28 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

ईएसबी भर्ती परीक्षा घोटाले की सीबीआई जांच हो: दिग्विजय सिंह का मोहन यादव को पत्र

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
ईएसबी भर्ती परीक्षा घोटाले की सीबीआई जांच हो: दिग्विजय सिंह का मोहन यादव को पत्र

सारांश

मध्यप्रदेश में ईएसबी भर्ती परीक्षाओं में तकनीकी विफलता और टेंडर प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं ने 40 लाख बेरोजगार युवाओं को प्रभावित किया है। दिग्विजय सिंह ने मुख्यमंत्री मोहन यादव को पत्र लिखकर सीबीआई या एसआईटी जांच की मांग की है और व्यापम घोटाले की पुनरावृत्ति की आशंका जताई है।

मुख्य बातें

कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने 12 जून 2026 को मुख्यमंत्री मोहन यादव को पत्र लिखकर ईएसबी भर्ती परीक्षाओं की सीबीआई या एसआईटी जांच की मांग की।
2023 और 2024 में जारी टेंडर दो बार निरस्त कर नई शर्तों पर एक खास कंपनी को दिए जाने का आरोप; उस कंपनी पर पूर्व में शासन द्वारा कार्रवाई हो चुकी है।
तकनीकी विफलताओं के कारण लाखों अभ्यर्थियों को मानसिक, आर्थिक और समय की भारी क्षति।
प्रदेश के लगभग 40 लाख बेरोजगार युवाओं के भविष्य पर असर की बात कही गई।
दिग्विजय सिंह ने व्यापम घोटाले का संदर्भ देते हुए भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता बहाल करने की अपील की।

कांग्रेस नेता और मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने 12 जून 2026 को मुख्यमंत्री मोहन यादव को पत्र लिखकर मध्यप्रदेश कर्मचारी चयन मंडल (ईएसबी) द्वारा आयोजित भर्ती परीक्षाओं में सामने आई तकनीकी विफलताओं और टेंडर प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं की सीबीआई या उच्चस्तरीय एसआईटी से निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि इन गड़बड़ियों से प्रदेश के लगभग 40 लाख बेरोजगार युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ हो रहा है।

मुख्य घटनाक्रम

बेरोजगार युवाओं के एक प्रतिनिधिमंडल ने दिग्विजय सिंह से मुलाकात कर भर्ती परीक्षाओं के संचालन में गंभीर खामियों और टेंडर प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं की जानकारी दी। प्रतिनिधिमंडल के अनुसार, वर्ष 2023 और 2024 में परीक्षा संचालन के लिए जारी निविदाओं में तीन कंपनियों को तकनीकी रूप से पात्र घोषित किया गया, लेकिन दोनों बार टेंडर निरस्त कर दिए गए।

इसके बाद जारी नई निविदा में महत्वपूर्ण शर्तों में बदलाव कर एक खास कंपनी को टेंडर दिया गया, जिससे पूरी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे हैं। उपलब्ध दस्तावेजों के अनुसार, जिस कंपनी को परीक्षा संचालन का कार्य सौंपा गया, उसके विरुद्ध पूर्व में भी शासन द्वारा कार्रवाई की जा चुकी है।

अभ्यर्थियों पर असर

हाल ही में ईएसबी द्वारा आयोजित विभिन्न भर्ती परीक्षाओं में तकनीकी समस्याओं के कारण लाखों अभ्यर्थियों को मानसिक, आर्थिक और समय की भारी क्षति उठानी पड़ी है। यह ऐसे समय में आया है जब प्रदेश में बेरोजगारी पहले से ही एक संवेदनशील राजनीतिक मुद्दा बनी हुई है। गौरतलब है कि परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर सवाल उठना युवाओं के सरकारी भर्ती प्रक्रिया से भरोसे को सीधे प्रभावित करता है।

व्यापम से तुलना और ऐतिहासिक संदर्भ

दिग्विजय सिंह ने अपने पत्र में याद दिलाया कि मध्यप्रदेश पहले भी व्यापम घोटाले जैसी घटनाओं से देशभर में बदनामी झेल चुका है। आलोचकों का कहना है कि टेंडर प्रक्रिया में बार-बार बदलाव और निरस्तीकरण का उद्देश्य कथित तौर पर किसी विशेष कंपनी को लाभ पहुंचाना रहा हो सकता है। यह मध्यप्रदेश में भर्ती प्रक्रियाओं को लेकर उठने वाली एक लंबी शृंखला की नई कड़ी है।

