17 जुलाई 2026
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पश्चिम बंगाल में TMC नेताओं पर हमले: BJP बोली 'जनता का गुस्सा', कांग्रेस ने साधा निशाना

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पश्चिम बंगाल में TMC नेताओं पर हमले: BJP बोली 'जनता का गुस्सा', कांग्रेस ने साधा निशाना

सारांश

पश्चिम बंगाल में TMC नेताओं पर हमले ने राष्ट्रीय राजनीति को गर्मा दिया है। BJP इसे जनता का गुस्सा बता रही है, कांग्रेस इसे 'अंतरराष्ट्रीय शर्म' कह रही है। इस बीच JDU के अनुसार 80 में से केवल 20 विधायकों की उपस्थिति TMC में गहरी दरार का संकेत है।

मुख्य बातें

अभिषेक बनर्जी और कल्याण बनर्जी पर हमले के बाद 1 जून 2026 को राष्ट्रीय स्तर पर सियासी बयानबाज़ी तेज हुई।
BJP ने हमलों को जनता का स्वतःस्फूर्त आक्रोश बताया; कांग्रेस ने BJP पर 'आतंक का माहौल' बनाने का आरोप लगाया।
JDU नेता हरि नारायण सिंह के अनुसार TMC की बैठक में 80 में से केवल 20 विधायक पहुँचे — पार्टी में टूट के संकेत।
कर कांड और संदेशखाली का हवाला देते हुए विपक्ष की चुप्पी पर सवाल उठाए।
JDU प्रवक्ता राजीव रंजन ने कहा कि TMC में इस्तीफों और अनुपस्थिति का सिलसिला पार्टी के बड़े बिखराव की ओर इशारा करता है।

पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के वरिष्ठ नेताओं — अभिषेक बनर्जी और कल्याण बनर्जी — पर हुए हमलों के बाद राष्ट्रीय राजनीति में तीखी बहस छिड़ गई है। 1 जून 2026 को नई दिल्ली में विभिन्न दलों के नेताओं ने परस्पर विरोधी बयान दिए — TMC जहाँ इसे लोकतंत्र पर सुनियोजित हमला बता रही है, वहीं भारतीय जनता पार्टी (BJP) और उसके सहयोगी इसे जनता के स्वतःस्फूर्त आक्रोश का नतीजा करार दे रहे हैं।

कांग्रेस की प्रतिक्रिया

कांग्रेस प्रवक्ता सुरेंद्र राजपूत ने हमले की कड़ी निंदा करते हुए कहा, 'हिंसा बंगाल में हो रही है, जो एक ऐसा क्षेत्र है जहाँ देश के सबसे सुरक्षित पदों में गिने जाने वाले सांसद भी सुरक्षित नहीं हैं। वहाँ BJP से जुड़े गुंडे आतंकवादी गतिविधियों को अंजाम दे रहे हैं। सांसद का यह कहना बिल्कुल सही था कि आज यह मुद्दा शर्म का विषय बन गया है।' राजपूत ने आगे कहा कि यह केवल राष्ट्रीय नहीं, बल्कि 'अंतरराष्ट्रीय शर्म' का विषय है कि जिस राज्य में सांसद असुरक्षित हों, वहाँ आम जनता की सुरक्षा की कल्पना भी नहीं की जा सकती। उन्होंने कहा कि ऐसी सरकार को सत्ता में बने रहने का कोई अधिकार नहीं है।

JDU का रुख: 'जनता की नाराज़गी का परिणाम'

जनता दल (यूनाइटेड) के वरिष्ठ नेता हरि नारायण सिंह ने TMC सरकार के कार्यकाल पर सवाल उठाते हुए कहा कि ममता बनर्जी ने 15 वर्षों तक शासन किया, लेकिन उनके राज में न खुलकर सच बोला जा सकता था और न ही निष्पक्ष चुनाव हो सकते थे। उन्होंने कहा कि वार्ड और पंचायत चुनावों में भी हंगामा होता था — 'वहाँ जनता नहीं, बल्कि शासन-प्रशासन चुनाव लड़ता था।' हरि नारायण सिंह ने यह भी बताया कि हालिया बैठक में 80 में से केवल 20 विधायक ही उपस्थित हुए, जो पार्टी में गहरी दरार का संकेत है।

उनके अनुसार अभिषेक बनर्जी पर हुआ हमला 'कोई पूर्वनियोजित घटना नहीं, बल्कि TMC सरकार के दौरान जनता के साथ किए गए व्यवहार का स्वाभाविक परिणाम था।' उन्होंने यह भी कहा कि इस बार पश्चिम बंगाल में निष्पक्ष चुनाव हुआ, जिसके चलते ममता बनर्जी सत्ता से बाहर हो गईं।

