17 जुलाई 2026
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ट्रंप प्रशासन का बड़ा फैसला: विदेशी छात्रों का वीजा अब अधिकतम 4 साल, 'ड्यूरेशन ऑफ स्टेटस' व्यवस्था खत्म

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ट्रंप प्रशासन का बड़ा फैसला: विदेशी छात्रों का वीजा अब अधिकतम 4 साल, 'ड्यूरेशन ऑफ स्टेटस' व्यवस्था खत्म

सारांश

ट्रंप प्रशासन ने 1978 से चली आ रही 'ड्यूरेशन ऑफ स्टेटस' व्यवस्था को खत्म कर दिया है — अब विदेशी छात्र अधिकतम 4 साल ही अमेरिका में रह सकेंगे। वीजा विस्तार का अधिकार संस्थानों से छिनकर सीधे संघीय सरकार को मिला। भारतीय छात्रों पर सबसे अधिक असर पड़ने की आशंका है।

मुख्य बातें

ट्रंप प्रशासन ने 16 जुलाई 2026 को नया अंतिम नियम जारी कर 'ड्यूरेशन ऑफ स्टेटस' व्यवस्था समाप्त की।
विदेशी छात्रों ( F ), एक्सचेंज विजिटर्स ( J ) और मीडिया प्रतिनिधियों ( I ) का अमेरिका में प्रवास अब अधिकतम 4 वर्ष तक सीमित।
वीजा विस्तार का अधिकार शैक्षणिक संस्थानों से लेकर USCIS को सौंपा गया; प्रक्रिया में बायोमेट्रिक और बैकग्राउंड चेक अनिवार्य।
F-1 छात्रों के लिए पढ़ाई के बाद अमेरिका छोड़ने की छूट अवधि 60 दिन से घटाकर 30 दिन की गई।
नियम फेडरल रजिस्टर में प्रकाशन के 60 दिन बाद लागू होगा; पहले से मौजूद छात्र भी नई व्यवस्था में आएंगे।
भारत अमेरिका में विदेशी छात्रों के सबसे बड़े स्रोत देशों में शामिल — भारतीय छात्रों पर सर्वाधिक प्रभाव पड़ने की आशंका।

ट्रंप प्रशासन ने 16 जुलाई 2026 को एक नया अंतिम नियम जारी करते हुए दशकों पुरानी 'ड्यूरेशन ऑफ स्टेटस' व्यवस्था को समाप्त कर दिया, जिसके तहत विदेशी छात्र और एक्सचेंज विजिटर बिना किसी निश्चित समाप्ति तिथि के अमेरिका में रह सकते थे। अब 'एफ', 'जे' और 'आई' श्रेणी के गैर-आप्रवासी वीजा धारकों की अमेरिका में उपस्थिति अधिकतम चार वर्षों तक सीमित होगी और वीजा विस्तार के लिए अनिवार्य संघीय जांच से गुजरना होगा।

नया नियम क्या बदलेगा

डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी (DHS) के अनुसार, 1978 से चली आ रही उस व्यवस्था को अब समाप्त किया जा रहा है जिसमें विदेशी छात्रों को अमेरिका में रहने के लिए कोई निश्चित अवधि नहीं दी जाती थी। नए नियम के तहत विदेशी छात्रों, मीडिया प्रतिनिधियों और एक्सचेंज विजिटर्स को उनके स्वीकृत कार्यक्रम की अवधि के अनुसार रहने की अनुमति मिलेगी — परंतु यह अवधि अधिकतम चार वर्ष से अधिक नहीं होगी।

इसके साथ ही, वीजा विस्तार का अधिकार अब शैक्षणिक संस्थानों से लेकर सीधे संघीय सरकार को सौंप दिया गया है। यदि किसी छात्र को कार्यक्रम पूरा करने के लिए अतिरिक्त समय चाहिए, तो उसे अमेरिकी नागरिकता और इमिग्रेशन सेवा (USCIS) के पास स्टे विस्तार के लिए सीधे आवेदन करना होगा।

सरकार की दलील और DHS सचिव का बयान

DHS सचिव मार्कवेन मुलिन ने कहा, 'लगभग आधी सदी से चली आ रही 'ड्यूरेशन ऑफ स्टेटस' व्यवस्था ने राष्ट्रीय सुरक्षा को कमज़ोर किया और इमिग्रेशन धोखाधड़ी के लिए रास्ते खोले।' उन्होंने यह भी कहा कि कुछ लोग बार-बार नए शैक्षणिक कार्यक्रमों में दाखिला लेकर अनिश्चितकाल तक अमेरिका में बने रहते थे और उन्हें देश छोड़ने की आवश्यकता नहीं पड़ती थी।

DHS का कहना है कि इस नियम का उद्देश्य इमिग्रेशन प्रणाली में सुधार लाना, वीजा के दुरुपयोग को रोकना और नियमित सरकारी जांच के ज़रिए राष्ट्रीय सुरक्षा को सुदृढ़ करना है।

प्रक्रिया में क्या बदलाव होंगे

वीजा विस्तार की प्रक्रिया में अब बायोमेट्रिक जांच, बैकग्राउंड चेक और धोखाधड़ी की जांच अनिवार्य रूप से शामिल होगी। इसके अतिरिक्त, एफ-1 श्रेणी के छात्रों के लिए पढ़ाई पूरी होने, कॉलेज बदलने या स्टेटस बदलने के बाद अमेरिका छोड़ने की छूट की अवधि 60 दिन से घटाकर 30 दिन कर दी गई है। पढ़ाई के कार्यक्रम बदलने पर भी पहले से अधिक कड़े नियम लागू होंगे।

