महिला आरक्षण बिल: भाजपा का ऐतिहासिक कदम, विपक्ष का आरोप दिखावा
सारांश
Key Takeaways
- महिला आरक्षण बिल का उद्देश्य महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण सुनिश्चित करना है।
- भाजपा इसे ऐतिहासिक कदम मानती है।
- विपक्ष इसे दिखावा बताता है।
- बिल 16-18 अप्रैल को पेश किया जाएगा।
- महिलाओं की हिस्सेदारी एक तिहाई होगी।
भोपाल, १२ अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। महिला आरक्षण बिल के संदर्भ में मध्य प्रदेश के मंत्री विश्वास सारंग ने रविवार को एक समाचार एजेंसी से बातचीत करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने निश्चित रूप से एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। यह कदम महिलाओं के राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक जीवन में सुधार लाने के लिए महत्वपूर्ण है। लेकिन, कांग्रेस और अन्य विपक्षी नेताओं को हमेशा से अच्छे कार्यों में हस्तक्षेप करने की आदत रही है।
भाजपा सांसद मालविका देवी ने कहा कि सभी सांसद १६, १७ और १८ तारीख को लोकसभा और राज्यसभा में उपस्थित होंगे, और उस दिन महिलाओं के लिए ३३ प्रतिशत आरक्षण वाला बिल पारित किया जाएगा। इसका अर्थ है कि संसद और विधानसभाओं में महिलाओं के लिए ३३ प्रतिशत आरक्षण होगा। यह एक महत्वपूर्ण बिल है जो देश के राजनीतिक परिदृश्य को बदल देगा। मैं सभी से अनुरोध करती हूं कि आप इस बिल का समर्थन करें।
महिला आरक्षण बिल पर जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर ने कहा कि चुनाव नजदीक हैं और भाजपा इस बिल को लेकर लोगों को यह याद दिलाना चाहती है कि महिलाओं को आरक्षण उनकी वजह से मिल रहा है, ताकि उन्हें महिलाओं के वोट मिल सकें।
महिला आरक्षण बिल पर भाजपा महिला मोर्चा की आंध्र प्रदेश अध्यक्ष निशिदा राजू ने कहा कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम २०२३ एक ऐतिहासिक संवैधानिक संशोधन है, जिसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई में लागू किया जाएगा। हमें यह बताते हुए खुशी हो रही है कि हमारे प्रतिनिधित्व का हिस्सा ३३ प्रतिशत होगा।
टीएमसी सांसद डोला सेन ने कहा कि मैं फिर से कहूंगी कि वे वास्तविकता से ज्यादा दिखावा करते हैं। यदि वे सच में महिला आरक्षण पर गंभीर होते, तो उन्हें महिलाओं के लिए सीटें आरक्षित करनी चाहिए थीं। लेकिन, वे ऐसा नहीं करेंगे, जैसा कि हमारी नेता ममता बनर्जी करती हैं। चाहे फार्म बिल, लेबर कोड, यूसीसी, महिला आरक्षण बिल या कुछ और हो, वे केवल दिखावा करते हैं।