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अदाणी मामले में जज का आदेश सामान्य प्रक्रिया: अमेरिकी-भारतीय कानून विशेषज्ञों की राय

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अदाणी मामले में जज का आदेश सामान्य प्रक्रिया: अमेरिकी-भारतीय कानून विशेषज्ञों की राय

सारांश

अमेरिकी फेडरल जज का अदाणी मामले में स्पष्टीकरण माँगना कोई असाधारण कदम नहीं — बल्कि यह न्यायिक प्रक्रिया का स्वाभाविक हिस्सा है। कोलंबिया लॉ से लेकर हरीश साल्वे तक, सभी विशेषज्ञ एकमत हैं कि अभियोजन संबंधी विवेकाधिकार कार्यपालिका का अधिकार है — और आरोप अंततः रद्द होंगे।

मुख्य बातें

अमेरिकी फेडरल जज निकोलस गैराफिस ने जस्टिस डिपार्टमेंट से गौतम अदाणी के खिलाफ आरोप हटाने की अर्जी पर विस्तृत कारण माँगे हैं।
कोलंबिया लॉ स्कूल के प्रोफेसर जॉन सी.
कॉफी के अनुसार, कोर्ट अभियोजन संबंधी निर्णय को पलट नहीं सकती — यह अधिकार कार्यपालिका का है।
पूर्व अटॉर्नी बारबरा मैकक्वेड ने कहा कि जज 'विद प्रीज्यूडिस' या 'विदाउट प्रीज्यूडिस' खारिज करने का विकल्प चुन सकते हैं।
पूर्व सॉलिसिटर जनरल हरीश साल्वे ने आदेश को सामान्य प्रक्रिया बताया और लंबी कानूनी लड़ाई की अटकलों को खारिज किया।
पूर्व फेडरल प्रॉसिक्यूटर पॉल रोसेनजवेग के अनुसार, दीर्घकाल में केस खारिज होने की संभावना प्रबल है।
जस्टिस डिपार्टमेंट को 13 जुलाई तक विस्तृत स्पष्टीकरण देना है; अक्टूबर 2024 में लगे आरोपों को सभी आरोपियों ने नकारा है।

अमेरिकी फेडरल जज निकोलस गैराफिस द्वारा जस्टिस डिपार्टमेंट से उद्योगपति गौतम अदाणी के खिलाफ आपराधिक आरोप हटाने की अर्जी पर विस्तृत स्पष्टीकरण माँगना एक सामान्य न्यायिक प्रक्रिया का हिस्सा है — और इससे आरोपों के अंततः रद्द होने की संभावना पर कोई उल्लेखनीय असर नहीं पड़ेगा। अमेरिकी और भारतीय कानून विशेषज्ञों ने यह मत व्यक्त किया है।

विशेषज्ञों का आकलन

कोलंबिया लॉ स्कूल में एडॉल्फ ए. बर्ले प्रोफेसर और सिक्योरिटीज लॉ के प्रमुख अमेरिकी विशेषज्ञ जॉन सी. कॉफी ने कहा कि जज गैराफिस अभियोजकों से उनके निर्णय का औचित्य माँग सकते हैं, लेकिन वे कार्यपालिका शाखा के फैसले की जगह अदालती आदेश नहीं थोप सकते। कॉफी ने कहा, "सामान्यतः, हमारे संविधान के तहत, अभियोजन संबंधी विवेकाधिकार को एक कार्यकारी शक्ति के रूप में देखा जाता है, जो अंततः राष्ट्रपति के पास होती है, क्योंकि वह कार्यपालिका शाखा के प्रमुख हैं।"

उन्होंने आगे स्पष्ट किया, "हालांकि कोर्ट वजह पूछ सकती है, लेकिन वह प्रॉसिक्यूटर के फैसले को पलट नहीं सकती, क्योंकि हमारे संविधान के तहत शक्तियों के बंटवारे के अनुसार यह फैसला लेने का अधिकार कार्यपालिका के पास है। कोर्ट का यह फैसला असामान्य है और इसे इतना नहीं बढ़ाया जा सकता कि कोर्ट प्रॉसिक्यूटर के केस खत्म करने के फैसले की गहराई से समीक्षा कर सके।"

