गौतम अदाणी बोले — अमेरिकी कानूनी विवाद पीछे छूटे, अब इंफ्रास्ट्रक्चर और AI पर दांव
सारांश
मुख्य बातें
अदाणी ग्रुप के संस्थापक और चेयरमैन गौतम अदाणी ने 31 मई 2026 को स्पष्ट किया कि अमेरिका में समूह से जुड़े कानूनी मामलों का अध्याय अब बंद हो चुका है और समूह पूरी ऊर्जा के साथ अपने अगले विकास चरण पर केंद्रित है। उन्होंने कहा कि इस बदलाव ने समूह को नए आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने का अवसर दिया है।
मुख्य घोषणाएँ और रणनीति
अदाणी ने समूह की आगामी रणनीति को दो प्रमुख स्तंभों पर आधारित बताया — इंफ्रास्ट्रक्चर और इंटेलिजेंस। उनके अनुसार, ऊर्जा, परिवहन, लॉजिस्टिक्स और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश को तेज़ करना अब प्राथमिकता है। उन्होंने कहा, "एआई के सोचने से पहले ऊर्जा का प्रवाह होना जरूरी है।"
उनका यह भी कहना था कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के तेज़ी से बढ़ते उपयोग के कारण बिजली उत्पादन, ट्रांसमिशन नेटवर्क, डेटा सेंटर और लॉजिस्टिक्स इंफ्रास्ट्रक्चर में बड़े पैमाने पर निवेश अनिवार्य हो जाएगा।
चुनौतियों के बीच समूह का प्रदर्शन
गौतम अदाणी ने स्वीकार किया कि यह प्रगति आसान परिस्थितियों में नहीं हुई। बंदरगाह से लेकर ऊर्जा क्षेत्र तक फैले समूह को असाधारण जाँच-पड़ताल और चुनौतियों का सामना करना पड़ा। उन्होंने कहा, "लेकिन हम झुके नहीं और न ही रुके।"
उन्होंने आगे कहा, "हमारी पहचान हमारे आसपास के शोर से नहीं, बल्कि हमारी प्रतिक्रिया की ताकत से होती है। हमारी पहचान चुनौतियों की तीव्रता से नहीं, बल्कि हमारे उद्देश्य की स्पष्टता से होती है। आलोचनाओं से नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण के उस विश्वास से होती है, जिस पर हम लगातार काम कर रहे हैं।"
राइट्स इश्यू और निवेशकों का भरोसा
अदाणी ने प्रमुख कंपनी अदाणी इंटरप्राइजेज के ₹24,930 करोड़ के राइट्स इश्यू को निवेशकों के भरोसे का प्रतीक बताया। उल्लेखनीय है कि यह इश्यू उस दौर में आया जब समूह कॉरपोरेट गवर्नेंस और नियामकीय सवालों से घिरा हुआ था — और इसके बावजूद निवेशकों की प्रतिक्रिया सकारात्मक रही।
वित्तीय प्रदर्शन
वित्त वर्ष 2025-26 में अदाणी समूह की कंपनियों का संयुक्त राजस्व ₹2.92 लाख करोड़ रहा, जो पिछले वर्ष की तुलना में 7.4% अधिक है। समूह का कर पश्चात लाभ 13.9% बढ़कर ₹46,377 करोड़ पर पहुँच गया — जो विपरीत परिस्थितियों में भी समूह की वित्तीय मज़बूती को दर्शाता है।
आगे की राह
गौतम अदाणी ने कहा कि समूह के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती पूंजी जुटाना नहीं, बल्कि भारत की बढ़ती बुनियादी ढाँचा और ऊर्जा ज़रूरतों को पूरा करने के लिए परियोजनाओं को तेज़ी से लागू करना है। यह ऐसे समय में आया है जब भारत में डेटा सेंटर और नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में वैश्विक निवेश की होड़ तेज़ हो रही है। समूह ने संकेत दिया है कि आने वाले वर्षों में इन दोनों क्षेत्रों में उसकी उपस्थिति और विस्तार पाएगी।