ईएसबी भर्ती परीक्षा घोटाले की सीबीआई जांच हो: दिग्विजय सिंह का मोहन यादव को पत्र
सारांश
मुख्य बातें
कांग्रेस नेता और मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने 12 जून 2026 को मुख्यमंत्री मोहन यादव को पत्र लिखकर मध्यप्रदेश कर्मचारी चयन मंडल (ईएसबी) द्वारा आयोजित भर्ती परीक्षाओं में सामने आई तकनीकी विफलताओं और टेंडर प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं की सीबीआई या उच्चस्तरीय एसआईटी से निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि इन गड़बड़ियों से प्रदेश के लगभग 40 लाख बेरोजगार युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ हो रहा है।
मुख्य घटनाक्रम
बेरोजगार युवाओं के एक प्रतिनिधिमंडल ने दिग्विजय सिंह से मुलाकात कर भर्ती परीक्षाओं के संचालन में गंभीर खामियों और टेंडर प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं की जानकारी दी। प्रतिनिधिमंडल के अनुसार, वर्ष 2023 और 2024 में परीक्षा संचालन के लिए जारी निविदाओं में तीन कंपनियों को तकनीकी रूप से पात्र घोषित किया गया, लेकिन दोनों बार टेंडर निरस्त कर दिए गए।
इसके बाद जारी नई निविदा में महत्वपूर्ण शर्तों में बदलाव कर एक खास कंपनी को टेंडर दिया गया, जिससे पूरी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे हैं। उपलब्ध दस्तावेजों के अनुसार, जिस कंपनी को परीक्षा संचालन का कार्य सौंपा गया, उसके विरुद्ध पूर्व में भी शासन द्वारा कार्रवाई की जा चुकी है।
अभ्यर्थियों पर असर
हाल ही में ईएसबी द्वारा आयोजित विभिन्न भर्ती परीक्षाओं में तकनीकी समस्याओं के कारण लाखों अभ्यर्थियों को मानसिक, आर्थिक और समय की भारी क्षति उठानी पड़ी है। यह ऐसे समय में आया है जब प्रदेश में बेरोजगारी पहले से ही एक संवेदनशील राजनीतिक मुद्दा बनी हुई है। गौरतलब है कि परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर सवाल उठना युवाओं के सरकारी भर्ती प्रक्रिया से भरोसे को सीधे प्रभावित करता है।
व्यापम से तुलना और ऐतिहासिक संदर्भ
दिग्विजय सिंह ने अपने पत्र में याद दिलाया कि मध्यप्रदेश पहले भी व्यापम घोटाले जैसी घटनाओं से देशभर में बदनामी झेल चुका है। आलोचकों का कहना है कि टेंडर प्रक्रिया में बार-बार बदलाव और निरस्तीकरण का उद्देश्य कथित तौर पर किसी विशेष कंपनी को लाभ पहुंचाना रहा हो सकता है। यह मध्यप्रदेश में भर्ती प्रक्रियाओं को लेकर उठने वाली एक लंबी शृंखला की नई कड़ी है।
दिग्विजय सिंह की मांगें
पूर्व मुख्यमंत्री ने मुख्यमंत्री मोहन यादव से आग्रह किया है कि पूरे मामले की सीबीआई जांच अथवा उच्चस्तरीय एसआईटी से निष्पक्ष जांच कराई जाए और दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाए। उनका कहना है कि भर्ती प्रक्रियाओं की पारदर्शिता और युवाओं के विश्वास को बनाए रखना राज्य सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है।
क्या होगा आगे
अब सवाल यह है कि मुख्यमंत्री मोहन यादव की सरकार इस पत्र पर क्या प्रतिक्रिया देती है और क्या ईएसबी की टेंडर प्रक्रिया की स्वतंत्र जांच का आदेश दिया जाएगा। प्रदेश के 40 लाख बेरोजगार युवाओं की निगाहें सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं।