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महिला आरक्षण बिल की विफलता पर जीतन राम मांझी की तीखी प्रतिक्रिया

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महिला आरक्षण बिल की विफलता पर जीतन राम मांझी की तीखी प्रतिक्रिया

सारांश

केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने महिला आरक्षण बिल के गिरने पर विपक्ष की आलोचना की। उन्होंने कहा कि यह बिल महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए था, लेकिन विपक्ष ने इसे अपने राजनीतिक स्वार्थ के चलते पास नहीं होने दिया।

मुख्य बातें

महिला आरक्षण बिल का उद्देश्य महिलाओं को राजनीतिक सशक्तिकरण प्रदान करना है।
विपक्ष की भूमिका पर सवाल उठाए गए हैं।
परिसीमन प्रक्रिया की आवश्यकता पर जोर दिया गया है।
महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए जागरूकता आवश्यक है।
शराबबंदी नीति में सुधार की आवश्यकता पर चर्चा की गई है।

पटना, 18 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने महिला आरक्षण बिल के विफल होने पर विपक्ष की निंदा की। उन्होंने बताया कि यह बिल महिलाओं को राजनीतिक रूप से सशक्त बनाने के लिए था, लेकिन विपक्ष ने अपने राजनीतिक स्वार्थ के चलते इसे पारित नहीं होने दिया।

पटना में मांझी ने मीडिया के समक्ष कहा कि महिला आरक्षण बिल 2023 में पारित हुआ था, जिसमें परिसीमन (डिलिमिटेशन) की प्रक्रिया को जोड़ा गया था। समस्या यह थी कि बिना परिसीमन के महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित नहीं हो सकती थी।

मंत्री ने बताया कि इसी कारण परिसीमन की आवश्यकता थी। उन्होंने दक्षिण भारत के राज्यों में विपक्ष द्वारा फैलाई गई गलत धारणाओं को भी खारिज किया।

उन्होंने कहा कि यह गलत प्रचारित किया गया कि परिसीमन से दक्षिण भारत के राज्यों का दर्जा घट जाएगा और उत्तर भारत को लाभ होगा। वास्तव में, सीटों की संख्या बढ़ने पर कर्नाटक, केरल में भी सीटें बढ़ेंगी, और उत्तर प्रदेश में भी।

जीतन राम मांझी ने इसे देश और महिलाओं के लिए दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि महिलाएं आज हर क्षेत्र में पुरुषों से आगे हैं। सरस्वती शिक्षा की देवी हैं, लक्ष्मी धन की, और काली-दुर्गा शक्ति की देवी हैं। प्राचीन काल में भारत को ‘जगतगुरु’ कहा जाता था, लेकिन बाद में महिलाओं को हाशिए पर धकेल दिया गया।

उन्होंने कहा कि पीएम नरेंद्र मोदी महिलाओं को आगे बढ़ाना चाहते थे, लेकिन विपक्ष को इसमें राजनीतिक लाभ नजर नहीं आया। इस कारण से दो-तिहाई बहुमत नहीं मिल सका और बिल गिर गया। यह विपक्ष के लिए शर्म की बात है, लेकिन वे जश्न मना रहे हैं।

मांझी ने आशा व्यक्त की कि हम इस मुद्दे को गांव-गांव तक पहुंचाएंगे। अगर देश की महिलाएं जागरूक हुईं, तो दो-तिहाई बहुमत जरूर मिलेगा। तब महिला आरक्षण बिल पारित होगा और महिलाओं को राजनीति में सार्थक भूमिका मिलेगी।

उन्होंने विपक्ष पर आरोप लगाते हुए कहा कि बिल का पास न होना पूरी तरह से विपक्ष की जिम्मेदारी है।

उन्होंने कहा कि परिसीमन के बाद 2029 के चुनाव में महिलाओं को बढ़ी हुई सीटों पर आरक्षण का लाभ मिलता, लेकिन विपक्ष ने इसे रोक दिया।

शराबबंदी नीति पर उन्होंने कहा कि नीति तो अच्छी है, लेकिन इसके क्रियान्वयन में कुछ खामियां रह गई हैं, जिससे गरीबों को नुकसान हो रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

उन्होंने उम्मीद जताई है कि भविष्य में महिलाएं इस मुद्दे को उठाकर दो-तिहाई बहुमत हासिल कर सकती हैं।
RashtraPress
24 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

महिला आरक्षण बिल क्या है?
महिला आरक्षण बिल महिलाओं को राजनीति में आरक्षण प्रदान करने के लिए प्रस्तावित एक विधेयक है।
जीतन राम मांझी ने विपक्ष पर क्या आरोप लगाया?
जीतन राम मांझी ने विपक्ष पर आरोप लगाया कि उन्होंने अपने राजनीतिक स्वार्थ के चलते महिला आरक्षण बिल को पास होने नहीं दिया।
महिला आरक्षण बिल का उद्देश्य क्या है?
इस बिल का मुख्य उद्देश्य महिलाओं को राजनीतिक रूप से सशक्त बनाना और उनकी भागीदारी बढ़ाना है।
परिसीमन प्रक्रिया का क्या महत्व है?
परिसीमन प्रक्रिया सीटों के वितरण को सुनिश्चित करती है, जिससे महिलाओं की भागीदारी को बढ़ाया जा सके।
महिला आरक्षण बिल कब पारित हुआ था?
महिला आरक्षण बिल 2023 में पारित हुआ था, लेकिन यह विपक्ष के विरोध के कारण लागू नहीं हो सका।
राष्ट्र प्रेस
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