17 जुलाई 2026
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पुरी रथ यात्रा में 2 श्रद्धालुओं की मौत, विपक्ष ने भीड़ प्रबंधन पर सरकार को घेरा

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पुरी रथ यात्रा में 2 श्रद्धालुओं की मौत, विपक्ष ने भीड़ प्रबंधन पर सरकार को घेरा

सारांश

पुरी रथ यात्रा में लगातार दूसरे वर्ष मौतें — इस बार दो श्रद्धालुओं की जान गई। बीजद और ओपीसीसी ने भीड़ प्रबंधन की विफलता और कॉर्डन पास के दुरुपयोग का आरोप लगाया, जबकि राज्य सरकार ने भगदड़ से इनकार किया।

मुख्य बातें

पुरी रथ यात्रा के दौरान 16 जुलाई को दो श्रद्धालुओं की मौत — एक दम घुटने से, दूसरे को दिल का दौरा पड़ने से।
क्योंझर जिले के निवासी अनिल दास की मारीचिकोट चौक के पास अत्यधिक भीड़ में दम घुटने से मौत।
रथ यात्रा के दौरान 150 से अधिक लोग दम घुटने व भीड़ से जुड़ी स्वास्थ्य समस्याओं के कारण उपचाराधीन रहे।
ओपीसीसी अध्यक्ष भक्त चरण दास ने अत्यधिक कॉर्डन पास जारी करने और प्रतिबंधित क्षेत्रों में अनाधिकृत प्रवेश को कथित अव्यवस्था का कारण बताया।
पिछले वर्ष भी पुरी रथ यात्रा में भगदड़ से तीन लोगों की मौत हुई थी।
राज्य सरकार ने भगदड़ के आरोपों से इनकार किया, लेकिन दो मौतों की पुष्टि की।

पुरी में 16 जुलाई को आयोजित वार्षिक जगन्नाथ रथ यात्रा के दौरान दो श्रद्धालुओं की मौत हो गई — एक की कथित तौर पर दम घुटने से और दूसरे की दिल का दौरा पड़ने से। इस घटना के बाद मुख्य विपक्षी दल बीजू जनता दल (बीजद) और ओडिशा प्रदेश कांग्रेस कमेटी (ओपीसीसी) ने राज्य सरकार पर कड़े सवाल उठाए हैं।

मुख्य घटनाक्रम

बड़ा डांडा (ग्रैंड रोड) स्थित मारीचिकोट चौक के पास अत्यधिक भीड़ के कारण क्योंझर जिले के निवासी अनिल दास का दम घुटने लगा। पुलिस बैरिकेड से लगभग 100 फीट की दूरी पर वे अचानक गिर पड़े, जिसके बाद उन्हें तत्काल पुरी जिला मुख्यालय अस्पताल ले जाया गया, जहाँ चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। एक अलग घटना में, 35 वर्ष से अधिक आयु के एक अन्य पुरुष श्रद्धालु को दिल का दौरा पड़ा और तत्काल चिकित्सा सहायता के बावजूद उनकी जान नहीं बचाई जा सकी।

राज्य सरकार के अनुसार, रथ यात्रा के दौरान कुल सात लोगों की तबीयत बिगड़ी, जिन्हें तैनात कर्मियों ने अस्पताल पहुँचाया। सरकार ने भगदड़ की घटनाओं के आरोपों से इनकार किया है, लेकिन दो मौतों की पुष्टि की है।

विपक्ष की प्रतिक्रिया

ओपीसीसी अध्यक्ष भक्त चरण दास ने श्रद्धालु की मौत पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि घटना के समय 150 से अधिक लोग दम घुटने और भीड़ से जुड़ी स्वास्थ्य समस्याओं के कारण उपचाराधीन थे। दास ने इस घटना को 'अक्षम्य' बताया और अत्यधिक संख्या में कॉर्डन पास जारी करने तथा प्रतिबंधित क्षेत्रों में अनाधिकृत प्रवेश को कथित अव्यवस्था के प्रमुख कारण बताया।

उन्होंने पिछले वर्ष रथ यात्रा के दौरान पुरी में हुई भगदड़ का भी उल्लेख किया, जिसमें तीन लोगों की मौत हो गई थी, और कहा कि ऐसी घटनाओं का बार-बार होना गंभीर चिंता का विषय है।

