झारखंड हाई कोर्ट ने JSSC को नोटिस जारी किया, 2015 सिपाही भर्ती के 1,518 रिक्त पद भरने की माँग
सारांश
मुख्य बातें
झारखंड हाई कोर्ट ने 2015 की सिपाही भर्ती परीक्षा में सफल होने के बावजूद नियुक्ति से वंचित अभ्यर्थियों की याचिका पर झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) को नोटिस जारी कर छह सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। जस्टिस दीपक रोशन की अदालत ने अविनाश कुमार एवं अन्य की याचिका पर यह आदेश पारित किया और अगली सुनवाई की तारीख 9 दिसंबर तय की है।
मुख्य घटनाक्रम
याचिकाकर्ताओं की ओर से अदालत को बताया गया कि विज्ञापन संख्या 4/2015 के तहत सिपाही के 7,272 पदों पर भर्ती प्रक्रिया शुरू की गई थी। इनमें से 1,518 पद अब भी रिक्त हैं, जबकि अभ्यर्थी चयन प्रक्रिया के विभिन्न चरणों में सफल रह चुके हैं।
प्रार्थियों ने इन रिक्त पदों पर नियुक्ति की माँग करते हुए सर्वोच्च न्यायालय के उस आदेश का हवाला दिया है जो 21 अगस्त 2026 को जितेंद्र कुमार शर्मा एवं अन्य की याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए दिया गया था।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश की पृष्ठभूमि
सर्वोच्च न्यायालय ने 21 अगस्त 2026 को अपने आदेश में संबंधित अभ्यर्थियों की नियुक्ति प्रक्रिया चार सप्ताह में पूरी करने और नियुक्ति पत्र जारी करने का निर्देश दिया था। हालांकि, यह आदेश उन्हीं अभ्यर्थियों पर लागू था जो उस विशेष कानूनी कार्यवाही में पक्षकार थे। शीर्ष अदालत ने अपने निर्देशों का दायरा भी स्पष्ट किया था।
गौरतलब है कि मौजूदा याचिका के प्रार्थी उस कार्यवाही में शामिल नहीं थे। इसीलिए उन्होंने अब झारखंड हाई कोर्ट में यह नई याचिका दायर कर अपने दावे पर विचार किए जाने की अपेक्षा जताई है।
अभ्यर्थियों का पक्ष
याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि वे भर्ती प्रक्रिया के सभी आवश्यक चरणों में सफल रहे, बावजूद इसके उन्हें नियुक्ति नहीं मिली। 2015 की इस भर्ती प्रक्रिया को लेकर अभ्यर्थियों का कानूनी संघर्ष वर्षों से जारी है। सर्वोच्च न्यायालय के हालिया आदेश के बाद अन्य वंचित अभ्यर्थियों ने भी नियुक्ति की माँग और तेज़ कर दी है।
आगे की राह
फिलहाल हाई कोर्ट ने केवल JSSC से जवाब माँगा है; याचिका पर कोई अंतरिम राहत नहीं दी गई है। आयोग को छह सप्ताह में अपना पक्ष रखना होगा, जिसके बाद 9 दिसंबर को होने वाली सुनवाई में मामले की अगली दिशा तय होगी। हज़ारों वंचित अभ्यर्थियों की निगाहें अब JSSC के जवाब और अदालत के अगले आदेश पर टिकी हैं।