अभिषेक बनर्जी पर हमला BJP की साजिश नहीं, TMC विरोधी जनाक्रोश का नतीजा: खगेन मुर्मू
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के सांसद खगेन मुर्मू ने 31 मई 2026 को स्पष्ट किया कि तृणमूल कांग्रेस (TMC) सांसद अभिषेक बनर्जी पर सोनारपुर में हुआ हमला BJP की किसी सुनियोजित साजिश का हिस्सा नहीं है, बल्कि यह पश्चिम बंगाल की जनता के बीच TMC के प्रति गहरे आक्रोश का स्वाभाविक परिणाम है। उन्होंने यह भी दावा किया कि हमले में शामिल कई लोगों का संबंध खुद तृणमूल कांग्रेस से है।
मुर्मू का BJP का पक्ष
खगेन मुर्मू ने कहा कि BJP ने कभी हिंसा की राजनीति नहीं की और पार्टी का स्पष्ट निर्देश है कि कोई भी कार्यकर्ता किसी भी प्रकार की हिंसा में भाग नहीं लेगा। उन्होंने कहा, 'अगर किसी भी दल का कार्यकर्ता हिंसा में शामिल पाया जाता है, तो उसके खिलाफ संगठनात्मक और कानूनी दोनों स्तरों पर कार्रवाई होनी चाहिए।' BJP की पश्चिम बंगाल इकाई के वरिष्ठ नेताओं ने भी पहले यह स्पष्ट कर दिया है कि चुनाव के बाद भी राजनीतिक हिंसा किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है।
मुर्मू पर खुद हुए हमले का संदर्भ
मुर्मू ने 6 अक्टूबर 2025 की उस घटना का भी उल्लेख किया जब उन पर और विधायक शंकर घोष पर कथित तौर पर TMC समर्थकों ने हमला किया था। उन्होंने बताया कि उस दौरान उन्हें धक्का दिया गया, उनकी गाड़ी पर पथराव हुआ और उन्हें गंभीर चोटें आईं। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस मौके पर मौजूद होने के बावजूद उसने कोई प्रभावी हस्तक्षेप नहीं किया।
मुर्मू ने यह भी कहा कि उस घटना के बाद जब तत्कालीन मुख्यमंत्री ममता बनर्जी उनसे मिलने आई थीं, तब उन्होंने उनकी चोटों की गंभीरता को नजरअंदाज किया। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार और प्रशासन ने उस हमले को भी गंभीरता से नहीं लिया।
TMC पर कमजोरी और भ्रष्टाचार के आरोप
मुर्मू ने दावा किया कि आज तृणमूल कांग्रेस लगातार कमजोर हो रही है और पार्टी में केवल ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी की राजनीति शेष बची है। उनके अनुसार, बड़ी संख्या में नेता और कार्यकर्ता TMC छोड़ चुके हैं और जनता का भरोसा भी पार्टी से उठता जा रहा है। उन्होंने दोनों नेताओं पर भ्रष्टाचार के आरोप भी लगाए और कहा कि सोनारपुर की घटना जनता के इसी संचित गुस्से का परिणाम है।
विपक्षी एकजुटता पर निशाना
इंडिया ब्लॉक के नेताओं द्वारा अभिषेक बनर्जी के समर्थन में सामने आने पर भी मुर्मू ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि विपक्षी दल केवल अपनी राजनीतिक जमीन बचाने के लिए एकजुटता का प्रदर्शन कर रहे हैं, जबकि जनता सब कुछ देख और समझ रही है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के रुख का हवाला देते हुए कहा कि भ्रष्टाचार और अवैध गतिविधियों में शामिल लोगों के खिलाफ केंद्रीय एजेंसियों की कार्रवाई कानून के दायरे में जारी रहेगी।
आगे क्या
यह मामला पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक नई बहस को जन्म दे रहा है — कि क्या राज्य में राजनीतिक हिंसा का चरित्र बदल रहा है। गौरतलब है कि आने वाले विधानसभा चुनावों की पृष्ठभूमि में इस तरह के आरोप-प्रत्यारोप और तेज होने की संभावना है।