दिग्विजय सिंह की मांगें

पूर्व मुख्यमंत्री ने मुख्यमंत्री मोहन यादव से आग्रह किया है कि पूरे मामले की सीबीआई जांच अथवा उच्चस्तरीय एसआईटी से निष्पक्ष जांच कराई जाए और दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाए। उनका कहना है कि भर्ती प्रक्रियाओं की पारदर्शिता और युवाओं के विश्वास को बनाए रखना राज्य सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है।

क्या होगा आगे

अब सवाल यह है कि मुख्यमंत्री मोहन यादव की सरकार इस पत्र पर क्या प्रतिक्रिया देती है और क्या ईएसबी की टेंडर प्रक्रिया की स्वतंत्र जांच का आदेश दिया जाएगा। प्रदेश के 40 लाख बेरोजगार युवाओं की निगाहें सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसमें उठाए गए सवाल — टेंडर का दो बार निरस्त होना और शर्तें बदलकर एक कंपनी को लाभ देना — ठोस दस्तावेजी आधार पर हैं, जिन्हें खारिज नहीं किया जा सकता। व्यापम के बाद मध्यप्रदेश की भर्ती प्रणाली पर पहले से ही राष्ट्रीय स्तर पर संदेह है, और ऐसे में सरकार का मौन या रक्षात्मक रुख युवाओं के भरोसे को और कमज़ोर करेगा। असली परीक्षा यह है कि क्या मोहन यादव सरकार स्वतंत्र जांच का साहस दिखाती है या मामले को राजनीतिक हमले के रूप में खारिज करती है — दोनों विकल्पों के दीर्घकालिक राजनीतिक परिणाम होंगे।
RashtraPress
28 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ईएसबी भर्ती परीक्षाओं में क्या गड़बड़ी सामने आई है?
मध्यप्रदेश कर्मचारी चयन मंडल (ईएसबी) की भर्ती परीक्षाओं में तकनीकी विफलताओं के कारण लाखों अभ्यर्थियों को नुकसान उठाना पड़ा है। इसके अलावा, 2023 और 2024 में जारी टेंडर दो बार निरस्त कर शर्तें बदलने के बाद एक खास कंपनी को परीक्षा संचालन का कार्य सौंपे जाने का आरोप है।
दिग्विजय सिंह ने सीबीआई जांच की मांग क्यों की?
दिग्विजय सिंह का कहना है कि टेंडर प्रक्रिया में बार-बार बदलाव और किसी विशेष कंपनी को लाभ पहुंचाने की कथित कोशिश ने पूरी भर्ती प्रणाली की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। उन्होंने व्यापम घोटाले का हवाला देते हुए कहा कि निष्पक्ष जांच ही युवाओं का भरोसा बहाल कर सकती है।
इस मामले से कितने युवा प्रभावित हैं?
दिग्विजय सिंह के पत्र के अनुसार, मध्यप्रदेश में लगभग 40 लाख बेरोजगार युवा इन भर्ती परीक्षाओं पर निर्भर हैं। तकनीकी गड़बड़ियों के कारण लाखों अभ्यर्थियों को मानसिक, आर्थिक और समय की भारी क्षति उठानी पड़ी है।
टेंडर प्रक्रिया में क्या अनियमितता का आरोप है?
आरोप है कि 2023 और 2024 में तीन कंपनियों को तकनीकी रूप से पात्र घोषित करने के बाद भी टेंडर दो बार निरस्त किए गए। इसके बाद नई निविदा में महत्वपूर्ण शर्तें बदलकर एक खास कंपनी को टेंडर दिया गया, जबकि उस कंपनी के विरुद्ध पूर्व में शासन द्वारा कार्रवाई भी हो चुकी है।
मुख्यमंत्री मोहन यादव से क्या कार्रवाई की मांग की गई है?
दिग्विजय सिंह ने मुख्यमंत्री मोहन यादव से पूरे मामले की सीबीआई जांच अथवा उच्चस्तरीय एसआईटी से निष्पक्ष जांच कराने और दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई करने की मांग की है। उनका कहना है कि प्रदेश के युवाओं का शासन और भर्ती व्यवस्था पर भरोसा बनाए रखना सरकार की जिम्मेदारी है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 3 सप्ताह पहले
  2. 1 महीना पहले
  3. 1 महीना पहले
  4. 2 महीने पहले
  5. 3 महीने पहले
  6. 3 महीने पहले
  7. 7 महीने पहले
  8. 1 साल पहले