जज के आदेश की पृष्ठभूमि

जज गैराफिस ने जस्टिस डिपार्टमेंट को निर्देश दिया था कि वह अदाणी और सात अन्य आरोपियों के खिलाफ लगे आरोपों को 'हमेशा के लिए' खत्म करने की अपील के लिए विस्तृत कारण और सहायक तथ्य पेश करे। पाँच पेज के इस आदेश में जज ने कहा कि सरकार की संक्षिप्त अर्जी में इतनी जानकारी नहीं थी कि कोर्ट 'फेडरल रूल्स ऑफ क्रिमिनल प्रोसीजर' के नियम 48(ए) के तहत अपनी जिम्मेदारियाँ निभा सके।

गौरतलब है कि जस्टिस डिपार्टमेंट ने अपनी अर्जी में केवल इतना कहा था कि उसने मामले की समीक्षा की है और अपने अभियोजन संबंधी अधिकार का इस्तेमाल करते हुए यह फैसला किया है कि आपराधिक आरोपों को आगे बढ़ाने में और संसाधन नहीं लगाए जाएंगे।

अमेरिकी कानूनी दृष्टिकोण

अमेरिका की पूर्व अटॉर्नी बारबरा मैकक्वेड ने माना कि जज की यह माँग असामान्य थी, लेकिन न्यायिक प्रक्रिया की निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए यह कोर्ट के अधिकार क्षेत्र में थी। उन्होंने कहा, "अकसर ऐसा होता है कि जो सरकारी पक्ष केस लाता है, अगर वह उसे खारिज करना चाहता है, तो आमतौर पर बिना किसी जाँच-पड़ताल के उसे मंजूरी दे दी जाती है।"

मैकक्वेड ने यह भी स्पष्ट किया कि जज के पास कुछ सीमित प्रक्रियात्मक अधिकार होते हैं। उनके अनुसार, "जज किसी को केस आगे बढ़ाने के लिए मजबूर नहीं कर सकते, लेकिन वे यह तय कर सकते हैं कि केस को 'विद प्रीज्यूडिस' (दोबारा आरोप लगाने की मनाही के साथ) या 'विदाउट प्रीज्यूडिस' (दोबारा आरोप लगाने की गुंजाइश के साथ) खारिज किया जाए।"

भारतीय विशेषज्ञ की राय

जाने-माने सीनियर वकील और पूर्व सॉलिसिटर जनरल हरीश साल्वे ने जज के आदेश को जस्टिस डिपार्टमेंट के फैसले के खिलाफ कोई बड़ी चुनौती नहीं, बल्कि एक सामान्य प्रक्रिया करार दिया। साल्वे ने कहा, "दुनिया की हर अदालत में, जब भी कोई केस दायर किया जाता है, तो वह केस अदालत की संपत्ति बन जाता है।"

उन्होंने आगे कहा, "इस कारण, जब आप अदालत से केस खत्म करने के लिए कहते हैं, तो वे पूछते हैं, 'क्यों?' फिर सरकार अपनी वजहें बताती है... तो यह एक आम बात है और इसमें कुछ और सोचने की जरूरत नहीं है।" साल्वे ने उन अटकलों को भी खारिज किया जिनमें कहा जा रहा था कि इस आदेश से लंबी कानूनी लड़ाई शुरू हो सकती है। उन्होंने कहा, "अपील की कोई जरूरत नहीं है। यह प्रक्रिया से जुड़ा एक छोटा सा आदेश है। अदाणी ग्रुप का इससे कोई लेना-देना नहीं है।"

मामले का संक्षिप्त इतिहास और आगे की राह

अक्टूबर 2024 में न्यूयॉर्क के ईस्टर्न डिस्ट्रिक्ट में एक फेडरल ग्रैंड जूरी द्वारा जारी आरोप-पत्र में, अदाणी ग्रुप के वरिष्ठ अधिकारियों और छह अन्य लोगों पर भारत में सोलर एनर्जी प्रोजेक्ट्स से जुड़े कथित रिश्वत, सिक्योरिटीज फ्रॉड और न्याय में बाधा डालने की साजिश के आरोप लगाए गए थे। सभी आरोपियों ने किसी भी तरह की गड़बड़ी से इनकार किया है।

