16 अक्टूबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

झारखंड हाई कोर्ट ने JSSC को नोटिस जारी किया, 2015 सिपाही भर्ती के 1,518 रिक्त पद भरने की माँग

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
झारखंड हाई कोर्ट ने JSSC को नोटिस जारी किया, 2015 सिपाही भर्ती के 1,518 रिक्त पद भरने की माँग

सारांश

2015 की सिपाही भर्ती में सफल होने के बाद भी नियुक्ति न मिलने से परेशान अभ्यर्थियों ने झारखंड हाई कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया। 1,518 पद आज भी रिक्त हैं। जस्टिस दीपक रोशन की अदालत ने JSSC को छह सप्ताह में जवाब देने का निर्देश दिया है।

मुख्य बातें

झारखंड हाई कोर्ट ने JSSC को 2015 सिपाही भर्ती मामले में नोटिस जारी कर छह सप्ताह में जवाब माँगा।
विज्ञापन संख्या 4/2015 के तहत 7,272 पदों में से 1,518 पद अब भी रिक्त हैं।
याचिकाकर्ता अविनाश कुमार एवं अन्य ने रिक्त पदों पर नियुक्ति के लिए हाई कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया।
सर्वोच्च न्यायालय ने 21 अगस्त 2026 को संबंधित अभ्यर्थियों को चार सप्ताह में नियुक्ति पत्र देने का आदेश दिया था।
मामले की अगली सुनवाई 9 दिसंबर को निर्धारित है।

झारखंड हाई कोर्ट ने 2015 की सिपाही भर्ती परीक्षा में सफल होने के बावजूद नियुक्ति से वंचित अभ्यर्थियों की याचिका पर झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) को नोटिस जारी कर छह सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। जस्टिस दीपक रोशन की अदालत ने अविनाश कुमार एवं अन्य की याचिका पर यह आदेश पारित किया और अगली सुनवाई की तारीख 9 दिसंबर तय की है।

मुख्य घटनाक्रम

याचिकाकर्ताओं की ओर से अदालत को बताया गया कि विज्ञापन संख्या 4/2015 के तहत सिपाही के 7,272 पदों पर भर्ती प्रक्रिया शुरू की गई थी। इनमें से 1,518 पद अब भी रिक्त हैं, जबकि अभ्यर्थी चयन प्रक्रिया के विभिन्न चरणों में सफल रह चुके हैं।

प्रार्थियों ने इन रिक्त पदों पर नियुक्ति की माँग करते हुए सर्वोच्च न्यायालय के उस आदेश का हवाला दिया है जो 21 अगस्त 2026 को जितेंद्र कुमार शर्मा एवं अन्य की याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए दिया गया था।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश की पृष्ठभूमि

सर्वोच्च न्यायालय ने 21 अगस्त 2026 को अपने आदेश में संबंधित अभ्यर्थियों की नियुक्ति प्रक्रिया चार सप्ताह में पूरी करने और नियुक्ति पत्र जारी करने का निर्देश दिया था। हालांकि, यह आदेश उन्हीं अभ्यर्थियों पर लागू था जो उस विशेष कानूनी कार्यवाही में पक्षकार थे। शीर्ष अदालत ने अपने निर्देशों का दायरा भी स्पष्ट किया था।

गौरतलब है कि मौजूदा याचिका के प्रार्थी उस कार्यवाही में शामिल नहीं थे। इसीलिए उन्होंने अब झारखंड हाई कोर्ट में यह नई याचिका दायर कर अपने दावे पर विचार किए जाने की अपेक्षा जताई है।

अभ्यर्थियों का पक्ष

याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि वे भर्ती प्रक्रिया के सभी आवश्यक चरणों में सफल रहे, बावजूद इसके उन्हें नियुक्ति नहीं मिली। 2015 की इस भर्ती प्रक्रिया को लेकर अभ्यर्थियों का कानूनी संघर्ष वर्षों से जारी है। सर्वोच्च न्यायालय के हालिया आदेश के बाद अन्य वंचित अभ्यर्थियों ने भी नियुक्ति की माँग और तेज़ कर दी है।

आगे की राह

फिलहाल हाई कोर्ट ने केवल JSSC से जवाब माँगा है; याचिका पर कोई अंतरिम राहत नहीं दी गई है। आयोग को छह सप्ताह में अपना पक्ष रखना होगा, जिसके बाद 9 दिसंबर को होने वाली सुनवाई में मामले की अगली दिशा तय होगी। हज़ारों वंचित अभ्यर्थियों की निगाहें अब JSSC के जवाब और अदालत के अगले आदेश पर टिकी हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

518 पद खाली रह जाना और फिर सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के बाद नई याचिकाओं की बाढ़ आना — यह प्रशासनिक विफलता की गहराई को उजागर करता है। असली सवाल यह है कि JSSC इतने वर्षों में इन पदों को भर क्यों नहीं सका और अब वह अदालत के सामने क्या स्पष्टीकरण देगा।
RashtraPress
16 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

झारखंड हाई कोर्ट ने 2015 सिपाही भर्ती मामले में JSSC को क्यों नोटिस दिया?
अविनाश कुमार एवं अन्य अभ्यर्थियों ने हाई कोर्ट में याचिका दाखिल कर माँग की है कि विज्ञापन संख्या 4/2015 के तहत रिक्त 1,518 पदों पर उनकी नियुक्ति की जाए। जस्टिस दीपक रोशन की अदालत ने याचिका पर संज्ञान लेते हुए JSSC को छह सप्ताह में जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।
2015 की सिपाही भर्ती में कितने पद रिक्त हैं?
विज्ञापन संख्या 4/2015 के तहत सिपाही के कुल 7,272 पदों पर भर्ती प्रक्रिया शुरू की गई थी। याचिकाकर्ताओं के अनुसार इनमें से 1,518 पद अब भी रिक्त हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने इस भर्ती के बारे में क्या आदेश दिया था?
सर्वोच्च न्यायालय ने 21 अगस्त 2026 को जितेंद्र कुमार शर्मा एवं अन्य की याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए संबंधित अभ्यर्थियों की नियुक्ति प्रक्रिया चार सप्ताह में पूरी करने और नियुक्ति पत्र जारी करने का निर्देश दिया था। यह आदेश उसी कार्यवाही के पक्षकारों पर लागू था।
मामले की अगली सुनवाई कब होगी?
झारखंड हाई कोर्ट ने अगली सुनवाई की तारीख 9 दिसंबर निर्धारित की है। तब तक JSSC को अपना जवाब दाखिल करना होगा।
क्या हाई कोर्ट ने अभ्यर्थियों को कोई अंतरिम राहत दी है?
अभी तक अदालत ने केवल JSSC को नोटिस जारी कर जवाब माँगा है; याचिकाकर्ताओं को कोई अंतरिम राहत नहीं दी गई है। मामले का निर्णय JSSC के जवाब और 9 दिसंबर की सुनवाई के बाद होगा।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 4 सप्ताह पहले
  2. 1 महीना पहले
  3. 1 महीना पहले
  4. 1 महीना पहले
  5. 1 महीना पहले
  6. 2 महीने पहले
  7. 1 साल पहले
  8. 1 साल पहले