झारखंड हाईकोर्ट ने JPSC-JSSC नियुक्तियाँ रद्द करने के आदेश पर रोक बरकरार रखी
सारांश
मुख्य बातें
झारखंड हाईकोर्ट ने 18 सितंबर 2026 को जेपीएससी (JPSC) की सीडीपीओ परीक्षा और जेएसएससी-सीजीएल (JSSC-CGL) के माध्यम से हुई नियुक्तियों को रद्द करने के झारखंड सरकार के फैसले पर पहले से लगी रोक को बरकरार रखा। जस्टिस दीपक रोशन की अदालत में विभिन्न भर्ती परीक्षाओं से हुई नियुक्तियों को रद्द करने के विरुद्ध दायर याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई हुई।
अदालत की मौखिक टिप्पणियाँ
सुनवाई के दौरान अदालत ने मौखिक रूप से कहा कि अब तक सामने आए तथ्यों से ऐसा प्रतीत होता है कि सभी नियुक्तियाँ सही तरीके से नहीं हुई हैं, किंतु यह भी स्वीकार किया कि सभी नियुक्तियों में गड़बड़ी नहीं हुई है। अदालत ने इस पर चिंता जताई कि जेपीएससी को परीक्षा आयोजित करने और नियुक्ति-प्रक्रिया पूरी करने में दो से तीन वर्ष लग जाते हैं।
ऐसी स्थिति में एक साथ बड़ी संख्या में नियुक्तियाँ रद्द करने से उन अधिकारियों की नौकरी प्रभावित हो सकती है जिनके विरुद्ध व्यक्तिगत स्तर पर कोई अनियमितता सामने नहीं आई है। यह टिप्पणी उन सैकड़ों अभ्यर्थियों के लिए राहत की किरण है जो वैध रूप से चयनित होने का दावा करते हैं।
जाँच निगरानी के लिए विशेष नियुक्तियाँ
अदालत ने भर्ती प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं की जाँच की निगरानी के लिए हाईकोर्ट के पूर्व न्यायाधीश गौतम कुमार चौधरी को नियुक्त किया है। इसके अतिरिक्त, सेवानिवृत्त आईपीएस अधिकारी आरके मलिक को नोडल अधिकारी बनाया गया है। शुक्रवार की सुनवाई में राज्य सरकार और झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) की ओर से अदालत में जवाब दाखिल किया गया।
सरकार का पक्ष और शपथ पत्र
राज्य सरकार की ओर से दाखिल शपथ पत्र में जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा रद्द करने के फैसले को यह कहते हुए उचित ठहराया गया कि परीक्षा की पूरी प्रक्रिया कथित अनियमितताओं से प्रभावित थी। सरकार का तर्क है कि ऐसी स्थिति में वैध और कथित अवैध रूप से लाभान्वित अभ्यर्थियों के बीच स्पष्ट अंतर करना संभव नहीं था। सरकार ने इस संबंध में सर्वोच्च न्यायालय के उन दिशा-निर्देशों का हवाला दिया जिनके अनुसार यदि किसी परीक्षा की पूरी प्रक्रिया दूषित हो जाए, तो पूरी परीक्षा रद्द की जा सकती है।
शपथ पत्र में आगे कहा गया कि सीजीएल परीक्षा के गोपनीय कार्य — जिनमें प्रश्नपत्रों की छपाई और परीक्षा केंद्रों तक पहुँचाना शामिल था — आईसीएन टेक्नोलॉजी को सौंपे गए थे। कथित गड़बड़ी के मामले में एजेंसी के सीईओ सोमांश प्रकाश समेत 28 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है और 265 लोगों को नोटिस जारी किया गया है।
नेपाल कनेक्शन और कथित सेटिंग का दायरा
जाँच में यह जानकारी मिलने का सरकार ने दावा किया है कि नेपाल के अलावा आसनसोल, कोलकाता, बिहार, झरिया और बोकारो में कथित तौर पर अभ्यर्थियों को प्रश्नों के उत्तर रटाए गए। सरकार के अनुसार, नेपाल ले जाए गए 28 अभ्यर्थियों में से 10 सीजीएल परीक्षा में सफल हुए हैं। मामले की जाँच अभी जारी है।
अधिवक्ताओं की दलीलें
याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता राजीव रंजन, इंद्रजीत सिन्हा, अमृतांश वत्स, कुमार हर्ष, सोनल तिवारी और सुभाष रसिक सोरेन समेत अन्य ने पक्ष रखा। राज्य सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मीनाक्षी अरोड़ा और महाधिवक्ता रोहिताश्य रॉय, तथा जेपीएससी की ओर से अधिवक्ता संजय पीपरवाल और प्रिंस कुमार ने बहस की। अगली सुनवाई में अदालत के निर्देश और जाँच रिपोर्ट पर टिप्पणियाँ इस मामले की दिशा तय करेंगी।