14 अगस्त 2026
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उधमपुर में वीडीसी सदस्य की गोली मारकर हत्या, साथी सदस्य ने चलाई गोली; एक अन्य गंभीर

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उधमपुर में वीडीसी सदस्य की गोली मारकर हत्या, साथी सदस्य ने चलाई गोली; एक अन्य गंभीर

सारांश

जम्मू-कश्मीर के उधमपुर में वीडीसी के ही एक सदस्य ने अपने दो साथियों पर गोली चला दी — बलदेव सिंह की मौत हो गई, रमेश सिंह गंभीर। यह घटना उस सशस्त्र नागरिक सुरक्षा ढाँचे के भीतर की हिंसा है जिसे आतंकवाद से लड़ने के लिए बनाया गया था।

मुख्य बातें

उधमपुर के मौंगरी इलाके में 14 अगस्त को वीडीसी सदस्य बलदेव सिंह की गोली मारकर हत्या कर दी गई।
घायल वीडीसी सदस्य रमेश सिंह की हालत गंभीर बनी हुई है।
आरोपी भी वीडीसी का सदस्य है; घटना दमनोट पुलिस चौकी की ओर जाते समय हुई।
पुलिस ने मामले का संज्ञान लिया है और जाँच जारी है; अभी तक गिरफ्तारी की पुष्टि नहीं।
वीडीसी सदस्यों को पुलिस द्वारा .303 या आधुनिक राइफलें दी जाती हैं; प्रमुखों को ₹4,500 और सदस्यों को ₹4,000 प्रतिमाह मानदेय मिलता है।

जम्मू-कश्मीर के उधमपुर जिले के मौंगरी इलाके में शुक्रवार, 14 अगस्त को ग्राम रक्षा समिति (वीडीसी) के एक सदस्य की उसी समूह के एक साथी सदस्य द्वारा गोली मारकर हत्या कर दी गई, जबकि दूसरा सदस्य गंभीर रूप से घायल हो गया। मृतक की पहचान बलदेव सिंह और घायल की पहचान रमेश सिंह के रूप में हुई है।

मुख्य घटनाक्रम

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, यह घटना उस समय हुई जब वीडीसी के ये सदस्य दमनोट पुलिस चौकी की ओर जा रहे थे। यात्रा के दौरान कथित तौर पर आपस में बहस छिड़ गई, जिसके बाद आरोपी सदस्य ने अपने दोनों साथियों पर गोली चला दी। पुलिस ने घटना का संज्ञान लेते हुए जाँच शुरू कर दी है।

एक पुलिस अधिकारी ने बताया, 'घटना में शामिल सभी व्यक्ति ग्राम रक्षा समिति (वीडीसी) के सदस्य हैं।' आगे की जाँच जारी है और अभी तक किसी की गिरफ्तारी की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

वीडीसी/वीडीजी क्या है

ग्राम रक्षा समितियाँ (वीडीसी) — जिन्हें अब आधिकारिक तौर पर ग्राम रक्षा गार्ड (वीडीजी) नाम दिया गया है — जम्मू-कश्मीर के दूरस्थ पहाड़ी क्षेत्रों में नागरिक सुरक्षा के लिए 1990 के दशक के मध्य में गठित किए गए थे। इनका मुख्य उद्देश्य कमज़ोर स्थानीय आबादी की रक्षा करना और आतंकवादी हमलों का मुकाबला करना था।

1995 में राज्य सरकार की योजना के तहत स्थापित इन समितियों में स्थानीय स्वयंसेवक, पूर्व सैनिक और पूर्व पुलिसकर्मी शामिल होते हैं। इनका नेतृत्व कई मामलों में एक विशेष पुलिस अधिकारी (एसपीओ) करता है और ये स्थानीय जिला पुलिस अधीक्षक के प्रत्यक्ष परिचालन पर्यवेक्षण में कार्य करते हैं।

हथियार और मानदेय व्यवस्था

पुलिस द्वारा वीडीसी सदस्यों को आमतौर पर .303 या आधुनिक राइफलें और गोला-बारूद उपलब्ध कराए जाते हैं। मानदेय के रूप में समूह प्रमुखों को ₹4,500 प्रतिमाह और नियमित सदस्यों को ₹4,000 प्रतिमाह दिए जाते हैं।

