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अदाणी मामला बंद: डेमोक्रेट अजय जैन बोले — अभियोजकों के पास पर्याप्त सबूत नहीं थे

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अदाणी मामला बंद: डेमोक्रेट अजय जैन बोले — अभियोजकों के पास पर्याप्त सबूत नहीं थे

सारांश

अमेरिकी न्याय विभाग और SEC ने अदाणी समूह के खिलाफ सभी मामले बंद कर दिए — अभियोजकों ने माना कि पर्याप्त सबूत नहीं थे। डेमोक्रेट से लेकर रिपब्लिकन तक, अमेरिका के दोनों खेमों के करीबी लोगों ने इस फैसले को भारत-अमेरिका संबंधों के लिए सकारात्मक बताया।

मुख्य बातें

अमेरिकी न्याय विभाग ने गौतम अदाणी और सागर अदाणी के खिलाफ आपराधिक मुकदमे वापस लिए; SEC के मामले भी बंद।
मामला 'भेदभाव के साथ' (dismissal with prejudice) खारिज — यानी इन्हीं आरोपों पर दोबारा मुकदमा संभव नहीं।
डेमोक्रेट नेता अजय जैन भूतोरिया ने कहा — अभियोजकों के पास केस जारी रखने के लिए पर्याप्त सबूत नहीं थे।
मुकेश अघी (अमेरिका-भारत रणनीतिक साझेदारी फोरम) ने कहा — रिश्वत का कोई सबूत नहीं था, केवल अंदाजे थे।
फैसले से अदाणी समूह को अंतरराष्ट्रीय पूँजी तक पहुँच और भारत-अमेरिका साझेदारी को नई गति मिलने की उम्मीद।

अमेरिकी न्याय विभाग ने गौतम अदाणी और सागर अदाणी के खिलाफ दायर आपराधिक मुकदमे वापस ले लिए हैं और आपराधिक आरोप हटाने की माँग की है। इसके साथ ही अमेरिकी प्रतिभूति एवं विनिमय आयोग (SEC) द्वारा अदाणी समूह के खिलाफ चलाए जा रहे मामले भी बंद कर दिए गए हैं। इस घटनाक्रम पर अमेरिका की वर्तमान और पूर्व सरकारों से जुड़े कई प्रमुख व्यक्तियों ने सकारात्मक प्रतिक्रिया व्यक्त की है।

अजय जैन भूतोरिया की प्रतिक्रिया

पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन के व्हाइट हाउस में सलाहकार की भूमिका निभा चुके डेमोक्रेट नेता अजय जैन भूतोरिया ने इस फैसले पर कहा, "मैं यह नहीं कह सकता कि यह केस राजनीति से प्रेरित था या नहीं, क्योंकि यह एक न्यायिक मामला था जो कोर्ट के सामने लाया गया था। लेकिन प्रॉसिक्यूटर अपने आरोपों को साबित नहीं कर पाए और उनके पास केस जारी रखने के लिए पर्याप्त सबूत नहीं थे।" उनकी यह टिप्पणी इस मायने में उल्लेखनीय है कि वे विपक्षी डेमोक्रेटिक पार्टी से ताल्लुक रखते हैं, फिर भी उन्होंने न्याय विभाग के निर्णय को तथ्यात्मक आधार पर उचित ठहराया।

BJP USA और अन्य संगठनों की राय

BJP USA के अध्यक्ष अडापा प्रसाद ने अमेरिकी न्याय विभाग, SEC और अमेरिकी वित्त विभाग के विदेशी संपत्ति नियंत्रण कार्यालय (OFAC) — तीनों के फैसले की सराहना की। उन्होंने कहा, "अमेरिकी अभियोजक ने कहा कि उनके पास सबूत नहीं हैं और केस 'भेदभाव के साथ' वापस ले लिया गया है। यह 'भेदभाव के साथ' ध्यान देने वाली बात है। आज सच में जश्न मनाने और 'सत्यमेव जयते' कहने का दिन है।"

गौरतलब है कि अमेरिकी कानूनी प्रक्रिया में 'डिसमिसल विद प्रेजुडिस' का अर्थ होता है कि उन्हीं आरोपों पर दोबारा मुकदमा नहीं चलाया जा सकता — यह महज़ अस्थायी राहत नहीं, बल्कि स्थायी समापन है।

अमेरिका-भारत संबंधों पर असर

अमेरिका-भारत रणनीतिक साझेदारी फोरम के अध्यक्ष एवं सीईओ मुकेश अघी ने कहा कि भारत और अमेरिका के बीच भू-राजनीतिक और आर्थिक संबंध अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने कहा, "न्याय विभाग का असल में चार्ज हटाना हर तरह से एक बहुत सकारात्मक मैसेज देता है कि संबंध जरूरी है और हमें आगे बढ़ने की जरूरत है। रिश्वत का कोई सबूत नहीं था — कुछ अंदाजे लगाए गए थे और जब तक आपके पास असली सबूत न हों, आप अंदाजों पर आगे नहीं बढ़ सकते।" उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि मामले के सेटल होने से अदाणी समूह को अंतरराष्ट्रीय पूँजी तक पहुँच आसान होगी।

