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महिला आरक्षण बिल के गिरने पर तेजस्वी यादव ने केंद्र सरकार को घेरा

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महिला आरक्षण बिल के गिरने पर तेजस्वी यादव ने केंद्र सरकार को घेरा

सारांश

तेजस्वी यादव ने महिला आरक्षण बिल के गिरने पर भाजपा पर आरोप लगाया कि वे केवल दिखावे के लिए इस मुद्दे को उठाते हैं। उन्होंने कहा कि विपक्ष भी इसके समर्थन में है। भाजपा का यह दावा कि वे ही महिलाओं के पक्ष में हैं सरासर गलत है।

मुख्य बातें

तेजस्वी यादव ने महिला आरक्षण बिल के असफलता पर भाजपा की निंदा की।
उन्होंने बताया कि विपक्ष भी इस बिल का समर्थन करता है।
भाजपा का दावा कि वे ही महिलाओं के पक्ष में हैं, गलत है।
महिला आरक्षण विधेयक को राजनीतिक ड्रामा करार दिया गया।
संविधान के मूल्य और महिलाओं के अधिकारों के संरक्षण की आवश्यकता पर जोर।

कोयंबटूर, 18 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। बिहार विधानसभा में विपक्ष के नेता और राजद के प्रमुख तेजस्वी यादव ने लोकसभा में महिला आरक्षण बिल के असफल होने पर केंद्र सरकार की निंदा की। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि विपक्ष भी इस बिल का समर्थन करता है। भाजपा ने यह गलत धारणा फैलाने का प्रयास किया है कि केवल वे ही महिलाओं के हक में हैं और विपक्ष नहीं। यह पूरी तरह से गलत है।

कोयंबटूर में संवाददाताओं से बातचीत के दौरान तेजस्वी यादव ने कहा कि महिला आरक्षण विधेयक पहले ही 2023 में सर्वसम्मति से पारित किया गया था और केंद्र सरकार ने तब यह बात स्पष्ट की थी कि इसे 2034 में लागू किया जाएगा। परिसीमन एक अलग विषय है। हम पहले जातिगत जनगणना की मांग कर रहे हैं, क्योंकि यदि नए और अद्यतन आंकड़ों के आधार पर परिसीमन किया जाता है तो यह अधिक प्रभावी होगा।

उन्होंने यह भी कहा कि भाजपा को पता था कि यह बिल पास नहीं होगा। उन्होंने इसे केवल दिखाने के लिए पेश किया कि वे महिलाओं के पक्ष में हैं और हम नहीं। यह गलत है।

तेजस्वी यादव ने आरोप लगाया कि मोदी सरकार ने पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों के दौरान महिला आरक्षण बिल को फिर से पेश कर राजनीतिक ड्रामा और प्रोपेगैंडा किया है।

उन्होंने कहा कि भाजपा अपने संविधान बदलने के मंसूबों को पूरा करने के लिए महिलाओं की भावनाओं और प्रतिनिधित्व के साथ खिलवाड़ कर रही है।

तेजस्वी यादव ने यह भी लिखा कि महिला आरक्षण विधेयक के बहाने संविधान के संशोधन का जो बिल आज लोकसभा में गिरा है, यह सिद्ध करता है कि बहुमत के बल पर जनभावना का गला नहीं घोंटा जा सकता और संवैधानिक मर्यादाओं को तार-तार नहीं किया जा सकता।

विपक्ष की एकता ने यह साबित कर दिया है कि देश के लोकतांत्रिक मूल्य और दलित, पिछड़े और अल्पसंख्यक वर्गों की महिलाओं के अधिकारों के साथ खिलवाड़ सहन नहीं किया जाएगा।

तेजस्वी यादव ने कहा कि बिना सर्वदलीय सहमति और राष्ट्रीय विमर्श के, राजनीतिक जल्दबाजी में लाया गया यह विधेयक एनडीए सरकार की नैतिक और संवैधानिक तर्कों की कमी को उजागर करता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

और यह जरूरी है कि इस मुद्दे पर सभी दलों के बीच संवाद हो।
RashtraPress
26 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

महिला आरक्षण बिल क्या है?
महिला आरक्षण बिल का उद्देश्य भारतीय संसद और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए आरक्षित सीटों की संख्या बढ़ाना है।
तेजस्वी यादव ने किस पर आरोप लगाया?
तेजस्वी यादव ने भाजपा पर आरोप लगाया है कि वे महिला आरक्षण बिल को केवल दिखावे के लिए पेश कर रहे हैं।
महिला आरक्षण बिल के गिरने का क्या असर होगा?
महिला आरक्षण बिल के गिरने से महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी में कमी आ सकती है, जिससे उनके अधिकारों की रक्षा में बाधा उत्पन्न हो सकती है।
जातिगत जनगणना का महत्व क्या है?
जातिगत जनगणना का महत्व यह है कि यह विभिन्न जातियों और समुदायों की वास्तविक स्थिति को दर्शाता है, जिससे नीतियों का उचित निर्धारण संभव हो सके।
राष्ट्र प्रेस
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