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भारत-अमेरिका संबंध अब तक के सबसे मजबूत: रुबियो और गोर ने ट्रेड डील व ट्रंप के भारत दौरे का दिया संकेत

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भारत-अमेरिका संबंध अब तक के सबसे मजबूत: रुबियो और गोर ने ट्रेड डील व ट्रंप के भारत दौरे का दिया संकेत

सारांश

ट्रंप सरकार के दो सबसे वरिष्ठ अधिकारियों ने एक साथ संकेत दिया — व्यापार समझौता अंतिम पड़ाव पर है, राष्ट्रपति का भारत दौरा संभव है, और मोदी-ट्रंप की दोस्ती इस पूरी साझेदारी की रीढ़ है। यह महज कूटनीतिक बयानबाजी नहीं, भारत-अमेरिका संबंधों के नए अध्याय का ऐलान है।

मुख्य बातें

अमेरिकी विदेश सचिव मार्को रुबियो ने कहा कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौता 'आखिरी पड़ाव' पर है और अगले कुछ हफ्तों या महीनों में पूरा होने की उम्मीद है।
राजदूत सर्जियो गोर ने बताया कि अमेरिकी दूतावास ने एक वर्ष में $20 बिलियन से अधिक के नए अमेरिकी निवेश को सुगम बनाया।
रुबियो ने संकेत दिया कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का भारत दौरा अगले साल की शुरुआत में संभव है।
दोनों अधिकारियों ने PM मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप के व्यक्तिगत संबंध को साझेदारी का प्रमुख आधार बताया।
सहयोग के प्रमुख क्षेत्रों में रक्षा, तकनीक, ऊर्जा, फार्मास्यूटिकल्स, आवश्यक खनिज और क्वाड शामिल हैं।

अमेरिकी विदेश सचिव मार्को रुबियो और भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने 27 जून को वाशिंगटन में अलग-अलग एक्सक्लूसिव इंटरव्यू में कहा कि भारत-अमेरिका संबंध अब तक के सबसे मजबूत दौर में हैं। दोनों वरिष्ठ अधिकारियों ने संकेत दिया कि आने वाले हफ्तों या महीनों में एक द्विपक्षीय व्यापार समझौता अंतिम रूप ले सकता है और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का भारत दौरा अगले साल की शुरुआत में संभव है।

व्यापार समझौते की स्थिति

रुबियो ने स्पष्ट किया कि दोनों देश व्यापार वार्ता के अंतिम चरण में हैं। उन्होंने कहा, 'हम एक व्यापार समझौते को फाइनल करने की उम्मीद कर रहे हैं। हम इसे पूरा करने के आखिरी पड़ाव पर हैं और यह बहुत सकारात्मक है।' राजदूत गोर ने भी इस बात की पुष्टि करते हुए कहा, 'कुछ मुद्दे अभी बाकी हैं। अब बहुत कुछ इस बात पर निर्भर करता है कि आखिर में दोनों पक्ष किस भाषा पर हस्ताक्षर करेंगे। हमें भरोसा है कि अगले कुछ हफ्तों में, अगले कुछ महीनों में यह हो जाएगा।'

मोदी-ट्रंप व्यक्तिगत संबंध: कूटनीति की नींव

दोनों अधिकारियों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप के बीच व्यक्तिगत संबंध को द्विपक्षीय साझेदारी का एक प्रमुख आधार बताया। रुबियो ने कहा, 'प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति के बीच का संबंध इससे ज्यादा करीबी नहीं हो सकता, जो मुझे लगता है कि कूटनीति में बहुत जरूरी है।' गोर ने इसे संबंधों के 'बड़े आधारों में से एक' करार देते हुए कहा, 'राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री बहुत अच्छे दोस्त हैं और यह बात सालों पुरानी है और सालों आगे भी जारी रहेगी।' गोर ने यह भी कहा कि उन्हें दोनों नेताओं में कई समानताएँ दिखती हैं, क्योंकि 'दोनों को व्यस्त रहना और काम तेजी से करना पसंद है।'

सहयोग के बढ़ते क्षेत्र

रुबियो और गोर ने व्यापार, रक्षा, ऊर्जा, आवश्यक खनिज, सप्लाई चेन और हिंद-प्रशांत में समुद्री सुरक्षा को साझेदारी के प्रमुख स्तंभ बताया। गोर ने कहा, 'आप अमेरिका में किसी भी क्षेत्र को देख सकते हैं और भारत हमारे साथ मिलकर काम कर सकता है और उस स्तर को अगले लेवल तक ले जा सकता है।' उन्होंने तकनीक, रक्षा, फार्मास्यूटिकल्स और निवेश में बढ़ते सहयोग का विशेष उल्लेख किया।

