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महिला आरक्षण बिल: आधी आबादी की राजनीतिक शक्ति को नया मोड़ देने वाला कदम

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महिला आरक्षण बिल: आधी आबादी की राजनीतिक शक्ति को नया मोड़ देने वाला कदम

सारांश

महिलाओं ने महिला आरक्षण विधेयक के संसद में विशेष सत्र की सराहना की है। यह विधेयक न केवल महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी को बढ़ाने का प्रयास है, बल्कि समाज में उनके प्रभाव को भी मजबूत करेगा। जानें इस कदम के पीछे की सोच और इसके संभावित लाभ।

मुख्य बातें

महिला आरक्षण विधेयक से महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी बढ़ेगी।
यह विधेयक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में प्रस्तुत किया गया है।
संसद में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण की चर्चा होगी।
महिलाओं की आवाज को सशक्त करने का यह एक महत्वपूर्ण कदम है।
विपक्ष को भी इस विधेयक का समर्थन करना चाहिए।

नई दिल्ली, 6 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। भारत की महिलाओं ने महिला आरक्षण विधेयक पर संसद के तीन दिवसीय विशेष सत्र की प्रशंसा की है। उत्तर प्रदेश, बिहार से लेकर जम्मू-कश्मीर तक की महिलाओं ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सराहना करते हुए कहा है कि इस विधेयक से आधी जनसंख्या की राजनीतिक ताकत और प्रभाव में वृद्धि होगी।

उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर में रहने वाली समाज सेविका उन्नति बरनवाल ने कहा कि पीएम मोदी का यह कदम स्वागत योग्य है। महिला आरक्षण पर संसद में लंबे समय से चर्चा चल रही थी, और अब जब यह लागू होने जा रहा है, तो हम सभी महिलाएं इसका स्वागत करती हैं।

उन्होंने आगे कहा कि इसे चुनावी दृष्टिकोण से नहीं देखना चाहिए। हमें यह समझना चाहिए कि इससे महिलाओं की राजनीति में भागीदारी बढ़ेगी। जब संसद में महिलाओं की संख्या बढ़ेगी, तो हम जनता से जुड़े मुद्दों को बेहतर तरीके से उठा सकेंगे।

बिहार के मुजफ्फरपुर की भाजपा नेता ममता रानी ने कहा कि विपक्ष महिला आरक्षण विधेयक के बारे में अब तक केवल झूठे दावे कर रहा है। यह विधेयक महिलाओं के लिए फायदेमंद है और विपक्ष को भी इसका समर्थन करना चाहिए। पीएम मोदी की पूरी कोशिश है कि 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले सीटों की संख्या बढ़ाई जाए, ताकि अधिक से अधिक महिलाएं लोकसभा और विधानसभा में प्रवेश कर सकें।

मोनालिसा राय ने कहा कि भाजपा ने हमेशा महिलाओं के सशक्तिकरण और नारी शक्ति का समर्थन किया है। यदि विपक्ष इसका समर्थन नहीं कर रहा है, तो यह उनकी समस्या है। इस मामले में सहयोग न करने के कारण उन्हें 'महिला-विरोधी' करार दिया जा सकता है। पीएम मोदी ने महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए ठोस कदम उठाए हैं।

जम्मू-कश्मीर वक्फ बोर्ड की अध्यक्ष दरक्शां अंद्राबी ने महिला आरक्षण विधेयक के लिए केंद्र सरकार की सराहना की। उन्होंने कहा कि 16 से 18 अप्रैल तक संसद में विशेष सत्र आयोजित होगा, जिसमें 2029 के लिए महिलाओं के 33 प्रतिशत आरक्षण पर चर्चा की जाएगी। उनका कहना था कि पीएम मोदी ने जो कहा है, वह उसे पूरा करेंगे। 2029 में महिलाएं देश के लिए कानून बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। यह विधेयक महिलाओं और देश को सशक्त बनाएगा।

उन्होंने कहा कि वर्तमान में महिलाएं शिक्षा प्राप्त कर रही हैं और अपने कार्यों को कुशलता से कर रही हैं। पीएम मोदी ने जो वादा किया है, उसे पूरा किया है। 2014 से 2026 तक की प्रगति दर्शाती है कि देश किस तरह उन्नति कर रहा है। भाजपा ने महिलाओं को आगे बढ़ाने के लिए जो कार्य किए हैं, वह अन्य पार्टियों में संभव नहीं है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी को बढ़ाएगा। समाज के सभी वर्गों को इसे समर्थन देना चाहिए, ताकि महिलाओं की आवाज को मजबूती मिल सके।
RashtraPress
10 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

महिला आरक्षण विधेयक का मुख्य उद्देश्य क्या है?
इस विधेयक का मुख्य उद्देश्य महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी को बढ़ाना और उन्हें संसद में 33 प्रतिशत आरक्षण प्रदान करना है।
इस विधेयक का समर्थन कौन कर रहा है?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विभिन्न महिला नेताओं ने इस विधेयक का समर्थन किया है, जबकि विपक्ष ने इसके बारे में आलोचना की है।
महिला आरक्षण से क्या लाभ होगा?
महिला आरक्षण से महिलाओं की राजनीतिक ताकत बढ़ेगी, जिससे समाज के मुद्दों को बेहतर तरीके से उठाया जा सकेगा।
इस विधेयक का संसद में कब चर्चा होगी?
इस विधेयक पर 16 से 18 अप्रैल के बीच संसद में विशेष सत्र में चर्चा होगी।
क्या विपक्ष इस विधेयक का समर्थन करेगा?
विपक्ष ने अब तक इसकी आलोचना की है, लेकिन उन्हें भी इस विधेयक का समर्थन करना चाहिए।
राष्ट्र प्रेस
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