवाद का सटीक उदाहरण बताया।
बंगाल में TMC की हार के बाद क्या हो रहा है?
बंगाल में TMC की करारी हार के बाद कई सांसदों और विधायकों ने पार्टी छोड़ दी है। रिपोर्टों के अनुसार, पार्टी छोड़ने वाले TMC सांसदों ने फिलहाल एक स्वतंत्र समूह बनाया है और जल्द ही BJP में शामिल होने की संभावना जताई जा रही है।
राघव चड्ढा का इस विवाद से क्या संबंध है?
AAP के राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा के BJP में शामिल होने पर सायोनी घोष ने तीखी आलोचना की थी। 'सामना' ने इसी बयान को याद दिलाते हुए कहा कि घोष ने जो कहा था, वह खुद उससे उलट कर रही हैं — जो उनके दलबदल को और भी चर्चित बनाता है।
क्या दलबदल रोकने के लिए कोई कानून है?
भारत में दलबदल-विरोधी कानून (दसवीं अनुसूची) मौजूद है, जो सांसदों और विधायकों को पार्टी छोड़ने पर अयोग्य ठहरा सकता है। हालांकि, इसके क्रियान्वयन में कमज़ोरियों के कारण कई मामलों में यह कानून प्रभावी नहीं हो पाता और दलबदल की प्रवृत्ति जारी रहती है।
राष्ट्र प्रेस
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