फाउंडेशन फॉर इंडिया एंड इंडियन डायस्पोरा स्टडीज के संस्थापक निदेशक खंडेराव कंद ने कहा कि भारत-अमेरिका के बीच आर्थिक सहयोग को अब निवेश से आगे बढ़कर रिसर्च, मोबिलिटी और नीतिगत सुधारों में गहरा करना चाहिए। उन्होंने इस फैसले को "अच्छा कदम" बताते हुए कहा कि इससे दोनों देशों की साझेदारी और मजबूत होगी।

ट्रंप खेमे की प्रतिक्रिया

रिपब्लिकन नेता और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पहले कार्यकाल में अभियान सलाहकार रहे पुनीत अहलूवालिया ने कहा कि अदाणी समूह के प्रस्तावित निवेश अमेरिकी अर्थव्यवस्था में भारतीय व्यवसायियों के बढ़ते योगदान को दर्शाते हैं। उन्होंने कहा, "मुझे लगता है कि यह एक बहुत ही सकारात्मक कदम है। अमेरिका में अदाणी ग्रुप का कोई होने से हमें और भी ज्यादा मदद मिलती है।"

आगे क्या

यह ऐसे समय में आया है जब भारत और अमेरिका के बीच व्यापार और निवेश संबंध नई ऊँचाइयों की ओर बढ़ रहे हैं। मामले के औपचारिक रूप से बंद होने के बाद अदाणी समूह के लिए वैश्विक वित्तीय बाज़ारों में पुनः सक्रिय होने का रास्ता खुल सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह घटनाक्रम भारतीय कॉर्पोरेट जगत के लिए एक व्यापक संकेत भी है कि अंतरराष्ट्रीय कानूनी प्रक्रियाओं में साक्ष्य-आधारित मानक सर्वोपरि रहते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह सवाल बना रहेगा कि इतने हाई-प्रोफाइल आरोप साक्ष्य की मज़बूत बुनियाद के बिना क्यों दायर किए गए। 'डिसमिसल विद प्रेजुडिस' महज़ राहत नहीं — यह अभियोजन पक्ष की विफलता का स्वीकारोक्ति है। यह ऐसे समय में आया है जब भारत-अमेरिका व्यापार वार्ताएँ निर्णायक दौर में हैं, जिससे भू-राजनीतिक संदर्भ को नज़रअंदाज़ करना कठिन है। मुख्यधारा की कवरेज जो अक्सर चूकती है, वह यह है कि अंतरराष्ट्रीय कॉर्पोरेट मामलों में 'सबूत न होना' और 'निर्दोष होना' — दोनों एक नहीं होते; पारदर्शिता की माँग दोनों पक्षों से जायज़ है।
RashtraPress
7 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अमेरिका में अदाणी समूह के खिलाफ क्या मामले थे और उन्हें क्यों बंद किया गया?
अमेरिकी न्याय विभाग ने गौतम अदाणी और सागर अदाणी के खिलाफ आपराधिक मुकदमे दायर किए थे, और SEC ने भी अलग से मामले चलाए थे। अभियोजकों ने स्वयं माना कि उनके पास केस जारी रखने के लिए पर्याप्त सबूत नहीं थे, जिसके बाद सभी मामले वापस ले लिए गए।
'डिसमिसल विद प्रेजुडिस' का क्या अर्थ है?
अमेरिकी कानून में 'डिसमिसल विद प्रेजुडिस' का अर्थ है कि उन्हीं आरोपों पर भविष्य में दोबारा मुकदमा नहीं चलाया जा सकता। यह अस्थायी राहत नहीं, बल्कि मामले का स्थायी और अंतिम समापन होता है।
डेमोक्रेट अजय जैन भूतोरिया कौन हैं और उन्होंने क्या कहा?
अजय जैन भूतोरिया पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन के व्हाइट हाउस में सलाहकार की भूमिका निभा चुके हैं। उन्होंने कहा कि अभियोजक अपने आरोप साबित नहीं कर पाए और उनके पास केस जारी रखने के लिए पर्याप्त सबूत नहीं थे।
इस फैसले से भारत-अमेरिका संबंधों पर क्या असर पड़ेगा?
अमेरिका-भारत रणनीतिक साझेदारी फोरम के सीईओ मुकेश अघी के अनुसार, यह फैसला एक सकारात्मक संदेश देता है कि दोनों देशों के बीच संबंध प्राथमिकता हैं। इससे अदाणी समूह को अंतरराष्ट्रीय पूँजी बाज़ारों तक पहुँच आसान होने की उम्मीद है।
क्या अदाणी समूह के खिलाफ अमेरिका में कोई मामला अब भी बाकी है?
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, न्याय विभाग, SEC और OFAC — तीनों ने अदाणी समूह के खिलाफ अपने-अपने मामले वापस ले लिए हैं। फिलहाल किसी सक्रिय अमेरिकी संघीय मामले की जानकारी सामने नहीं आई है।
राष्ट्र प्रेस
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