अमेरिकी वीजा बदलाव भारत-विरोधी नहीं, इमिग्रेशन सुधार का हिस्सा: राजदूत सर्जियो गोर
सारांश
मुख्य बातें
भारत में तैनात अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने 27 जून 2026 को स्पष्ट किया कि ट्रंप प्रशासन द्वारा अमेरिकी वीजा प्रणाली में किए जा रहे बदलाव किसी भी रूप में भारत को निशाना बनाने के लिए नहीं हैं। व्हाइट हाउस में दिए गए एक विशेष साक्षात्कार में गोर ने कहा कि ये कदम पूरे अमेरिकी आव्रजन तंत्र में व्यापक सुधार की एक बड़ी मुहिम का हिस्सा हैं। उन्होंने भरोसा दिलाया कि दोनों देशों के बीच व्यापार, रक्षा और जन-संपर्क सहयोग निरंतर बना रहेगा।
वीजा बदलाव पर राजदूत का स्पष्टीकरण
एच-1बी वीजा और आव्रजन कानूनों के सख्त प्रवर्तन को लेकर उठ रही चिंताओं पर गोर ने कहा, 'मुझे नहीं लगता कि इस मुद्दे को भारत के खिलाफ उठाया गया कदम समझना चाहिए। यह किसी भी तरह से विशेष रूप से भारत को निशाना बनाने के लिए नहीं है।' उन्होंने यह भी जोड़ा कि अमेरिका को अपने संपूर्ण इमिग्रेशन सिस्टम और हर प्रकार के वीजा का पुनर्मूल्यांकन करना था, क्योंकि पिछली सरकारों के दौर में सीमाएँ पूरी तरह खुली रहीं।
मोदी और ट्रंप की सोच में समानता
गोर ने कहा कि गैरकानूनी आव्रजन के मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के विचार एक जैसे हैं। उन्होंने कहा, 'जब मैं भारत में प्रधानमंत्री को बोलते हुए सुनता हूँ, तो वह गैर-कानूनी माइग्रेंट्स के बारे में बात करते हैं। हम इस बात से सौ फीसदी सहमत हैं।' गोर ने स्वीकार किया कि भारत की विशाल जनसंख्या के कारण आव्रजन प्रक्रिया में बदलावों का असर अधिक भारतीयों पर पड़ेगा, लेकिन उन्होंने ज़ोर दिया कि इन सुधारों को केवल भारत के संदर्भ में नहीं देखा जाना चाहिए।
द्विपक्षीय संबंधों की मजबूती
राजदूत ने भारत में स्थित अमेरिकी दूतावास को दुनिया के सबसे व्यस्त वीजा केंद्रों में से एक बताते हुए कहा कि यह दोनों देशों के बीच मजबूत जन-संपर्क का प्रमाण है। उन्होंने कहा, 'लोगों के बीच संबंध बने रहेंगे, व्यापार जारी रहेगा, वाणिज्य जारी रहेगा।' गोर ने यह भी रेखांकित किया कि भारत दुनिया के किसी भी अन्य देश की तुलना में अमेरिका के साथ सर्वाधिक रक्षा अभ्यास करता है और अमेरिका को सबसे अधिक निर्यात करता है।
ऊर्जा सहयोग और विविधीकरण
ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग पर गोर ने कहा कि नई दिल्ली ने अमेरिकी ऊर्जा की खरीद पहले ही बढ़ा दी है। उन्होंने ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य बंद करने के हालिया संकट का उल्लेख करते हुए ऊर्जा आपूर्ति के विविधीकरण की अहमियत पर बल दिया। उनके अनुसार, अलग-अलग स्रोतों से ऊर्जा प्राप्त करना भारत की दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा के लिए अनिवार्य है।
आगे की राह
पिछले दो दशकों में भारत-अमेरिका साझेदारी रक्षा, प्रौद्योगिकी, व्यापार, स्वच्छ ऊर्जा और आपूर्ति श्रृंखला के क्षेत्रों में उल्लेखनीय रूप से विस्तारित हुई है। भारत अमेरिका में अंतरराष्ट्रीय छात्रों और कुशल पेशेवरों के सबसे बड़े स्रोतों में बना हुआ है, जबकि भारतीय कंपनियाँ अमेरिकी बाजार में निवेश बढ़ा रही हैं। आव्रजन और व्यापार पर नीतिगत मतभेदों के बावजूद, दोनों सरकारों ने इस संबंध को अपनी सर्वोच्च रणनीतिक प्राथमिकताओं में गिना है।