मध्य पूर्व के तनाव ने वैश्विक विकास के अनुमान को प्रभावित किया: आईएमएफ
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वॉशिंगटन, 14 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। मध्य पूर्व में चल रहे संघर्ष का प्रभाव अब वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी दिखाई देने लगा है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने मंगलवार को बताया कि तकनीकी निवेश और निजी क्षेत्र की मजबूती के बावजूद वैश्विक विकास के अनुमान में कटौती की गई है।
भारत, जापान, यूएई, नीदरलैंड और चिली के पत्रकारों के साथ एक समूह साक्षात्कार के दौरान आईएमएफ के मुख्य अर्थशास्त्री पियरे-ओलिवियर गौरींचस ने कहा कि पहले 2026 के लिए वैश्विक विकास को 3.4 प्रतिशत तक बढ़ाने का अनुमान था, लेकिन अब यह घटकर लगभग 3.1 प्रतिशत रह गया है।
उन्होंने कहा कि यह गिरावट ऐसे समय में आई है जब वैश्विक अर्थव्यवस्था टैरिफ और व्यापार नीति से जुड़े झटकों के बाद धीरे-धीरे स्थिर हो रही थी।
गौरींचस ने बताया कि पहले अर्थव्यवस्था में अच्छा मोमेंटम था, जिसे बेहतर वित्तीय स्थितियों और एआई तकनीक के बढ़ते उपयोग का समर्थन मिला था।
उन्होंने कहा कि निजी क्षेत्र ने भी तेजी से सप्लाई चेन को नए रास्तों से जोड़कर हालात संभाले, जिससे व्यापार तनाव के प्रभाव को कुछ हद तक कम किया जा सका।
आईएमएफ के अनुसार, टैरिफ और व्यापार से जुड़ी अनिश्चितता ने पहले वैश्विक विकास को 0.5 से 0.6 प्रतिशत तक प्रभावित किया था, लेकिन अब इसका प्रभाव कम होता जा रहा है।
हालांकि, अब मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव ने नई चुनौती पेश कर दी है, विशेषकर ऊर्जा कीमतों में वृद्धि और सप्लाई में बाधा के कारण।
गौरींचस ने कहा कि नुकसान की सीमा इस बात पर निर्भर करेगी कि यह संघर्ष कितने समय तक जारी रहता है और ऊर्जा बाजार पर इसका कितना प्रभाव पड़ता है।
उन्होंने बताया कि यदि यह संघर्ष अधिक समय तक नहीं चलता और तेल-ऊर्जा सप्लाई सामान्य हो जाती है, तो इसका असर मुख्य रूप से इसी वर्ष तक सीमित रह सकता है।
लेकिन उन्होंने चेतावनी दी कि यदि हालात और बिगड़ते हैं, तो इसके प्रभाव लंबे समय तक बने रह सकते हैं। खासकर यदि वित्तीय स्थितियां कड़ी हो जाती हैं, तो इसका असर एक-दो वर्षों तक रह सकता है।
आईएमएफ ने यह भी चेतावनी दी कि बढ़ती खाद्य कीमतें और वित्तीय अस्थिरता कमजोर देशों के लिए बड़ा खतरा बन सकती हैं, जिससे खाद्य सुरक्षा पर प्रभाव पड़ सकता है।
संस्थान ने कहा कि इस वर्ष की शुरुआत में उम्मीद थी कि व्यापार तनाव कम होने और तकनीकी निवेश बढ़ने से वैश्विक विकास में सुधार होगा, लेकिन मध्य पूर्व संकट ने इस गति को बाधित कर दिया है।
अब ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता और महंगाई का दबाव बढ़ने से वैश्विक अर्थव्यवस्था के सामने नई चुनौतियाँ उत्पन्न हो गई हैं।