6 जुलाई 2026
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अदाणी केस पर अमेरिकी न्याय विभाग का बड़ा पलटवार: 'यह मुकदमा शुरू ही नहीं होना चाहिए था'

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अदाणी केस पर अमेरिकी न्याय विभाग का बड़ा पलटवार: 'यह मुकदमा शुरू ही नहीं होना चाहिए था'

सारांश

अमेरिकी न्याय विभाग ने गौतम अदाणी के खिलाफ केस वापस लेने से भी आगे जाकर कहा — यह मुकदमा शुरू ही नहीं होना चाहिए था। बाइडन प्रशासन के अंतिम दिनों में दायर आरोप-पत्र को 'नाम खराब करने की कोशिश' बताने वाली यह फाइलिंग अमेरिकी कानूनी इतिहास में एक दुर्लभ आत्म-समीक्षा है।

मुख्य बातें

अमेरिकी न्याय विभाग (DOJ) ने 4 जुलाई 2026 की कोर्ट फाइलिंग में अदाणी ग्रुप के खिलाफ मामले को 'शुरू ही नहीं होना चाहिए था' बताया।
गौतम अदाणी के खिलाफ सिक्योरिटीज आरोपों को DOJ ने 'कभी नहीं लगाए जाने चाहिए थे' कहा।
DOJ ने बाइडन प्रशासन के अंतिम दिनों में आरोप-पत्र सार्वजनिक करने को 'नाम खराब करने की कोशिश' बताया।
विभाग ने माना कि मामले में 'सबूतों से जुड़ी असाधारण मुश्किलें' और 'कई बड़ी खामियां' थीं।
DOJ के अनुसार, कथित गड़बड़ी मुख्यतः भारत में हुई थी और भारतीय अधिकारियों ने पहले ही जांच कर कोई कार्रवाई योग्य गड़बड़ी नहीं पाई थी।
अदालत ने अभी केस खारिज करने की अर्जी पर कोई फैसला नहीं सुनाया है।

अमेरिकी न्याय विभाग (DOJ) ने 4 जुलाई 2026 को एक अभूतपूर्व कोर्ट फाइलिंग में अदाणी ग्रुप के खिलाफ दायर आपराधिक मामले को न केवल वापस लेने की अपील की, बल्कि यह भी स्पष्ट किया कि उसके अनुसार यह केस शुरू ही नहीं किया जाना चाहिए थाअदाणी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अदाणी के खिलाफ लगाए गए सिक्योरिटीज से जुड़े आरोपों को विभाग ने 'कभी नहीं लगाए जाने चाहिए थे' बताया। यह पुनर्मूल्यांकन लगभग दो वर्षों की कड़ी अंतरराष्ट्रीय जांच के बाद आया है।

मुख्य घटनाक्रम

DOJ की 4 जुलाई की फाइलिंग में केस के कानूनी आधार, अधिकार क्षेत्र और साक्ष्यों पर एक साथ कई गंभीर सवाल उठाए गए हैं। विभाग ने बाइडन प्रशासन के कार्यकाल के अंतिम दिनों में आरोप-पत्र सार्वजनिक करने की आलोचना करते हुए इसे 'नाम खराब करने' की एक ऐसी कोशिश बताया, जिसे 'मुकदमा चलने की किसी भी वास्तविक संभावना के बिना' अंजाम दिया गया था।

गौरतलब है कि यह वही संस्था है जिसने मूल आरोप-पत्र दाखिल किया था — और अब उसी का यह असामान्य सार्वजनिक पुनर्मूल्यांकन अपने आप में एक अभूतपूर्व घटना है।

अधिकार क्षेत्र पर DOJ का रुख

फाइलिंग के अनुसार, इस मामले में कथित गड़बड़ी मुख्य रूप से भारत में ही हुई थी — इसमें भारतीय नागरिक, भारतीय सरकारी अधिकारी, भारतीय अनुबंध और भारत में बिजली की आपूर्ति शामिल थी। विभाग ने यह भी बताया कि भारतीय अधिकारियों ने कई आरोपों की जांच कर ली थी और कोई ऐसी गड़बड़ी नहीं पाई थी, जिस पर कार्रवाई की जा सके।

DOJ का निष्कर्ष था कि जिस अधिकार क्षेत्र की इस मामले में सबसे अधिक दिलचस्पी थी, उसने पहले ही इन मुद्दों की जांच कर ली थी — जो अमेरिकी अभियोजन के औचित्य पर सीधा सवाल है।

बाज़ार और निवेशकों पर असर

DOJ ने फाइलिंग में कानूनी आरोपों और बाज़ार पर पड़े असर के बीच स्पष्ट अंतर रेखांकित किया। विभाग के अनुसार, 'जिन सिक्योरिटीज का मामला है, उनमें एक पैसा भी नहीं डूबा है' — या तो नोट्स का पूरा भुगतान हो चुका है या वे अभी भी सही ढंग से काम कर रहे हैं।

