झारखंड नियुक्ति परीक्षा घोटाला: सुप्रीम कोर्ट ने JPSC-JSSC मामले में झारखंड सरकार को जारी किया नोटिस
सारांश
मुख्य बातें
सर्वोच्च न्यायालय ने 24 अगस्त 2026 को झारखंड में झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की नियुक्ति परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) जांच की मांग वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए झारखंड सरकार समेत सभी संबंधित पक्षों को नोटिस जारी करने का आदेश दिया। याचिकाकर्ता हरिशरण देवगन का आरोप है कि नियुक्ति प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर धन के लेन-देन के ज़रिये अयोग्य अभ्यर्थियों को सरकारी पदों पर नियुक्त किया गया।
मुख्य घटनाक्रम
यह याचिका मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहनन की तीन सदस्यीय पीठ के समक्ष सुनी गई। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता सत्यम राजपूत ने दलीलें पेश कीं। पीठ ने याचिका पर संज्ञान लेते हुए राज्य सरकार, केंद्र सरकार, CBI, CID, JPSC और JSSC को प्रतिवादी मानते हुए नोटिस जारी करने का निर्देश दिया।
आरोपों की गंभीरता
याचिका में कहा गया है कि गड़बड़ी का दायरा केवल एक-दो नियुक्तियों तक सीमित नहीं है। राज्य CID की जांच में अनियमितताएँ उजागर होने के बाद झारखंड सरकार पहले ही 22 नियुक्ति परीक्षाओं को रद्द कर चुकी है और 6 नियुक्ति प्रक्रियाओं को स्थगित किया जा चुका है। इसके बावजूद याचिकाकर्ता का तर्क है कि अनियमितताओं की व्यापकता को देखते हुए केवल राज्य एजेंसी की जांच पर्याप्त नहीं है।
CBI जांच की माँग क्यों
याचिकाकर्ता की ओर से अदालत को यह भी बताया गया कि झारखंड सरकार कथित तौर पर CBI जांच कराने के पक्ष में नहीं है। ऐसे में निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच सुनिश्चित करने के लिए केंद्रीय एजेंसी का हस्तक्षेप आवश्यक है। गौरतलब है कि परीक्षाओं में पारदर्शिता की माँग को लेकर छात्र और अभ्यर्थी लंबे समय से आंदोलनरत हैं।
आम अभ्यर्थियों पर असर
यह ऐसे समय में आया है जब हज़ारों योग्य अभ्यर्थी वर्षों की मेहनत के बाद भी सरकारी नौकरी पाने में असफल रहे हैं। 22 परीक्षाओं के रद्द होने से इन अभ्यर्थियों का भविष्य अधर में लटक गया है। अब सर्वोच्च न्यायालय के हस्तक्षेप से उन्हें निष्पक्ष प्रक्रिया की उम्मीद जगी है।
आगे क्या होगा
सर्वोच्च न्यायालय के नोटिस के बाद अब झारखंड सरकार और अन्य प्रतिवादियों को अपना पक्ष रखना होगा। अदालत का अगला कदम प्रतिवादियों के जवाब पर निर्भर करेगा। यदि CBI जांच का आदेश दिया गया, तो यह झारखंड की नियुक्ति प्रक्रिया में एक निर्णायक मोड़ साबित हो सकता है।