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'वंदे भारतम्' से छोटे शहरों के स्टार्टअप संस्थापकों को मिल रहा मंच: स्काईरूट सीईओ पवन कुमार चंदना

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'वंदे भारतम्' से छोटे शहरों के स्टार्टअप संस्थापकों को मिल रहा मंच: स्काईरूट सीईओ पवन कुमार चंदना

सारांश

'वंदे भारतम्' सिर्फ एक प्रतियोगिता नहीं — यह भारत के टियर-2 और टियर-3 शहरों की प्रतिभा को मुख्यधारा में लाने की कोशिश है। 26,000 से अधिक आवेदनों और स्पेस से लेकर कृषि तक के विचारों के साथ, यह पहल दिखाती है कि भारत का अगला यूनिकॉर्न किसी महानगर से नहीं, किसी छोटे शहर से भी आ सकता है।

मुख्य बातें

स्काईरूट एयरोस्पेस के सीईओ पवन कुमार चंदना ने 'वंदे भारतम्' में जज की भूमिका निभाई और इसे देश के लिए जरूरी बताया।
गौतम अदाणी की इस पहल को अब तक करीब 26,000 आवेदन मिले हैं — हर राज्य और केंद्र-शासित प्रदेश से।
वैश्विक अंतरिक्ष बाज़ार में भारत की हिस्सेदारी अभी 2% है; चंदना के अनुसार इसे 10% तक ले जाने के लिए बड़ी संख्या में स्पेस स्टार्टअप की ज़रूरत है।
प्रतिभागी स्टार्टअप को वेंचर कैपिटलिस्ट , मेंटर और फंडिंग के प्रस्ताव मिल रहे हैं।
पहल में मोबिलिटी, रक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, मैन्युफैक्चरिंग सहित कई क्षेत्रों के आइडिया शामिल हैं।

स्काईरूट एयरोस्पेस के सह-संस्थापक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी पवन कुमार चंदना ने 13 अगस्त 2026 को अहमदाबाद में कहा कि अदाणी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अदाणी की पहल 'वंदे भारतम्' देश के छोटे शहरों के स्टार्टअप संस्थापकों को एक निर्णायक मंच प्रदान कर रही है। चंदना ने इस कार्यक्रम में जज की भूमिका निभाई और इसे भारत के उद्यमिता परिदृश्य के लिए अत्यावश्यक बताया।

मुख्य घटनाक्रम

मीडिया से बातचीत में चंदना ने कहा कि 'वंदे भारतम्' उन उद्यमियों को एक ऐसा मंच दे रहा है, जहाँ वे अपने विचार प्रस्तुत कर फंडिंग और मेंटरशिप हासिल कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि भारत में बड़ी संख्या में स्टार्टअप स्वदेशी स्तर पर नई तकनीक विकसित कर रहे हैं, और इस तरह की पहलें उन्हें राष्ट्रीय पहचान दिलाने में सहायक हैं।

स्पेस सेक्टर में इनोवेशन की बड़ी संभावनाएँ

चंदना ने विशेष रूप से अंतरिक्ष क्षेत्र पर ध्यान दिलाते हुए कहा कि 'वंदे भारतम्' में बड़ी संख्या में स्पेस स्टार्टअप भाग ले रहे हैं, जो दर्शाता है कि इस क्षेत्र में नवाचार की गति तेज़ है। उन्होंने बताया कि वैश्विक अंतरिक्ष बाज़ार में भारत की हिस्सेदारी अभी केवल 2 प्रतिशत है और इसे 10 प्रतिशत तक ले जाने के लिए देश को बड़ी संख्या में स्पेस स्टार्टअप की आवश्यकता होगी।

स्टार्टअप संस्थापकों की प्रतिक्रिया

कार्यक्रम में भाग लेने वाले एक स्टार्टअप संस्थापक ने कहा कि यह एक बेहतरीन प्लेटफॉर्म है, जहाँ बड़े वेंचर कैपिटलिस्ट और मेंटर मौजूद हैं। उन्होंने बताया कि उन्हें न केवल अपना विचार प्रस्तुत करने का अवसर मिला, बल्कि फंडिंग का प्रस्ताव भी मिला। एक अन्य प्रतिभागी ने बताया कि वे एक ऐसा एयरक्राफ्ट विकसित कर रहे हैं जो हेलिकॉप्टर की तरह उड़ान भर सकता है, और उन्हें करण अदाणी के साथ इस विषय पर विस्तृत चर्चा का अवसर मिला।