फिर भी, इस आरोप-पत्र के परिणाम कोर्टरूम से कहीं आगे तक गए। लगभग दो वर्षों तक इस मामले ने निवेशकों की धारणा को प्रभावित किया, बाज़ार में अरबों की वैल्यू समाप्त की और लाखों रिटेल शेयरधारकों को प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित किया।

विभाग की अपनी कमज़ोरियों की स्वीकृति

DOJ ने असामान्य रूप से खुलकर स्वीकार किया कि मामले में 'सबूतों से जुड़ी असाधारण मुश्किलें' थीं और 'कई बड़ी खामियां' थीं। विभाग ने कहा कि उसे 'मामले के गुण-दोष के आधार पर संभावित हार का सामना करने से पहले ही इन आपराधिक सिक्योरिटीज आरोपों को खत्म करने का श्रेय' मिलना चाहिए।

यह स्वीकृति अत्यंत दुर्लभ है — बहुत कम सरकारी वकील सार्वजनिक रूप से यह मानते हैं कि उनके प्रमुख कॉर्पोरेट मुकदमों में से किसी के विफल होने की संभावना थी।

निवेश प्रभाव के आरोपों पर DOJ का खंडन

DOJ ने यह भी स्पष्ट किया कि वह उन सुझावों को खारिज करता है, जिनके अनुसार उसका फैसला अमेरिका में होने वाले संभावित निवेश से प्रभावित था। विभाग के अनुसार, यह फैसला अभियोजकों और बचाव पक्ष के वकीलों की दलीलों की गहन समीक्षा के बाद लिया गया और भविष्य के निवेश पर किसी भी चर्चा से पहले ही इस पर सहमति बन गई थी।

विभाग ने अपने फैसले के कारणों को समझने के लिए गुमनाम मीडिया रिपोर्टों पर भरोसा न करने की सलाह भी दी। अदालत ने अभी तक केस खारिज करने की अर्जी पर कोई फैसला नहीं सुनाया है — लेकिन यह पुनर्मूल्यांकन मामले की समझ को उतना ही प्रभावित करेगा जितना कि मूल आरोप-पत्र ने किया था।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो आरोप-पत्र दाखिल करते समय यह समीक्षा क्यों नहीं हुई? DOJ का यह स्वीकार करना कि वह मुकदमे में 'संभावित हार' का सामना कर रहा था, अमेरिकी अभियोजन की आंतरिक प्रक्रियाओं पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है। साथ ही, यह उन अंतरराष्ट्रीय मीडिया संस्थानों के लिए भी एक आईना है जिन्होंने आरोप-पत्र को ही अंतिम सत्य मान लिया था।
RashtraPress
6 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अमेरिकी न्याय विभाग ने अदाणी केस के बारे में क्या कहा?
DOJ ने 4 जुलाई 2026 की कोर्ट फाइलिंग में कहा कि अदाणी ग्रुप के खिलाफ सिक्योरिटीज से जुड़े आपराधिक आरोप 'कभी नहीं लगाए जाने चाहिए थे' और यह केस 'शुरू ही नहीं किया जाना चाहिए था'। विभाग ने मामले के कानूनी आधार, अधिकार क्षेत्र और साक्ष्यों पर गंभीर सवाल उठाए।
DOJ ने अदाणी केस वापस लेने का फैसला क्यों किया?
DOJ के अनुसार, मामले में कई कानूनी, साक्ष्य-संबंधी और नीतिगत कारण थे — जिनमें अधिकार क्षेत्र की खामियां, 'सबूतों से जुड़ी असाधारण मुश्किलें' और यह तथ्य शामिल हैं कि भारतीय अधिकारी पहले ही जांच कर चुके थे और कोई कार्रवाई योग्य गड़बड़ी नहीं पाई थी।
क्या अदाणी केस पूरी तरह खारिज हो गया है?
अभी तक नहीं। DOJ ने केस खारिज करने की अर्जी दाखिल की है, लेकिन अदालत ने अभी तक इस पर कोई अंतिम फैसला नहीं सुनाया है। फाइलिंग न्यायिक निष्कर्षों के बजाय DOJ का पक्ष प्रस्तुत करती है।
क्या यह फैसला अमेरिकी निवेश की उम्मीद से प्रभावित था?
DOJ ने स्पष्ट रूप से इन सुझावों को खारिज किया। विभाग के अनुसार, यह फैसला अभियोजकों और बचाव पक्ष की दलीलों की गहन समीक्षा के बाद लिया गया और भविष्य के निवेश पर किसी भी चर्चा से पहले ही इस पर सहमति बन गई थी।
इस मामले का अदाणी ग्रुप और निवेशकों पर क्या असर पड़ा?
लगभग दो वर्षों तक इस आरोप-पत्र ने निवेशकों की धारणा को प्रभावित किया, बाज़ार में अरबों की वैल्यू समाप्त की और लाखों रिटेल शेयरधारकों को प्रभावित किया। हालांकि DOJ ने स्पष्ट किया कि संबंधित सिक्योरिटीज में 'एक पैसा भी नहीं डूबा' — या तो नोट्स का पूरा भुगतान हो चुका है या वे सही ढंग से काम कर रहे हैं।
राष्ट्र प्रेस
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