DHS ने स्पष्ट किया है कि यह अंतिम नियम फेडरल रजिस्टर में प्रकाशन के 60 दिन बाद प्रभावी होगा। जो विदेशी छात्र पहले से 'ड्यूरेशन ऑफ स्टेटस' व्यवस्था के तहत अमेरिका में हैं, वे भी नई व्यवस्था के दायरे में आएंगे और नियम लागू होने की तिथि से उनका अधिकृत प्रवास अधिकतम चार वर्ष तक सीमित होगा।

भारतीय छात्रों पर असर

भारत अमेरिका में पढ़ने वाले विदेशी छात्रों के सबसे बड़े स्रोत देशों में से एक रहा है। नए नियमों के बाद भारतीय छात्रों सहित सभी विदेशी छात्रों को वीजा विस्तार के लिए अधिक कड़ी सरकारी जांच का सामना करना पड़ सकता है। जिन छात्रों को अपनी पढ़ाई पूरी करने के लिए अतिरिक्त समय चाहिए, उन्हें अब USCIS से सीधे मंजूरी लेनी होगी — जो पहले संस्थान स्तर पर ही निपट जाता था।

गौरतलब है कि यह नीति ट्रंप प्रशासन की उस व्यापक रणनीति का हिस्सा है जिसके तहत इमिग्रेशन नियमों को कड़ा करने और अस्थायी वीजा कार्यक्रमों पर संघीय निगरानी बढ़ाने की कोशिश की जा रही है। अमेरिकी इमिग्रेशन एंड कस्टम्स एनफोर्समेंट (ICE) के तहत चलने वाला स्टूडेंट एंड एक्सचेंज विजिटर प्रोग्राम (SEVP) आगे भी स्कूलों और विदेशी छात्रों की निगरानी SEVIS प्रणाली के माध्यम से जारी रखेगा।

आगे क्या होगा

नया नियम फेडरल रजिस्टर में प्रकाशन के बाद 60 दिनों में लागू होगा। शिक्षा क्षेत्र के विशेषज्ञों और विश्वविद्यालय प्रशासकों की प्रतिक्रिया अभी सामने आनी बाकी है। कथित तौर पर कई अमेरिकी विश्वविद्यालय इस नियम के दीर्घकालिक प्रभावों का आकलन कर रहे हैं, विशेषकर उन स्नातकोत्तर और शोध कार्यक्रमों के संदर्भ में जो प्रायः चार वर्षों से अधिक चलते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो अक्सर पाँच से सात वर्ष लेते हैं — इसका मतलब है कि हज़ारों शोधार्थियों को बीच में ही USCIS की नौकरशाही से गुज़रना होगा। भारत और चीन जैसे देशों के छात्र, जो अमेरिकी विश्वविद्यालयों के STEM विभागों की रीढ़ हैं, सबसे अधिक प्रभावित होंगे — और यह विडंबना है कि जो प्रशासन 'अमेरिका फर्स्ट' की बात करता है, वह उन्हीं प्रतिभाओं को दूर धकेल रहा है जो अमेरिकी नवाचार को ईंधन देती हैं।
RashtraPress
17 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ट्रंप प्रशासन के नए वीजा नियम से विदेशी छात्रों पर क्या असर पड़ेगा?
नए नियम के तहत विदेशी छात्र अब अमेरिका में अधिकतम चार वर्ष तक ही रह सकेंगे। इससे पहले 'ड्यूरेशन ऑफ स्टेटस' व्यवस्था के तहत उन्हें कोई निश्चित समय सीमा नहीं दी जाती थी और वे बार-बार नए कार्यक्रमों में दाखिला लेकर अनिश्चितकाल तक रह सकते थे।
'ड्यूरेशन ऑफ स्टेटस' व्यवस्था क्या थी और इसे क्यों खत्म किया गया?
'ड्यूरेशन ऑफ स्टेटस' वह व्यवस्था थी जिसके तहत 1978 से विदेशी छात्रों को अमेरिका में रहने के लिए कोई निश्चित अंतिम तिथि नहीं दी जाती थी। DHS सचिव मार्कवेन मुलिन के अनुसार, इस व्यवस्था ने राष्ट्रीय सुरक्षा को कमज़ोर किया और इमिग्रेशन धोखाधड़ी के लिए रास्ते खोले, इसलिए इसे समाप्त किया गया।
नया वीजा नियम कब से लागू होगा?
यह नियम फेडरल रजिस्टर में प्रकाशन के 60 दिन बाद प्रभावी होगा। जो छात्र पहले से 'ड्यूरेशन ऑफ स्टेटस' के तहत अमेरिका में हैं, वे भी नई व्यवस्था में आएंगे और नियम लागू होने की तिथि से उनका प्रवास अधिकतम चार वर्ष तक सीमित होगा।
अगर छात्र को पढ़ाई पूरी करने के लिए चार साल से ज़्यादा समय चाहिए तो क्या करना होगा?
ऐसे छात्रों को सीधे USCIS के पास स्टे विस्तार के लिए आवेदन करना होगा। इस प्रक्रिया में बायोमेट्रिक जांच, बैकग्राउंड चेक और धोखाधड़ी की जांच अनिवार्य रूप से शामिल होगी। पहले यह अधिकार शैक्षणिक संस्थानों के पास था।
भारतीय छात्रों पर इस नियम का क्या प्रभाव पड़ेगा?
भारत अमेरिका में विदेशी छात्रों के सबसे बड़े स्रोत देशों में से एक है, इसलिए भारतीय छात्रों पर इस नियम का सर्वाधिक प्रभाव पड़ने की आशंका है। जिन छात्रों को पढ़ाई पूरी करने के लिए अतिरिक्त समय चाहिए — विशेषकर PhD और शोध कार्यक्रमों में — उन्हें अब USCIS से सीधे मंजूरी लेनी होगी।
राष्ट्र प्रेस
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