दिग्विजय सिंह ने गेहूं घोटाले की जांच के लिए मोहन यादव को लिखा पत्र

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दिग्विजय सिंह ने गेहूं घोटाले की जांच के लिए मोहन यादव को लिखा पत्र

सारांश

मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने गेहूं घोटाले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। उन्होंने मुख्यमंत्री मोहन यादव को पत्र लिखकर वित्तीय अनियमितताओं के खिलाफ कार्रवाई की अपील की है। यह मामला गंभीर आर्थिक अनियमितताओं से जुड़ा है, जिसमें करोड़ों रुपये का नुकसान बताया गया है।

Key Takeaways

  • गेहूं घोटाला: रायसेन और सीहोर में हुए वित्तीय अनियमितता का मामला।
  • जांच की मांग: दिग्विजय सिंह ने उच्चस्तरीय जांच की अपील की है।
  • सामने आई अनियमितताएं: 150 करोड़ रुपये की वित्तीय अनियमितताएं।
  • खराब गेहूं: 40 हजार टन गेहूं सड़ गया।
  • राज्य सरकार की निष्क्रियता: अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं।

भोपाल, 15 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने राज्य के मुख्यमंत्री मोहन यादव को एक पत्र भेजकर रायसेन और सीहोर में हुए गेहूं घोटाले की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है।

उन्होंने इसे गंभीर आर्थिक अनियमितता बताते हुए राज्य आर्थिक अपराध अनुसंधान ब्यूरो (ईओडब्ल्यू) से निष्पक्ष जांच कराने का निवेदन किया है।

दिग्विजय सिंह ने पत्र में उल्लेख किया है कि पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के क्षेत्र बुधनी और वर्तमान लोकसभा क्षेत्र से लगभग 150 करोड़ रुपये की वित्तीय अनियमितताएं सामने आई हैं।

उन्होंने बताया कि इस मामले में वे पहले भी 25 जुलाई 2023 को तत्कालीन मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर जांच की मांग कर चुके हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। बताया गया है कि रायसेन जिले के औबेदुल्लागंज तहसील के दिवटिया, अब्दुल्लागंज एवं नूरगंज के सरकारी वेयरहाउस में रखे गेहूं की देखरेख और भंडारण में अत्यधिक खर्च किया गया, जबकि लगभग 40 हजार टन गेहूं सड़कर पूरी तरह खराब हो गया। इस गेहूं का बाजार मूल्य लगभग 100 करोड़ रुपये बताया गया है। चौंकाने वाली बात यह है कि इसके रखरखाव और किराए पर ही लगभग 150 करोड़ रुपये खर्च किए गए।

उन्होंने आगे कहा कि 2017 से 2020 के बीच समर्थन मूल्य पर खरीदे गए गेहूं को न तो भारतीय खाद्य निगम ने उठाया और न ही सार्वजनिक वितरण प्रणाली के माध्यम से जरूरतमंदों तक पहुंचाया गया। इसके परिणामस्वरूप, लंबे समय तक भंडारण के कारण गेहूं में कीड़े लग गए और वह अनुपयोगी हो गया।

दिग्विजय सिंह ने आरोप लगाया है कि जब गेहूं खराब हो गया, तो इसे जिम्मेदार निजी गोदाम संचालकों को बचाने के लिए बकतरा (सीहोर) से हटाकर रायसेन जिले के वेयरहाउस में स्थानांतरित कर दिया गया। इस प्रक्रिया में परिवहन कार्य भी कथित रूप से एक करीबी व्यक्ति को सौंपा गया, जिसमें करोड़ों रुपये का भुगतान किया गया।

उन्होंने यह भी कहा कि इस पूरे मामले में जानबूझकर गेहूं को 4-5 वर्षों तक गोदामों में रखा गया ताकि संबंधित गोदाम मालिकों को भारी-भरकम किराया दिया जा सके। जबकि नियमानुसार अतिरिक्त स्टॉक होने पर समय पर नीलामी या वितरण किया जाना चाहिए था।

पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच कराई जाए तथा दोषी अधिकारियों एवं निजी गोदाम मालिकों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

Point of View

जो राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर जवाबदेही की आवश्यकता को उजागर करता है। दिग्विजय सिंह की मांग एक महत्वपूर्ण कदम है, जो न केवल इस घोटाले की जांच को सुनिश्चित करेगा, बल्कि भविष्य में इस तरह की गतिविधियों को रोकने में भी मदद करेगा।
NationPress
15/04/2026

Frequently Asked Questions

दिग्विजय सिंह ने किस घोटाले की जांच की मांग की है?
दिग्विजय सिंह ने रायसेन और सीहोर के गेहूं घोटाले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।
इस घोटाले में कितने रुपये की वित्तीय अनियमितताएं सामने आई हैं?
इस घोटाले में लगभग 150 करोड़ रुपये की वित्तीय अनियमितताएं सामने आई हैं।
दिग्विजय सिंह ने कब जांच की मांग की थी?
दिग्विजय सिंह ने पहले भी 25 जुलाई 2023 को जांच की मांग की थी।
इस घोटाले में गेहूं का कितना हिस्सा खराब हुआ है?
लगभग 40 हजार टन गेहूं सड़कर पूरी तरह खराब हो गया है।
क्या राज्य सरकार ने इस मामले में कोई कार्रवाई की है?
अब तक राज्य सरकार ने इस मामले में कोई ठोस कार्रवाई नहीं की है।
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