आर्थिक जुड़ाव और क्वाड की भूमिका

गोर ने बताया कि भारत में अमेरिकी दूतावास ने एक वर्ष में अमेरिका में $20 बिलियन से अधिक के नए निवेश को सुगम बनाने में सहायता की है। रुबियो ने भारत को एक बहुत करीबी साझेदार और सहयोगी बताया, यह भी रेखांकित करते हुए कि वाशिंगटन एक और क्वाड बैठक की तैयारी कर रहा है। गौरतलब है कि भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया मिलकर एक स्वतंत्र, खुले और स्थिर हिंद-प्रशांत के लिए काम करते हैं।

आगे क्या

दोनों अधिकारियों के बयान ट्रंप सरकार की भारत-नीति के बारे में अब तक के सबसे स्पष्ट सार्वजनिक संकेत माने जा रहे हैं। पिछले दो दशकों में भारत-अमेरिका रणनीतिक साझेदारी लगातार गहरी होती रही है, और अब व्यापार समझौते के अंतिम होने तथा राष्ट्रपति के संभावित भारत दौरे के साथ यह संबंध एक नए अध्याय में प्रवेश कर सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

डेटा स्थानीयकरण और कृषि बाज़ार जैसे विवादास्पद मुद्दों पर दोनों पक्ष कितना लचीलापन दिखाते हैं। मोदी-ट्रंप व्यक्तिगत रसायन को साझेदारी की 'रीढ़' बताना एक सकारात्मक संकेत है, पर संस्थागत ढाँचे के बिना नेतृत्व-आधारित कूटनीति अस्थिर भी हो सकती है। क्वाड की अगली बैठक और संभावित राष्ट्रपति दौरा — दोनों मिलकर तय करेंगे कि यह 'महत्वाकांक्षी एजेंडा' कागज़ पर रहता है या ज़मीन पर उतरता है।
RashtraPress
27 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत-अमेरिका व्यापार समझौता कब तक पूरा होगा?
अमेरिकी विदेश सचिव मार्को रुबियो और राजदूत सर्जियो गोर दोनों ने कहा है कि समझौता 'अगले कुछ हफ्तों या महीनों' में पूरा होने की उम्मीद है। हालाँकि दोनों ने स्वीकार किया कि कुछ मुद्दे अभी बाकी हैं और अंतिम भाषा पर सहमति बनना शेष है।
क्या राष्ट्रपति ट्रंप भारत आएँगे?
रुबियो ने संकेत दिया कि वाशिंगटन अगले साल की शुरुआत में राष्ट्रपति ट्रंप के भारत दौरे की दिशा में काम कर रहा है। यह दौरा कब और किन शर्तों पर होगा, इसका आधिकारिक ऐलान अभी बाकी है।
मोदी-ट्रंप संबंध भारत-अमेरिका साझेदारी को कैसे प्रभावित करता है?
दोनों अमेरिकी अधिकारियों ने PM मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप के व्यक्तिगत संबंध को द्विपक्षीय साझेदारी के 'बड़े आधारों में से एक' बताया। गोर के अनुसार दोनों नेताओं में काम करने की शैली और गति को लेकर गहरी समानता है।
भारत-अमेरिका सहयोग के मुख्य क्षेत्र कौन से हैं?
दोनों अधिकारियों ने व्यापार, रक्षा, तकनीक, फार्मास्यूटिकल्स, आवश्यक खनिज, स्वच्छ ऊर्जा, सप्लाई चेन और हिंद-प्रशांत में समुद्री सुरक्षा को प्रमुख क्षेत्र बताया। क्वाड के ज़रिए जापान और ऑस्ट्रेलिया के साथ मिलकर भी काम जारी है।
अमेरिकी दूतावास ने भारत में निवेश के मामले में क्या हासिल किया?
राजदूत सर्जियो गोर के अनुसार भारत में अमेरिकी दूतावास ने एक वर्ष में अमेरिका में $20 बिलियन से अधिक के नए निवेश को सुगम बनाने में सहायता की। यह आँकड़ा दोनों देशों के बीच बढ़ते आर्थिक जुड़ाव का संकेत है।
राष्ट्र प्रेस
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