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ममता बनर्जी पर हमला लोकतंत्र पर प्रहार: शिवसेना (यूबीटी) का 'सामना' में तीखा हमला

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ममता बनर्जी पर हमला लोकतंत्र पर प्रहार: शिवसेना (यूबीटी) का 'सामना' में तीखा हमला

सारांश

शिवसेना (यूबीटी) ने 'सामना' में ममता बनर्जी पर हुए हमले को लोकतंत्र पर सीधा प्रहार बताया। पार्टी ने केंद्र सरकार पर दोहरे मापदंड का आरोप लगाया — चुनाव में बल तैनात, अब हिंसा पर चुप्पी। पश्चिम बंगाल में TMC नेताओं को लगातार निशाना बनाए जाने पर गहरी चिंता जताई।

मुख्य बातें

शिवसेना (यूबीटी) ने 11 अगस्त को अपने मुखपत्र 'सामना' में ममता बनर्जी पर हुए हमले को लोकतंत्र पर प्रहार बताया।
संपादकीय के अनुसार, पत्थरों, लाठियों और लोहे की छड़ों से लैस भीड़ ने ममता बनर्जी के वाहन को घेरा।
पार्टी ने अभिषेक बनर्जी और कल्याण बनर्जी सहित TMC नेताओं को लगातार निशाना बनाए जाने का उल्लेख किया।
केंद्र सरकार पर आरोप — चुनाव में अर्धसैनिक बल तैनात, अब राजनीतिक हिंसा पर तत्परता गायब।
उद्धव ठाकरे खेमे ने चेतावनी दी कि दंडमुक्त हिंसा अंततः राष्ट्रीय संस्थाओं को कमजोर करेगी।

शिवसेना उद्धव बालासाहेब ठाकरे (यूबीटी) ने मंगलवार, 11 अगस्त को अपने मुखपत्र 'सामना' के संपादकीय में स्पष्ट शब्दों में कहा कि पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी पर हुआ हमला किसी एक नेता पर नहीं, बल्कि भारतीय गणतंत्र के लोकतांत्रिक ढाँचे पर सीधा प्रहार है। पार्टी ने इस घटना को राज्य में बढ़ती राजनीतिक हिंसा की खतरनाक प्रवृत्ति का हिस्सा बताया।

हमले का विवरण और पार्टी का आकलन

'सामना' के संपादकीय में कहा गया कि पत्थरों, लाठियों और लोहे की छड़ों से लैस एक भीड़ ने ममता बनर्जी के वाहन को घेर लिया, जिसका उद्देश्य कथित तौर पर एक सशक्त विपक्षी आवाज को खत्म करना प्रतीत होता था। संपादकीय के अनुसार, 'उनका बच जाना महज संयोग की बात है, लेकिन इस घटना से एक भयावह सच्चाई सामने आती है — पश्चिम बंगाल में राजनीतिक हिंसा की स्थिति सभी स्वीकार्य सीमाओं को पार कर चुकी है।'

पार्टी ने यह भी कहा कि राज्य में हाल के राजनीतिक समीकरणों में बदलाव के बाद से तृणमूल कांग्रेस (TMC) के नेताओं को लगातार निशाना बनाया जा रहा है, जिनमें सांसद अभिषेक बनर्जी और कल्याण बनर्जी जैसे वरिष्ठ नेता भी शामिल हैं।

केंद्र सरकार पर दोहरे मापदंड का आरोप

उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना ने केंद्र सरकार पर तीखा सवाल उठाया। संपादकीय में कहा गया कि जहाँ केंद्रीय नेतृत्व दलबदलुओं का गर्मजोशी से स्वागत करता है, वहीं राज्य में राजनीतिक आधार तैयार करने वाले नेता जानलेवा हमलों के शिकार हो रहे हैं।

पार्टी ने यह भी याद दिलाया कि विधानसभा चुनावों के दौरान केंद्र सरकार ने निष्पक्षता और व्यवस्था के नाम पर बड़ी संख्या में केंद्रीय अर्धसैनिक बल तैनात किए थे। 'सामना' ने सवाल उठाया कि आज जब लक्षित राजनीतिक हिंसा बढ़ रही है, तो वह तत्परता गायब क्यों हो गई है।

विपक्षी प्रतिक्रिया पर आपत्ति

संपादकीय में राज्य में विपक्षी नेतृत्व की प्रतिक्रिया को भी 'गैर-जिम्मेदाराना और खतरनाक' बताया गया। पार्टी का कहना था कि एक वरिष्ठ राजनीतिक हस्ती पर हुए हिंसक हमले को महज 'जनता और एक राजनीतिक दल के बीच की लड़ाई' कहना भीड़ हिंसा को तर्कसंगत ठहराना है।