'वंदे भारतम्' पहल का दायरा और उद्देश्य

गौतम अदाणी द्वारा शुरू की गई इस पहल को अब तक करीब 26,000 आवेदन प्राप्त हो चुके हैं। देश के हर राज्य और केंद्र-शासित प्रदेश से एंट्री आई हैं, जिनमें मोबिलिटी, सस्टेनेबिलिटी, तकनीक, कृषि, रक्षा, स्वास्थ्य, मैन्युफैक्चरिंग और शिक्षा जैसे विविध क्षेत्र शामिल हैं।

'वंदे भारतम्' का मूल उद्देश्य होनहार इनोवेटर्स को श्रेष्ठ मेंटर्स, उद्योग जगत के नेताओं और निवेशकों से जोड़ना है, ताकि उनके विचारों को सफल व्यवसायों में परिवर्तित किया जा सके। यह पहल गौतम अदाणी की उस सोच पर आधारित है कि जिस देश ने उन्हें सपने देखने और आगे बढ़ने का मौका दिया, उसे कुछ वापस लौटाया जाए।

आगे क्या

विशेषज्ञों का मानना है कि 'वंदे भारतम्' जैसे मंच भारत के स्टार्टअप इकोसिस्टम को टियर-2 और टियर-3 शहरों तक विस्तारित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। यदि इस पहल से उभरे स्टार्टअप वास्तव में फंडिंग और मेंटरशिप का लाभ उठा सकें, तो यह भारत की उद्यमिता क्रांति का अगला अध्याय साबित हो सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

000 एंट्री प्रभावशाली हैं, लेकिन असली सवाल यह है कि इनमें से कितने स्टार्टअप वास्तव में टिकाऊ व्यवसाय बन पाएँगे। कॉर्पोरेट-प्रायोजित स्टार्टअप प्रतियोगिताओं का इतिहास बताता है कि मंच और मेंटरशिप मिलना एक बात है, और दीर्घकालिक फंडिंग व बाज़ार पहुँच दूसरी। भारत का स्टार्टअप इकोसिस्टम टियर-1 शहरों में केंद्रित रहा है, और इस पहल की सफलता इस बात से मापी जाएगी कि क्या टियर-2 और टियर-3 के संस्थापक वास्तव में निवेश और नेटवर्क तक पहुँच पाते हैं, या यह सिर्फ एक प्रदर्शनी बनकर रह जाती है।
RashtraPress
13 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

'वंदे भारतम्' पहल क्या है?
'वंदे भारतम्' अदाणी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अदाणी द्वारा शुरू की गई एक स्टार्टअप पहल है, जिसका उद्देश्य देश भर के होनहार इनोवेटर्स को मेंटर्स, उद्योग जगत के नेताओं और निवेशकों से जोड़ना है। इस पहल को अब तक करीब 26,000 आवेदन मिल चुके हैं।
पवन कुमार चंदना ने 'वंदे भारतम्' के बारे में क्या कहा?
स्काईरूट एयरोस्पेस के सीईओ पवन कुमार चंदना ने कहा कि यह पहल भारत के छोटे शहरों के उद्यमियों को फंडिंग और मेंटरशिप का मंच दे रही है। उन्होंने यह भी कहा कि वैश्विक अंतरिक्ष बाज़ार में भारत की 2% हिस्सेदारी को 10% तक ले जाने के लिए बड़ी संख्या में स्पेस स्टार्टअप की ज़रूरत है।
'वंदे भारतम्' में किन क्षेत्रों के स्टार्टअप भाग ले रहे हैं?
इस पहल में मोबिलिटी, सस्टेनेबिलिटी, तकनीक, कृषि, रक्षा, स्वास्थ्य, मैन्युफैक्चरिंग और शिक्षा सहित कई क्षेत्रों के स्टार्टअप भाग ले रहे हैं। देश के हर राज्य और केंद्र-शासित प्रदेश से आवेदन आए हैं।
क्या 'वंदे भारतम्' में स्टार्टअप को फंडिंग मिलती है?
हाँ, कार्यक्रम में भाग लेने वाले स्टार्टअप संस्थापकों के अनुसार उन्हें वेंचर कैपिटलिस्ट और मेंटर्स के सामने अपने विचार प्रस्तुत करने का अवसर मिला और कुछ को फंडिंग के प्रस्ताव भी मिले। यह पहल इनोवेटर्स को निवेशकों और उद्योग नेताओं से सीधे जोड़ती है।
भारत के स्पेस सेक्टर में 'वंदे भारतम्' की क्या भूमिका है?
पवन कुमार चंदना के अनुसार, 'वंदे भारतम्' में बड़ी संख्या में स्पेस स्टार्टअप की भागीदारी दर्शाती है कि इस क्षेत्र में नवाचार तेज़ी से बढ़ रहा है। वैश्विक अंतरिक्ष बाज़ार में भारत की हिस्सेदारी 2% से बढ़ाकर 10% करने के लक्ष्य के लिए इस तरह के मंच महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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