घुसपैठ और लक्षित खतरों से सुरक्षा को मज़बूत करने के उद्देश्य से गृह मंत्रालय ने इस ढाँचे को संशोधित कर इसे औपचारिक रूप से वीडीजी के रूप में अधिसूचित किया है।

आम जनता पर असर

यह घटना ऐसे समय में सामने आई है जब जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर पहले से ही सतर्कता बरती जा रही है। वीडीसी सदस्यों को सशस्त्र रखने की नीति — जो सुदूर क्षेत्रों में सुरक्षा की रीढ़ मानी जाती है — के भीतर ही इस तरह की आंतरिक हिंसा की घटना गंभीर सवाल खड़े करती है।

क्या होगा आगे

पुलिस ने मामले की जाँच शुरू कर दी है। घायल रमेश सिंह की हालत गंभीर बताई जा रही है और उनका उपचार जारी है। आरोपी सदस्य के खिलाफ कार्रवाई की प्रक्रिया अधिकारियों के अनुसार चल रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन उनके मनोवैज्ञानिक मूल्यांकन और हथियार प्रबंधन पर पर्याप्त निगरानी नहीं रखता। वीडीजी ढाँचे को गृह मंत्रालय ने हाल ही में औपचारिक रूप दिया, फिर भी ₹4,000-4,500 का मासिक मानदेय और सीमित जवाबदेही तंत्र इस 'सुधार' की गहराई पर सवाल उठाते हैं। जम्मू-कश्मीर में जहाँ बाहरी खतरे पहले से हैं, वहाँ आंतरिक हिंसा की ऐसी घटनाएँ सुरक्षा ढाँचे की विश्वसनीयता को कमज़ोर करती हैं।
RashtraPress
14 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

उधमपुर वीडीसी गोलीबारी में क्या हुआ?
14 अगस्त को उधमपुर के मौंगरी इलाके में ग्राम रक्षा समिति के एक सदस्य ने अपने दो साथी सदस्यों पर गोली चला दी, जिसमें बलदेव सिंह की मौत हो गई और रमेश सिंह गंभीर रूप से घायल हो गए। सभी तीनों वीडीसी के सदस्य थे और दमनोट पुलिस चौकी की ओर जा रहे थे।
वीडीसी (ग्राम रक्षा समिति) क्या होती है?
वीडीसी जम्मू-कश्मीर के दूरस्थ क्षेत्रों में नागरिक सुरक्षा के लिए 1995 में गठित सशस्त्र स्वयंसेवी समूह हैं, जिनमें स्थानीय नागरिक, पूर्व सैनिक और पूर्व पुलिसकर्मी शामिल होते हैं। इन्हें अब आधिकारिक रूप से ग्राम रक्षा गार्ड (वीडीजी) कहा जाता है।
वीडीसी सदस्यों को क्या सुविधाएँ मिलती हैं?
वीडीसी सदस्यों को पुलिस द्वारा .303 या आधुनिक राइफलें और गोला-बारूद दिया जाता है। समूह प्रमुखों को ₹4,500 और नियमित सदस्यों को ₹4,000 प्रतिमाह मानदेय मिलता है।
क्या आरोपी को गिरफ्तार किया गया?
पुलिस ने घटना का संज्ञान लेते हुए जाँच शुरू कर दी है, लेकिन अभी तक किसी गिरफ्तारी की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। अधिकारियों के अनुसार आगे की कार्रवाई जारी है।
वीडीसी को वीडीजी में क्यों बदला गया?
घुसपैठ और लक्षित खतरों के विरुद्ध सुरक्षा व्यवस्था को मज़बूत करने के उद्देश्य से गृह मंत्रालय ने इस ढाँचे को संशोधित कर इसे औपचारिक रूप से ग्राम रक्षा गार्ड (वीडीजी) के रूप में अधिसूचित किया। यह पुनर्गठन संरचनात्मक जवाबदेही बढ़ाने के लिए किया गया था।
राष्ट्र प्रेस
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