शिवसेना (यूबीटी) ने तर्क दिया कि इस तर्क को स्वीकार करने पर जंतर-मंतर जैसे किसी भी सार्वजनिक प्रदर्शन को भी 'नागरिकों और प्रधानमंत्री के बीच व्यक्तिगत संघर्ष' बताकर राज्य अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ सकता है।

लोकतंत्र और संविधान की दुहाई

उद्धव ठाकरे के खेमे ने स्पष्ट किया कि एक कार्यशील लोकतंत्र में चुनावी जीत-हार मतपेटी में तय होती है, सड़क पर नहीं। पार्टी ने कहा कि जिस माहौल में असहमति को बल से दबाया जाए, छात्र आंदोलनों को कुचला जाए और विपक्षी नेताओं को लगातार शारीरिक धमकियाँ मिलें, वह लोकतंत्र के लिए घातक है।

आगे क्या

शिवसेना (यूबीटी) ने चेतावनी दी कि यदि हिंसक तत्वों को बिना दंड के सक्रिय रहने दिया गया तो यह अराजकता की ओर ले जाने वाला संकेत होगा, जो अंततः उन संस्थाओं को ही कमजोर करेगा जो राष्ट्र को एकजुट रखती हैं। पार्टी ने केंद्र से राज्य में तत्काल हस्तक्षेप और निष्पक्ष जाँच की माँग की है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जिसे नज़रअंदाज़ नहीं किया जाना चाहिए। केंद्र पर दोहरे मापदंड का आरोप तथ्यात्मक रूप से जाँचने योग्य है: क्या चुनाव बाद की हिंसा में केंद्रीय हस्तक्षेप की माँग उतनी ही जोरदार रही जितनी चुनाव से पहले थी? पश्चिम बंगाल में राजनीतिक हिंसा की जड़ें गहरी हैं और यह किसी एक दल या सरकार की देन नहीं — यह संदर्भ 'सामना' के संपादकीय में अनुपस्थित है। असली सवाल यह है कि क्या यह आक्रोश सत्ता-निरपेक्ष है, या केवल तब मुखर होता है जब निशाने पर सहयोगी हों।
RashtraPress
25 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ममता बनर्जी पर हमला कब और कैसे हुआ?
शिवसेना (यूबीटी) के मुखपत्र 'सामना' के अनुसार, पश्चिम बंगाल में पत्थरों, लाठियों और लोहे की छड़ों से लैस एक भीड़ ने ममता बनर्जी के वाहन को घेर लिया। पार्टी ने इसे एक सुनियोजित हमला बताया जिसका उद्देश्य कथित तौर पर एक प्रमुख विपक्षी नेता को चुप कराना था।
शिवसेना (यूबीटी) ने इस हमले को लोकतंत्र पर प्रहार क्यों कहा?
शिवसेना (यूबीटी) का तर्क है कि जब पूर्व मुख्यमंत्री और निर्वाचित प्रतिनिधि बार-बार सड़क हिंसा के शिकार होते हैं, तो यह संस्थागत शासन के पतन का संकेत है। पार्टी का मानना है कि लोकतंत्र में विपक्ष को शारीरिक रूप से समाप्त करने की कोशिश संवैधानिक मूल्यों पर सीधा हमला है।
केंद्र सरकार पर शिवसेना (यूबीटी) ने क्या आरोप लगाए?
पार्टी ने आरोप लगाया कि विधानसभा चुनावों के दौरान केंद्र ने बड़ी संख्या में अर्धसैनिक बल तैनात किए थे, लेकिन अब जब राजनीतिक हिंसा बढ़ रही है तो वही तत्परता गायब है। 'सामना' ने इसे स्पष्ट दोहरा मापदंड बताया।
पश्चिम बंगाल में TMC के कौन-से नेता हमलों के शिकार हुए हैं?
'सामना' के संपादकीय के अनुसार, राज्य में हाल के राजनीतिक बदलावों के बाद से TMC के कई नेताओं को निशाना बनाया गया है, जिनमें सांसद अभिषेक बनर्जी और कल्याण बनर्जी शामिल हैं।
शिवसेना (यूबीटी) ने विपक्ष की प्रतिक्रिया पर क्या कहा?
पार्टी ने राज्य में विपक्षी नेतृत्व द्वारा इस हमले को 'जनता और एक राजनीतिक दल के बीच की लड़ाई' बताए जाने को गैर-जिम्मेदाराना और खतरनाक करार दिया। शिवसेना (यूबीटी) का कहना था कि ऐसी बयानबाजी भीड़ हिंसा को वैधता देती है और राज्य को अपनी जिम्मेदारी से मुक्त करती है।
राष्ट्र प्रेस
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