भारत की आर्थिक वृद्धि में मजबूती, लेकिन वैश्विक अनिश्चितताओं से भविष्य में चुनौतियाँ: सीईए वी. अनंत नागेश्वरन
सारांश
Key Takeaways
- भारत की आर्थिक वृद्धि में मजबूती है।
- बढ़ती वैश्विक अनिश्चितताएं चिंता का विषय हैं।
- भारत की जीडीपी ग्रोथ 7.6 प्रतिशत अनुमानित है।
- सभी प्रमुख क्षेत्र मजबूत प्रदर्शन कर रहे हैं।
- नीति निर्माताओं को सतर्क रहने की आवश्यकता है।
वॉशिंगटन, 15 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। भारत की आर्थिक वृद्धि ने मजबूती बनाए रखी है, परंतु बढ़ती वैश्विक अनिश्चितताएं अगले कुछ महीनों में भविष्य की दिशा में प्रभाव डाल सकती हैं। यह जानकारी मुख्य आर्थिक सलाहकार (सीईए) वी. अनंत नागेश्वरन ने बुधवार को साझा की।
उन्होंने बताया कि भारत ने हाल के वर्षों में अच्छी ग्रोथ बनाए रखी है, लेकिन बाहरी जोखिम अब और बढ़ गए हैं।
उनका कहना था कि हमें वर्तमान समय की व्यापक अनिश्चितता को हल्के में नहीं लेना चाहिए, जिसका उल्लेख उन्होंने वैश्विक संघर्ष और आर्थिक अस्थिरता के संदर्भ में किया।
भारत की जीडीपी ग्रोथ वित्त वर्ष 2026 तक 7.6 प्रतिशत रहने का अनुमान है। यह कोविड-19 के बाद लगातार सात प्रतिशत से अधिक की ग्रोथ का सिलसिला बनाए रखे हुए है।
उन्होंने कहा कि कोविड-19 के बाद भारत ने लगातार सात प्रतिशत से अधिक की वास्तविक जीडीपी ग्रोथ हासिल की है, जो उस दुनिया में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है, जहां ग्रोथ में कमी आ रही है।
उन्होंने बताया कि नए वित्त वर्ष की शुरुआत में भी आर्थिक गतिविधियों में मजबूती बनी हुई है। कृषि, मैन्युफैक्चरिंग और सेवा क्षेत्र तीनों अपने प्रदर्शन में अच्छे हैं।
नागेश्वरन ने यह भी कहा कि पिछले कुछ सप्ताह में वैश्विक माहौल में काफी बदलाव आया है। 28 फरवरी की सुबह के बाद सब कुछ बदल गया है। उनका इशारा भू-राजनीतिक तनावों की ओर था।
इन जोखिमों में ऊंची तेल कीमतें, सप्लाई में रुकावट और विदेशी निवेश में उतार-चढ़ाव शामिल हैं, जो ग्रोथ, महंगाई और देश के बाहरी संतुलन को प्रभावित कर सकते हैं। इसके बावजूद, भारत इन चुनौतियों का सामना करने के लिए अच्छी स्थिति में है। हम इसे मैक्रोइकोनॉमिक मजबूती के साथ संभाल रहे हैं।
उन्होंने कहा कि भारत की ग्रोथ को मजबूत घरेलू मांग, इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश और ऐसे नीतिगत सुधारों से सहारा मिला है, जिन्होंने सप्लाई क्षमता को बेहतर किया है। राजकोषीय घाटा धीरे-धीरे कम हो रहा है, जबकि सरकारी पूंजी निवेश में वृद्धि हो रही है।
उन्होंने सलाह दी कि नीति निर्माताओं को सतर्क रहना चाहिए और उभरते जोखिमों पर तेजी से प्रतिक्रिया देनी चाहिए। भारत की उच्च विकास दर बनाए रखने के लिए बाहरी झटकों को संभालना और संरचनात्मक सुधारों व निवेश को जारी रखना बहुत आवश्यक है।
भारत अब दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है और दीर्घकालिक विकास लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए लगातार तेजी से ग्रोथ का लक्ष्य रखता है।