एसएस मोता सिंह स्कूल ट्रस्ट फाइल विवाद: सौरभ भारद्वाज ने BJP सरकार से माँगा जवाब, ₹500 करोड़ की जमीन का सवाल
सारांश
मुख्य बातें
आम आदमी पार्टी (AAP) के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने 24 अगस्त 2026 को दिल्ली की भारतीय जनता पार्टी (BJP) सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि दिल्ली उच्च न्यायालय के 8 जुलाई 2026 के आदेश के बावजूद एसएस मोता सिंह स्कूल ट्रस्ट से संबंधित फाइल अब तक न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत नहीं की गई है। भारद्वाज के अनुसार, इस ट्रस्ट के पास करीब ₹500 करोड़ की अनुमानित बेशकीमती जमीन है, और फाइल की अनुपस्थिति कई संदेहास्पद सवाल खड़े करती है।
मुख्य घटनाक्रम
दिल्ली उच्च न्यायालय ने 8 जुलाई 2026 को दिल्ली सरकार के राजस्व विभाग, डिविजनल कमिश्नर और जिलाधिकारी को निर्देश दिया था कि एसएस मोता सिंह स्कूल ट्रस्ट से जुड़ी फाइल उपलब्ध कराई जाए। यदि फाइल उपलब्ध न हो, तो उसे तलाश कर या आवश्यक प्रक्रिया के तहत पुनर्निर्मित कर अदालत के समक्ष पेश किया जाए। इसके लिए करीब एक महीने का समय दिया गया था, किंतु 8 अगस्त 2026 को समय सीमा समाप्त होने के बाद भी सरकार की ओर से कोई स्पष्ट जवाब सामने नहीं आया है।
भारद्वाज ने बताया कि इससे पहले जिलाधिकारी कार्यालय में भी संपर्क किया गया था, लेकिन फाइल उपलब्ध नहीं कराई गई। इसके बाद ही यह मामला उच्च न्यायालय तक पहुँचा।
₹500 करोड़ की संपत्ति और ट्रस्टी विवाद
भारद्वाज ने आरोप लगाया कि ट्रस्ट की फाइल में संभवतः उन लोगों के नाम दर्ज हो सकते हैं जिन्होंने कथित तौर पर ₹500 करोड़ की संपत्ति वाले इस सिख शैक्षणिक संस्थान के प्रबंधन में हस्तक्षेप करने की कोशिश की। उन्होंने दावा किया कि उन्हें एक फेसबुक पोस्ट मिली थी, जिसमें अमरजीत सिंह बब्बू नामक व्यक्ति ने दिल्ली सरकार के मंत्री प्रवेश वर्मा को धन्यवाद देते हुए दावा किया था कि मंत्री ने उन्हें एसएस मोता सिंह स्कूल में ट्रस्टी बनाया है। भारद्वाज के अनुसार, जब उन्होंने मंत्री प्रवेश वर्मा से इस विषय पर सवाल किया, तो उन्होंने कथित तौर पर मानहानि का मुकदमा दायर कर दिया।
अल्पसंख्यक संस्थान में हस्तक्षेप का सवाल
भारद्वाज ने यह भी सवाल उठाया कि क्या किसी अल्पसंख्यक सिख संस्थान के प्रबंधन में राजनीतिक व्यक्तियों को इस प्रकार हस्तक्षेप करने की अनुमति दी जा सकती है। उन्होंने कहा कि यह मामला केवल एक फाइल का नहीं, बल्कि ट्रस्ट की संपत्ति, उसके प्रबंधन और नए ट्रस्टियों की नियुक्ति प्रक्रिया में पारदर्शिता का भी है। गौरतलब है कि इस प्रकार के मामले जहाँ सरकारी रिकॉर्ड अदालती आदेश के बाद भी अनुपलब्ध रहे, पहले भी विवाद का विषय बने हैं।
सरकार की प्रतिक्रिया और AAP का रुख
AAP नेता ने मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता से सीधे सवाल करते हुए पूछा कि सरकार इस फाइल को सार्वजनिक करने में क्यों हिचक रही है। उन्होंने माँग की कि यदि किसी स्तर पर रिकॉर्ड गायब हुआ है तो इसकी जिम्मेदारी तय की जाए और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई हो। भारद्वाज ने स्पष्ट किया कि AAP इस मामले को लगातार उठाती रहेगी और जल्द ही इससे जुड़े अन्य तथ्यों को भी सार्वजनिक किया जाएगा।
क्या होगा आगे
मामला अभी दिल्ली उच्च न्यायालय में विचाराधीन है। अदालत के निर्देश का पालन न होने की स्थिति में अगली सुनवाई में सरकार को जवाब देना होगा। इसके साथ ही मंत्री प्रवेश वर्मा द्वारा दायर कथित मानहानि मुकदमा भी अपनी प्रक्रिया के तहत चलता रहेगा। इस विवाद का राजनीतिक असर आने वाले दिनों में और गहरा हो सकता है।