दिग्विजय सिंह का MP सरकार से आग्रह: एससी-एसटी छात्रावास व आश्रम 2016 से बंद, तत्काल खोलने की माँग
सारांश
मुख्य बातें
मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने 29 मई 2026 को मुख्यमंत्री मोहन यादव को पत्र लिखकर राज्य में अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) के छात्रों के लिए बने छात्रावासों और आश्रमों को फिर से खोलने की अपील की है, जो 2016 से बंद पड़े हैं। सिंह का कहना है कि इन सुविधाओं के बंद रहने से हजारों वंचित बच्चों की शिक्षा और सामाजिक विकास बाधित हो रहा है।
मुख्य घटनाक्रम
दिग्विजय सिंह ने अपने पत्र में जनजातीय कल्याण विभाग के अंतर्गत आश्रम शिक्षक संघ के राज्य प्रमुख जवाहर सिंह अग्रवाल द्वारा उठाए गए मुद्दों का विशेष उल्लेख किया। अग्रवाल लंबे समय से इन संस्थानों को पुनः चालू कराने की माँग करते रहे हैं।
सिंह ने पत्र में स्पष्ट किया कि विभिन्न जिलों में फैले ये छात्रावास और आश्रम हाशिए पर रहने वाले समुदायों के बच्चों को आवास, शिक्षा और सरकारी कल्याणकारी योजनाओं तक पहुँच सुनिश्चित करने के लिए स्थापित किए गए थे।
शिक्षा पर असर
सिंह के अनुसार, 2016 में इन सुविधाओं के बंद होने के बाद से अनगिनत एससी-एसटी बच्चों की शैक्षणिक यात्रा बाधित हुई है। उनका तर्क है कि इन आश्रमों की अनुपस्थिति ने विशेषाधिकार प्राप्त और वंचित समूहों के बीच की खाई को और चौड़ा कर दिया है, जिससे ग्रामीण व गरीब छात्र गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए आवश्यक सहायता से वंचित हैं।
उन्होंने इस स्थिति को 'घोर अन्यायपूर्ण' बताते हुए मुख्यमंत्री से संबंधित विभाग को तत्काल कार्रवाई का निर्देश देने की अपील की।
सरकार से क्या माँगा
सिंह ने जोर देकर कहा कि छात्रावासों और आश्रमों को फिर से खोलने से सरकारी कल्याणकारी योजनाओं और शैक्षणिक संस्थानों तक पहुँच बहाल होगी। उन्होंने कहा कि यह केवल बुनियादी ढाँचे का सवाल नहीं, बल्कि उन हजारों बच्चों के भविष्य की रक्षा का मामला है जो समान अवसरों के हकदार हैं।
उन्होंने विश्वास जताया कि राज्य सरकार सामाजिक न्याय और जनहित के सिद्धांतों से प्रेरित होकर इस अपील पर सकारात्मक प्रतिक्रिया देगी।
व्यापक संदर्भ
यह पत्र मध्य प्रदेश में समावेशी शिक्षा के प्रति राज्य की प्रतिबद्धता पर बहस को नए सिरे से हवा दे रहा है। गौरतलब है कि एससी-एसटी छात्रों के लिए आवासीय शिक्षा सुविधाएँ केंद्र और राज्य दोनों स्तर की कल्याण योजनाओं का अभिन्न हिस्सा रही हैं। पर्यवेक्षकों का मानना है कि इन छात्रावासों और आश्रमों को फिर से खोलना मध्य प्रदेश में सामाजिक और शैक्षिक असमानताओं को पाटने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हो सकता है।
आगे क्या
अभी तक मुख्यमंत्री मोहन यादव के कार्यालय की ओर से इस पत्र पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। सिंह के इस कदम से राज्य में एससी-एसटी कल्याण नीति पर राजनीतिक दबाव बढ़ने की संभावना है।