छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: इस्तीफे से खाली पद पर वेटिंग लिस्ट से नियुक्ति नहीं
सारांश
मुख्य बातें
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने 27 सितंबर 2026 को एक महत्वपूर्ण निर्णय सुनाते हुए स्पष्ट किया कि जब कोई चयनित उम्मीदवार सेवा में शामिल होने के बाद इस्तीफा दे देता है, तो उससे उत्पन्न रिक्ति को पुरानी वेटिंग लिस्ट या चयन सूची के आधार पर नहीं भरा जा सकता। बिलासपुर स्थित हाईकोर्ट ने यह आदेश भूपेश वर्मा एवं अन्य बनाम छत्तीसगढ़ शासन एवं अन्य मामले में दिया और याचिकाकर्ताओं की दोनों रिट याचिकाएं खारिज कर दीं।
मामले की पृष्ठभूमि
याचिकाकर्ता भूपेश वर्मा और विकाश कुमार गुप्ता ने जूनियर इंजीनियर (इलेक्ट्रिकल) पद के लिए आयोजित चयन प्रक्रिया में भाग लिया था। इस भर्ती की चयन सूची वर्ष 2024 में जारी हुई, किंतु इन दोनों याचिकाकर्ताओं के नाम चयनित अभ्यर्थियों की सूची में नहीं आए।
इसके बाद चयनित कुछ अभ्यर्थियों ने नियुक्ति प्राप्त कर कार्यभार ग्रहण किया और कुछ समय बाद सेवा से इस्तीफा दे दिया। इससे कुछ पद रिक्त हो गए। याचिकाकर्ताओं ने इन रिक्तियों के आधार पर फर्स्ट वेटिंग लिस्ट अथवा फेज-II लिस्ट जारी कर उनके नामों पर विचार करने की मांग हाईकोर्ट से की।
हाईकोर्ट का तर्क और कानूनी आधार
जस्टिस बिभु दत्ता गुरु ने अपने आदेश में कहा कि वर्तमान मामले में जिन रिक्तियों का हवाला दिया गया है, वे मूल भर्ती प्रक्रिया के समय उपलब्ध रिक्तियां नहीं थीं। ये रिक्तियां चयनित अभ्यर्थियों के सेवा में शामिल होने के पश्चात उनके इस्तीफे के कारण उत्पन्न हुई हैं — अर्थात ये बाद में उत्पन्न हुई नई रिक्तियां हैं।
कोर्ट ने सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय सुदेश कुमार गोयल बनाम हरियाणा राज्य एवं अन्य [(2023) 10 एससीसी 54] का उल्लेख करते हुए दोहराया कि किसी चयनित उम्मीदवार के सेवा में शामिल होने के बाद इस्तीफा देने से उत्पन्न रिक्ति को पुरानी चयन सूची या वेटिंग लिस्ट के माध्यम से नहीं भरा जा सकता। यह सिद्धांत राष्ट्रीय स्तर पर मान्य न्यायिक दृष्टिकोण है।
वेटिंग लिस्ट की सीमा पर महत्वपूर्ण स्पष्टीकरण
हाईकोर्ट ने यह भी रेखांकित किया कि केवल इस आधार पर कि भविष्य में कोई पद रिक्त हो गया, वह अभ्यर्थी नियुक्ति का अधिकार नहीं जता सकता जिसका नाम मूल चयन सूची में था ही नहीं। विशेष रूप से तब, जब रिक्ति 'जॉइन न करने' से नहीं, बल्कि 'जॉइन करने के बाद इस्तीफा देने' से उत्पन्न हुई हो — क्योंकि इन दोनों परिस्थितियों के कानूनी निहितार्थ अलग-अलग हैं।
कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि पूर्व चयन प्रक्रियाओं में वेटिंग लिस्ट जारी करने की परंपरा मात्र से अभ्यर्थियों को भविष्य में उत्पन्न होने वाली रिक्तियों पर नियुक्ति का कोई वैधानिक या प्रवर्तनीय अधिकार नहीं मिल जाता।
नई भर्ती का मार्ग अनिवार्य
हाईकोर्ट ने आदेश दिया कि यदि संबंधित विभाग इस्तीफे से उत्पन्न रिक्तियों को भरना चाहता है, तो उसे लागू भर्ती नियमों और निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार नई भर्ती करनी होगी। पूर्व की समाप्त हो चुकी चयन प्रक्रिया की वेटिंग लिस्ट को इन रिक्तियों के लिए पुनर्जीवित नहीं किया जा सकता।
इसी आधार पर भूपेश वर्मा और विकाश कुमार गुप्ता की दोनों रिट याचिकाएं खारिज कर दी गईं। यह निर्णय छत्तीसगढ़ में भविष्य की भर्ती प्रक्रियाओं और वेटिंग लिस्ट के दावों को प्रभावित करने वाला एक मिसाल बन सकता है।