धार्मिक विवाद

दास ने राज्य सरकार की आलोचना करते हुए यह भी आरोप लगाया कि इस वर्ष भगवान जगन्नाथ की रस्म पारंपरिक 'ताहिया' के बिना संपन्न कराई गई। 'ताहिया' एक विशेष सुगंधित पुष्प मुकुट होता है जिसे देवताओं को धारण कराया जाता है। उनका कहना था कि इस परंपरा की अनदेखी से ओड़िया समाज की धार्मिक भावनाएँ आहत हुई हैं।

सरकार का पक्ष

राज्य सरकार ने स्पष्ट किया कि मौतें भगदड़ के कारण नहीं, बल्कि दम घुटने और हृदयाघात जैसी स्वास्थ्य स्थितियों के कारण हुईं। सरकार के अनुसार, तैनात कर्मियों ने तत्परता से काम किया और सभी प्रभावित लोगों को समय पर चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराई।

आगे क्या

यह ऐसे समय में आया है जब लगातार दूसरे वर्ष रथ यात्रा के दौरान मौतें होने से भीड़ प्रबंधन की व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। ओपीसीसी ने माँग की है कि सरकार इस पूरे मामले की गहन समीक्षा करे और भविष्य की यात्राओं के लिए ठोस सुरक्षा उपाय सुनिश्चित करे।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो सरकार का 'भगदड़ नहीं हुई' का बयान जवाबदेही से बचने का प्रयास लगता है। 150 से अधिक लोगों का एक ही दिन में बीमार पड़ना यह दर्शाता है कि भीड़ नियंत्रण की विफलता व्यापक थी — चाहे उसे जो भी नाम दिया जाए। ताहिया विवाद को जोड़ने से यह मामला राजनीतिक रंग लेता है, लेकिन मूल प्रश्न — करोड़ों श्रद्धालुओं की सुरक्षा — उससे कहीं बड़ा है।
RashtraPress
17 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पुरी रथ यात्रा 2025 में कितने श्रद्धालुओं की मौत हुई?
राज्य सरकार ने 16 जुलाई को रथ यात्रा के दौरान दो श्रद्धालुओं की मौत की पुष्टि की है — एक की दम घुटने से और दूसरे की हृदयाघात से। इसके अतिरिक्त 150 से अधिक लोग भीड़ से जुड़ी स्वास्थ्य समस्याओं के कारण उपचाराधीन रहे।
अनिल दास कौन थे और उनकी मौत कैसे हुई?
अनिल दास ओडिशा के क्योंझर जिले के निवासी थे जो रथ यात्रा में भाग लेने पुरी आए थे। बड़ा डांडा स्थित मारीचिकोट चौक के पास अत्यधिक भीड़ में दम घुटने के कारण वे पुलिस बैरिकेड से लगभग 100 फीट की दूरी पर गिर पड़े और पुरी जिला मुख्यालय अस्पताल में उन्हें मृत घोषित कर दिया गया।
ओपीसीसी ने राज्य सरकार पर क्या आरोप लगाए?
ओपीसीसी अध्यक्ष भक्त चरण दास ने अत्यधिक कॉर्डन पास जारी करने और प्रतिबंधित क्षेत्रों में अनाधिकृत प्रवेश को अव्यवस्था का कारण बताया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि इस वर्ष भगवान जगन्नाथ की रस्म पारंपरिक 'ताहिया' पुष्प मुकुट के बिना संपन्न कराई गई, जिससे ओड़िया समाज की धार्मिक भावनाएँ आहत हुईं।
राज्य सरकार ने भगदड़ के आरोपों पर क्या कहा?
राज्य सरकार ने भगदड़ की घटनाओं से इनकार किया है। सरकार के अनुसार दोनों मौतें दम घुटने और हृदयाघात जैसी स्वास्थ्य स्थितियों के कारण हुईं और तैनात कर्मियों ने सभी प्रभावित लोगों को तत्काल चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराई।
पिछले वर्ष पुरी रथ यात्रा में क्या हुआ था?
पिछले वर्ष पुरी रथ यात्रा के दौरान भगदड़ में तीन लोगों की मौत हो गई थी। ओपीसीसी ने इसका उल्लेख करते हुए कहा कि ऐसी घटनाओं का बार-बार होना गंभीर चिंता का विषय है और भीड़ प्रबंधन व्यवस्था की गहन समीक्षा की जानी चाहिए।
राष्ट्र प्रेस
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