BJP का पलटवार

BJP नेता टी.आर. श्रीनिवास ने कपिल सिब्बल और ममता बनर्जी पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा, 'जब हज़ारों BJP कार्यकर्ताओं की हत्या हुई तब आप कहाँ थे? आर.जी. कर कांड हुआ तो आप कहाँ थे? संदेशखाली की घटनाएँ हुईं तो आप कहाँ थे? जब ममता बनर्जी हिंसा को बढ़ावा दे रही थीं तब आप कहाँ थे? अब जब लोगों का आक्रोश सामने आ रहा है तो आप BJP पर आरोप लगा रहे हैं।'

JDU प्रवक्ता ने TMC में टूट के दिए संकेत

JDU के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजीव रंजन ने कपिल सिब्बल के बयान पर कहा कि उन्हें कांग्रेस नेताओं के अपने पुराने बयान भी याद करने चाहिए — 'TMC के कथित आतंक के माहौल को लेकर कांग्रेस के कई बड़े नेताओं ने चुनाव के दौरान तीखे बयान दिए थे।' राजीव रंजन ने कहा कि जिस तरह TMC में इस्तीफे हो रहे हैं और बैठकों में विधायक नहीं पहुँच रहे, उससे साफ है कि पार्टी बड़े टूट की ओर बढ़ रही है। उन्होंने सुझाव दिया कि यदि TMC नेता आत्ममंथन करें और अपनी गलतियों से सीखें, तो शायद पार्टी की मुश्किलें कुछ कम हो सकती हैं।

आगे क्या होगा

यह ऐसे समय में आया है जब पश्चिम बंगाल में सत्ता-परिवर्तन के बाद राजनीतिक हिंसा की घटनाएँ लगातार सुर्खियाँ बन रही हैं। TMC की आंतरिक एकता पर सवाल उठ रहे हैं और विपक्षी दलों का आरोप है कि पार्टी अब बिखराव की कगार पर है। राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति और नई सरकार की जवाबदेही अब राष्ट्रीय बहस का केंद्र बन चुकी है।

संपादकीय दृष्टिकोण

और दूसरा जो विपक्षी हमलों को 'लोकतंत्र पर खतरा' बताता है। गौरतलब है कि TMC पर हिंसा के आरोप नए नहीं हैं — आर.जी. कर और संदेशखाली जैसी घटनाएँ पहले से रिकॉर्ड पर हैं। लेकिन अब जब सत्ता पलटी है, तो 'आक्रोश' और 'आतंक' की परिभाषाएँ भी पलट गई हैं — यही इस पूरे विवाद की सबसे बड़ी विडंबना है। 80 में से केवल 20 विधायकों की उपस्थिति यह भी बताती है कि TMC का संकट केवल बाहरी हमलों तक सीमित नहीं, बल्कि भीतर से भी गहरा है।
RashtraPress
17 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अभिषेक बनर्जी और कल्याण बनर्जी पर हमला कब और कहाँ हुआ?
TMC सांसद अभिषेक बनर्जी और कल्याण बनर्जी पर हमले पश्चिम बंगाल में हुए, जिनकी जानकारी 1 जून 2026 को सामने आई। इन हमलों के बाद राष्ट्रीय स्तर पर विभिन्न दलों ने तीखी प्रतिक्रियाएँ दीं।
BJP ने TMC नेताओं पर हमले को क्या बताया?
BJP और उसके सहयोगी दलों ने इन हमलों को BJP की उकसावट नहीं, बल्कि TMC सरकार के दौरान जनता के साथ हुए व्यवहार के प्रति स्वाभाविक आक्रोश का परिणाम बताया। BJP नेता टी.आर. श्रीनिवास ने आर.जी. कर कांड और संदेशखाली का हवाला देते हुए विपक्ष की पूर्व चुप्पी पर सवाल उठाए।
कांग्रेस ने इस मामले पर क्या रुख अपनाया?
कांग्रेस प्रवक्ता सुरेंद्र राजपूत ने इसे 'अंतरराष्ट्रीय शर्म' करार दिया और BJP पर बंगाल में 'आतंक का माहौल' बनाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि जहाँ सांसद भी सुरक्षित नहीं, वहाँ आम जनता की सुरक्षा की उम्मीद नहीं की जा सकती।
क्या TMC में टूट की आशंका है?
JDU नेताओं के अनुसार TMC की एक अहम बैठक में 80 में से केवल 20 विधायक ही पहुँचे, जो पार्टी में गहरी दरार का संकेत है। JDU प्रवक्ता राजीव रंजन ने कहा कि इस्तीफों और बैठकों में अनुपस्थिति का सिलसिला बताता है कि पार्टी बड़े बिखराव की ओर बढ़ रही है।
JDU ने ममता बनर्जी के शासनकाल पर क्या कहा?
JDU वरिष्ठ नेता हरि नारायण सिंह ने कहा कि ममता बनर्जी के 15 वर्षों के शासनकाल में न खुलकर सच बोला जा सकता था और न निष्पक्ष चुनाव होते थे। उनके अनुसार पिछला चुनाव भी TMC ने दमन के ज़रिए लड़ा था, और इस बार निष्पक्ष चुनाव में जनता ने उन्हें सत्ता से बाहर कर दिया।
राष्ट्र प्रेस
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