पुरी रथ यात्रा में 2 श्रद्धालुओं की मौत, विपक्ष ने भीड़ प्रबंधन पर सरकार को घेरा
सारांश
मुख्य बातें
पुरी में 16 जुलाई को आयोजित वार्षिक जगन्नाथ रथ यात्रा के दौरान दो श्रद्धालुओं की मौत हो गई — एक की कथित तौर पर दम घुटने से और दूसरे की दिल का दौरा पड़ने से। इस घटना के बाद मुख्य विपक्षी दल बीजू जनता दल (बीजद) और ओडिशा प्रदेश कांग्रेस कमेटी (ओपीसीसी) ने राज्य सरकार पर कड़े सवाल उठाए हैं।
मुख्य घटनाक्रम
बड़ा डांडा (ग्रैंड रोड) स्थित मारीचिकोट चौक के पास अत्यधिक भीड़ के कारण क्योंझर जिले के निवासी अनिल दास का दम घुटने लगा। पुलिस बैरिकेड से लगभग 100 फीट की दूरी पर वे अचानक गिर पड़े, जिसके बाद उन्हें तत्काल पुरी जिला मुख्यालय अस्पताल ले जाया गया, जहाँ चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। एक अलग घटना में, 35 वर्ष से अधिक आयु के एक अन्य पुरुष श्रद्धालु को दिल का दौरा पड़ा और तत्काल चिकित्सा सहायता के बावजूद उनकी जान नहीं बचाई जा सकी।
राज्य सरकार के अनुसार, रथ यात्रा के दौरान कुल सात लोगों की तबीयत बिगड़ी, जिन्हें तैनात कर्मियों ने अस्पताल पहुँचाया। सरकार ने भगदड़ की घटनाओं के आरोपों से इनकार किया है, लेकिन दो मौतों की पुष्टि की है।
विपक्ष की प्रतिक्रिया
ओपीसीसी अध्यक्ष भक्त चरण दास ने श्रद्धालु की मौत पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि घटना के समय 150 से अधिक लोग दम घुटने और भीड़ से जुड़ी स्वास्थ्य समस्याओं के कारण उपचाराधीन थे। दास ने इस घटना को 'अक्षम्य' बताया और अत्यधिक संख्या में कॉर्डन पास जारी करने तथा प्रतिबंधित क्षेत्रों में अनाधिकृत प्रवेश को कथित अव्यवस्था के प्रमुख कारण बताया।
उन्होंने पिछले वर्ष रथ यात्रा के दौरान पुरी में हुई भगदड़ का भी उल्लेख किया, जिसमें तीन लोगों की मौत हो गई थी, और कहा कि ऐसी घटनाओं का बार-बार होना गंभीर चिंता का विषय है।
धार्मिक विवाद
दास ने राज्य सरकार की आलोचना करते हुए यह भी आरोप लगाया कि इस वर्ष भगवान जगन्नाथ की रस्म पारंपरिक 'ताहिया' के बिना संपन्न कराई गई। 'ताहिया' एक विशेष सुगंधित पुष्प मुकुट होता है जिसे देवताओं को धारण कराया जाता है। उनका कहना था कि इस परंपरा की अनदेखी से ओड़िया समाज की धार्मिक भावनाएँ आहत हुई हैं।
सरकार का पक्ष
राज्य सरकार ने स्पष्ट किया कि मौतें भगदड़ के कारण नहीं, बल्कि दम घुटने और हृदयाघात जैसी स्वास्थ्य स्थितियों के कारण हुईं। सरकार के अनुसार, तैनात कर्मियों ने तत्परता से काम किया और सभी प्रभावित लोगों को समय पर चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराई।
आगे क्या
यह ऐसे समय में आया है जब लगातार दूसरे वर्ष रथ यात्रा के दौरान मौतें होने से भीड़ प्रबंधन की व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। ओपीसीसी ने माँग की है कि सरकार इस पूरे मामले की गहन समीक्षा करे और भविष्य की यात्राओं के लिए ठोस सुरक्षा उपाय सुनिश्चित करे।