गौतम अदाणी के खिलाफ अमेरिकी केस पूरी तरह बंद, कानूनी विशेषज्ञों ने बताया 'गेम-चेंजर'
सारांश
मुख्य बातें
अदाणी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अदाणी के खिलाफ अमेरिकी अदालत द्वारा मामला खारिज किए जाने के बाद 11 अगस्त को कानूनी विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया कि यह कार्यवाही अब पूरी तरह समाप्त हो चुकी है और अमेरिका समेत दुनिया भर में उनके कारोबार पर लगी कानूनी अड़चनें भी दूर हो गई हैं। विशेषज्ञों के अनुसार इन्हीं तथ्यों के आधार पर यह मामला दोबारा नहीं खोला जा सकता।
मामला बंद होने का कानूनी अर्थ
करंजावाला एंड कंपनी के मैनेजिंग पार्टनर और सीनियर एडवोकेट रायन करंजावाला ने कहा कि गौतम अदाणी के लिए यह केस पूरी तरह बंद हो गया है। उन्होंने कहा, 'इसे उनके खिलाफ दोबारा शुरू नहीं किया जा सकता और अब वे बिना किसी रुकावट के अमेरिका समेत दुनिया के किसी भी देश में कारोबार करने के लिए आज़ाद हैं। उनके खिलाफ अब कोई भी मामला खुला नहीं है।'
करंजावाला ने यह भी कहा कि उन्होंने पहले ही अनुमान लगाया था कि अमेरिकी न्याय विभाग (डीओजे) को केस वापस लेने की अनुमति मिल जाएगी। उनके अनुसार, 'आखिरकार, हुआ भी यही — जज ने इजाजत दे दी। इन तथ्यों के आधार पर यह केस कभी भी दोबारा शुरू नहीं किया जा सकता।'
विशेषज्ञों की राय: 'गेम-चेंजर' फैसला
सीनियर एडवोकेट और सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष विकास सिंह ने इस आदेश को अत्यंत महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा, 'मेरी समझ से यह गेम-चेंजर है, क्योंकि डिपार्टमेंट ऑफ जस्टिस ने यह महसूस करने के बाद इसे वापस लिया है कि यह मामला पहले कभी शुरू ही नहीं किया जाना चाहिए था।' हालाँकि उन्होंने यह भी कहा कि सरकार को केस बंद करने की माँग करने से पहले जाँच एजेंसियों या अभियोजन पक्ष से सलाह लेनी चाहिए थी।
सीनियर एडवोकेट विकास पाहवा ने इस आदेश को वैश्विक स्तर पर कार्यरत किसी भी कंपनी के लिए बेहद अहम करार दिया।
भारत में कारोबार पर असर
मार्केट एनालिस्ट अरुण केजरीवाल ने कहा कि अमेरिकी कानूनी कार्यवाही के दौरान भी भारत में अदाणी ग्रुप के इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट और कारोबारी विस्तार जारी रहा, इसलिए घरेलू परिचालन पर इस मामले का असर सीमित रहा। उन्होंने कहा, 'मेरा मानना है कि यह गौतम अदाणी के लिए एक बड़ी जीत है।'
केजरीवाल के अनुसार, किसी भी न्यायिक साक्ष्य का अभाव बाज़ार सहभागियों की नज़र में अदाणी को 'क्लीन चिट' के समान है।
आगे क्या
यह ऐसे समय में आया है जब अदाणी ग्रुप कई देशों में बड़े निवेश की योजनाओं पर काम कर रहा है। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि मामले के पूर्ण समापन से अंतरराष्ट्रीय साझेदारियों और वित्तपोषण की राह और आसान होगी। गौरतलब है कि मामले के दौरान कुछ वैश्विक निवेशकों ने सतर्कता बरती थी, जो अब कम होने की उम्मीद है।