पश्चिम बंगाल में कानून-व्यवस्था ध्वस्त, अभिषेक बनर्जी का BJP पर तीखा हमला
सारांश
मुख्य बातें
तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी ने 30 जून 2026 को पश्चिम बंगाल की भारतीय जनता पार्टी (BJP) सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि राज्य में कानून का राज पूरी तरह BJP की राजनीति की भेंट चढ़ गया है। उन्होंने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट कर यह आरोप लगाए।
मुख्य आरोप: हिंसा और दमन
अभिषेक बनर्जी ने आरोप लगाया कि सरकारी एजेंसियाँ बिना किसी पूर्व सूचना के नागरिकों को उठा रही हैं। उनके अनुसार, BJP कार्यकर्ता तृणमूल कांग्रेस (TMC) के कार्यकर्ताओं पर हमले कर रहे हैं — उन्हें कमर में रस्सी बाँधकर घुमाया जा रहा है, पत्थर फेंके जा रहे हैं और जानलेवा चोटें पहुँचाई जा रही हैं। उन्होंने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय के दिशानिर्देशों और बुनियादी मानवाधिकारों का दिनदहाड़े उल्लंघन हो रहा है।
गौरतलब है कि ये आरोप ऐसे समय में सामने आए हैं जब पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद से राजनीतिक हिंसा की खबरें लगातार आ रही हैं।
विधायकों पर दबाव और राजनीतिक तोड़फोड़ के आरोप
तृणमूल सांसद ने आरोप लगाया कि राजनीतिक दलों को तोड़ा जा रहा है, बैंक खाते फ्रीज किए जा रहे हैं और विधायकों को दल बदलने के लिए धमकाया जा रहा है। उनके अनुसार, जो विधायक दबाव में झुकने से इनकार करते हैं, उन्हें 'झूठे मामलों' में फँसाकर जेल भेज दिया जाता है। उन्होंने सवाल उठाया — 'अगर BJP सच में जनादेश के दम पर बंगाल जीती है, तो वह इतनी भयभीत क्यों है?'
CM और राम मंदिर चढ़ावे पर विवादित दावे
अभिषेक बनर्जी ने यह भी आरोप लगाया कि यह 'एकमात्र ऐसा राज्य है जहाँ मौजूदा मुख्यमंत्री कथित तौर पर रिश्वत लेते हुए कैमरे में कैद हुए।' साथ ही उन्होंने दावा किया कि सत्तारूढ़ पार्टी पर राम मंदिर के लिए मिले चढ़ावे में हेराफेरी का आरोप है। ये दावे अभिषेक बनर्जी के व्यक्तिगत बयान हैं; इनकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
लोकतंत्र पर चेतावनी
अपनी पोस्ट के अंत में अभिषेक बनर्जी ने कहा कि पश्चिम बंगाल को 'पुलिस स्टेट' बना दिया गया है। उन्होंने कहा — 'ईमानदार और अडिग लोगों को जेल भेजा जाता है, जबकि भ्रष्ट लोग समझौता करके BJP में शामिल हो जाते हैं।' उन्होंने आगाह किया कि BJP एक विपक्ष-मुक्त राज्य और देश चाहती है, जहाँ नागरिकों से असहमति और सवाल पूछने का अधिकार छिन जाए।
यह बयान ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब पश्चिम बंगाल की राजनीतिक स्थिति राष्ट्रीय बहस के केंद्र में है और आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर संसद में भी गूँज सुनाई दे सकती है।