पूर्व फेडरल प्रॉसिक्यूटर और नेशनल सिक्योरिटी लॉयर पॉल रोसेनजवेग ने कहा कि आखिरकार जस्टिस डिपार्टमेंट की ही जीत होने की संभावना है। उन्होंने कहा, "आखिरकार, जिन भी जजों के सामने यह सवाल आया है, उन्होंने यही तय किया है कि उनके पास केस को खारिज करने के डिपार्टमेंट के अनुरोध को ठुकराने का अधिकार नहीं है।" रोसेनजवेग के अनुसार, यदि कोर्ट जस्टिस डिपार्टमेंट की दलील मान लेती है तो कार्यवाही कुछ हफ्तों में पूरी हो सकती है। जज गैराफिस ने जस्टिस डिपार्टमेंट को 13 जुलाई तक विस्तृत स्पष्टीकरण जमा करने का निर्देश दिया है।

संपादकीय दृष्टिकोण

कानूनी वास्तविकता उससे कहीं अधिक सीधी है — अमेरिकी संविधान में अभियोजन का अधिकार स्पष्ट रूप से कार्यपालिका के पास है, और कोई भी जज इसे पलट नहीं सकता। असली सवाल यह नहीं है कि आरोप हटेंगे या नहीं, बल्कि यह है कि 'विद प्रीज्यूडिस' या 'विदाउट प्रीज्यूडिस' की शर्त भविष्य के लिए क्या रास्ता खोलती या बंद करती है। इस विवरण को मुख्यधारा की कवरेज में पर्याप्त जगह नहीं मिल रही, जबकि यही वह बिंदु है जो अदाणी ग्रुप के लिए दीर्घकालिक महत्व रखता है।
RashtraPress
29 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अमेरिकी जज ने अदाणी मामले में जस्टिस डिपार्टमेंट से क्या माँगा है?
जज निकोलस गैराफिस ने जस्टिस डिपार्टमेंट को निर्देश दिया है कि वह गौतम अदाणी और सात अन्य आरोपियों के खिलाफ आरोप 'हमेशा के लिए' हटाने की अपील के लिए 13 जुलाई तक विस्तृत कारण और सहायक तथ्य पेश करे। जज ने कहा कि विभाग की संक्षिप्त अर्जी फेडरल रूल्स ऑफ क्रिमिनल प्रोसीजर के नियम 48(ए) की जरूरतों को पूरा नहीं करती।
क्या जज इस मामले में जस्टिस डिपार्टमेंट की अर्जी ठुकरा सकते हैं?
कानून विशेषज्ञों के अनुसार, जज अभियोजन संबंधी निर्णय को पलट नहीं सकते क्योंकि अमेरिकी संविधान में यह अधिकार कार्यपालिका शाखा के पास है। जज स्पष्टीकरण माँग सकते हैं और 'विद प्रीज्यूडिस' या 'विदाउट प्रीज्यूडिस' खारिज करने का विकल्प चुन सकते हैं, लेकिन विभाग को केस जारी रखने के लिए बाध्य नहीं कर सकते।
हरीश साल्वे ने अदाणी मामले के जज के आदेश पर क्या कहा?
पूर्व सॉलिसिटर जनरल हरीश साल्वे ने इसे सामान्य न्यायिक प्रक्रिया बताया और कहा कि दुनिया की हर अदालत में केस दायर होने के बाद वह अदालत की संपत्ति बन जाता है, इसलिए वापसी पर कारण माँगना स्वाभाविक है। उन्होंने लंबी कानूनी लड़ाई की आशंकाओं को भी खारिज किया।
गौतम अदाणी पर अमेरिका में मूल रूप से क्या आरोप लगे थे?
अक्टूबर 2024 में न्यूयॉर्क के ईस्टर्न डिस्ट्रिक्ट में एक फेडरल ग्रैंड जूरी ने अदाणी ग्रुप के वरिष्ठ अधिकारियों पर भारत में सोलर एनर्जी प्रोजेक्ट्स से जुड़े कथित रिश्वत, सिक्योरिटीज फ्रॉड और न्याय में बाधा डालने की साजिश के आरोप लगाए थे। सभी आरोपियों ने किसी भी गड़बड़ी से इनकार किया है।
अदाणी मामले में आगे क्या होने की संभावना है?
पूर्व फेडरल प्रॉसिक्यूटर पॉल रोसेनजवेग सहित विशेषज्ञों का मानना है कि दीर्घकाल में आरोप खारिज होने की संभावना प्रबल है। यदि कोर्ट जस्टिस डिपार्टमेंट की दलील मान लेती है तो कार्यवाही कुछ हफ्तों में पूरी हो सकती है; हालाँकि यदि जज स्वतंत्र वकील नियुक्त करते हैं तो अधिक समय लग सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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