राजदूत सर्जियो गोर ने 6 महीने में बदली भारत-अमेरिका साझेदारी की दिशा, विशेषज्ञों ने सराहा
सारांश
मुख्य बातें
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत में नियुक्त अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने महज छह महीनों में भारत-अमेरिका द्विपक्षीय संबंधों को नई गति और दिशा देने में उल्लेखनीय भूमिका निभाई है। रणनीतिक मामलों के विश्लेषकों और व्यापार जगत के प्रमुख नेताओं ने एकस्वर से यह राय जताई है।
मुख्य घटनाक्रम
जनवरी 2026 से भारत में अमेरिकी राजदूत के पद पर कार्यरत गोर, दक्षिण और मध्य एशिया मामलों के लिए अमेरिका के विशेष दूत की जिम्मेदारी भी संभाल रहे हैं। भारत आने से पूर्व वे ट्रंप प्रशासन में व्हाइट हाउस प्रेसिडेंशियल पर्सनल ऑफिस के निदेशक के रूप में कार्यरत थे। अपने कार्यकाल में उन्होंने व्यापार वार्ताओं, रक्षा सहयोग, महत्वपूर्ण खनिजों (क्रिटिकल मिनरल्स) से जुड़ी साझेदारी और विदेश मंत्री मार्को रुबियो की हालिया भारत यात्रा को सफलतापूर्वक आगे बढ़ाने में केंद्रीय भूमिका निभाई।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं
जनरल एटॉमिक्स ग्लोबल कॉर्पोरेशन के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. विवेक लाल ने गोर को 'अमेरिका के लिए एक बेहद शानदार राजदूत' करार दिया। उन्होंने कहा, "वह सच में इस रिश्ते को आगे बढ़ाने वाले मुख्य व्यक्ति हैं।" लाल के अनुसार, नई दिल्ली में गोर की उपस्थिति से दोनों देशों के संबंधों में 'बड़ा बदलाव' आया है।
लाल ने यह भी कहा, "मुझे लगता है कि राष्ट्रपति ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच बहुत अच्छा और मजबूत रिश्ता है।"
यूएस इंडिया स्ट्रेटेजिक एंड पार्टनरशिप फोरम (USISPF) के अध्यक्ष एवं सीईओ मुकेश अघी ने कहा कि गोर ने द्विपक्षीय संबंधों को तीव्र गति और स्पष्ट दिशा दी है। उन्होंने कहा, "सिर्फ छह महीने में ही राजदूत गोर ने बहुत तेजी से काम शुरू किया है। उनके पहले 100 दिनों में जबरदस्त ऊर्जा और लगातार जुड़ाव देखने को मिला, और उनका फोकस साफ तौर पर नतीजे देने पर रहा है।"
प्रमुख पहलों में गोर की भूमिका
अघी के अनुसार, गोर ने पद संभालने के पहले महीने के भीतर ही व्यापार समझौते के प्रारंभिक चरणों को आगे बढ़ाने में सहयोग किया। उन्होंने भारत-अमेरिका संबंधों को वॉशिंगटन की वैश्विक रणनीति का अभिन्न अंग बताया। इसके अलावा, गोर ने रक्षा सहयोग को सुदृढ़ करने, 'पैक्स सिलिका' में भारत की भागीदारी को समर्थन देने और क्रिटिकल मिनरल्स में साझेदारी विस्तार में भी निर्णायक भूमिका निभाई। अघी ने कहा, "ये सब दिखाता है कि राजदूत गोर इस साझेदारी को लेकर कितने उत्साहित और गंभीर हैं।"
रणनीतिक परिप्रेक्ष्य
हडसन इंस्टीट्यूट में वरिष्ठ फेलो अपर्णा पांडे ने कहा कि गोर ने सार्वजनिक स्तर पर इस संबंध को अधिक प्रमुखता दी है। उन्होंने कहा, "राजदूत गोर ने इस रिश्ते में नया जोश लाया है और इसे लोगों के बीच ज्यादा प्रमुख बनाया है, जो अच्छी बात है।" उन्होंने यह भी जोड़ा कि यदि गोर इस साझेदारी के रणनीतिक पहलू को और मजबूत कर सकें, तो यह और भी बेहतर होगा।
गौरतलब है कि पिछले कुछ वर्षों में भारत और अमेरिका के बीच रक्षा, महत्वपूर्ण तकनीकों, सेमीकंडक्टर और आपूर्ति श्रृंखला (सप्लाई चेन) को सुदृढ़ करने जैसे क्षेत्रों में सहयोग तेजी से बढ़ा है। वॉशिंगटन भारत को इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में एक अहम रणनीतिक साझेदार के रूप में देख रहा है, और गोर की सक्रिय भूमिका इसी दृष्टिकोण का व्यावहारिक विस्तार मानी जा रही है।
आगे की राह
भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर बातचीत जारी है और दोनों देशों के बीच क्रिटिकल मिनरल्स, सेमीकंडक्टर और रक्षा तकनीक के क्षेत्र में सहयोग के नए अध्याय खुलने की संभावना है। विश्लेषकों का मानना है कि राजदूत गोर की ऊर्जावान कूटनीति आने वाले महीनों में इस साझेदारी को और गहरा करने में निर्णायक साबित हो सकती है।