क्या उधमपुर में बेटे की मौत के सदमे ने मां की जान ले ली?

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क्या उधमपुर में बेटे की मौत के सदमे ने मां की जान ले ली?

सारांश

उधमपुर में एक मां ने अपने बेटे की मौत की खबर सुनकर जीवन खो दिया। यह दिल दहला देने वाली घटना न केवल परिवार बल्कि पूरे गांव को भी शोक में डाल गई। जानिए इस दर्दनाक घटना के पीछे की कहानी।

Key Takeaways

  • सदमे से जीवन की अनिश्चितता का अहसास होता है।
  • परिवार का समर्थन महत्वपूर्ण है।
  • सुरक्षा के उपायों का पालन करें।
  • स्थानीय समुदाय एक दूसरे की मदद करें।
  • पहाड़ी क्षेत्रों में लकड़ी इकट्ठा करने की सावधानियाँ बरतें।

जम्मू, 4 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। जम्मू-कश्मीर के उधमपुर जिले में रविवार को एक महिला को अपने बेटे की मौत की खबर सुनकर गहरा सदमा लगा, जिसके चलते उनकी जान चली गई।

अधिकारियों के अनुसार, यह दुखद घटना उधमपुर जिले में उस समय घटी जब एक महिला को अपने बेटे की मौत की खबर सुनकर गहरा सदमा लगा। उसका बेटा जंगल में एक पेड़ से गिर गया था।

मृतक युवक की पहचान इरशाद अहमद के रूप में हुई है, जो उधमपुर जिले की रामनगर पंचायत के लराना गांव का निवासी था।

अधिकारियों ने बताया कि इरशाद पास के जंगल में लकड़ी इकट्ठा करने गया था, तभी वह गलती से पेड़ से गिर गया और उसकी मौके पर ही मौत हो गई।

घटना के तुरंत बाद इरशाद अहमद की मौत की खबर उसके परिवार को दी गई। यह दुखद खबर सुनकर उसकी मां जैतून बेगम गहरे सदमे में चली गईं।

वह अपने घर पर बेहोश हो गई और उसे तुरंत हॉस्पिटल ले जाया गया, लेकिन इलाज के दौरान उसका निधन हो गया।

इस घटना से पूरा गांव शोक में डूब गया; स्थानीय लोगों ने इन मौतों को बेहद दुखद और दर्दनाक बताया।

लाराना गांव के निवासियों ने इस घटना पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए कहा कि कम समय में मां और बेटे दोनों को खोने से परिवार पूरी तरह टूट गया है।

उधमपुर जिले के लाराना जैसे पहाड़ी गांवों और जम्मू-कश्मीर के अन्य पहाड़ी जिलों में रहने वाले लोग अपने चूल्हे जलाने के लिए चीड़ और शंकुधारी जंगलों से इकट्ठा की गई लकड़ियों पर निर्भर रहते हैं।

लकड़ी से जलने वाले ये चूल्हे घनी सर्दियों के महीनों में परिवारों को गर्म रखने का भी काम करते हैं।

ऐसे पहाड़ी क्षेत्रों में रहने वाले अधिकांश परिवार गुर्जर और बकरवाल समुदायों से संबंधित हैं। ये परिवार अर्ध-खानाबदोश जीवन जीते हैं और गर्मियों के महीनों में अपने पशुओं के साथ कश्मीर घाटी के घास के मैदानों में पलायन करते हैं।

शरद ऋतु समाप्त होने के बाद, वे पुंछ, राजौरी, रियासी, उधमपुर और जम्मू मंडल के अन्य हिस्सों में स्थित अपने मूल घरों में लौट आते हैं।

Point of View

NationPress
24/02/2026

Frequently Asked Questions

इस घटना का कारण क्या था?
इस घटना का कारण इरशाद अहमद का जंगल में लकड़ी इकट्ठा करते समय पेड़ से गिरना था।
महिला का नाम क्या था?
महिला का नाम जैतून बेगम था।
यह घटना कब हुई थी?
यह घटना 4 जनवरी को हुई थी।
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