महिला आरक्षण बिल: क्या है सरकार का असली इरादा? रेणुका चौधरी का बयान
सारांश
Key Takeaways
- महिला आरक्षण बिल को चुनावी स्टंट करार दिया गया है।
- सरकार ने महिला सांसदों से चर्चा नहीं की।
- बिल लाने का समय चुनावों से जुड़ा हुआ है।
- महिलाओं के मुद्दों पर सरकार की नीयत पर सवाल उठाए गए।
- आर्थिक मुद्दों पर सरकार की चुप्पी पर ध्यान आकर्षित किया गया।
नई दिल्ली, 15 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। कांग्रेस की वरिष्ठ नेता और सांसद रेणुका चौधरी ने केंद्र सरकार पर हमला करते हुए महिला आरक्षण बिल को चुनावी स्टंट करार दिया है।
नई दिल्ली में पत्रकारों से बातचीत करते हुए रेणुका चौधरी ने कहा कि यह एक नाजायज फायदा उठाने की कोशिश है। सरकार हमारे कंधों पर रखकर तोप चला रही है और सोच रही है कि सभी लोग बेवकूफ हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि पांच राज्यों में चुनाव के बीच अचानक यह बिल लाया गया। यह समझ से परे है कि चुनाव आयोग ने इसे कैसे अनुमति दी।
कांग्रेस सांसद ने केंद्र सरकार से सवाल करते हुए कहा कि अगर महिलाओं के प्रति इतना प्रेम है तो उन्हें लोकसभा चुनाव 2024 के दौरान ही यह आरक्षण देना चाहिए था, तब जनगणना की बात करते थे। अब अचानक महिला आरक्षण बिल लाया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि असली मुद्दा 16 अप्रैल से शुरू हो रहे संसद के विशेष सत्र के दौरान सामने आएगा।
रेणुका चौधरी ने यह दावा किया कि सरकार महिलाओं के लिए आरक्षण बिल लाने का प्रयास कर रही है, लेकिन महिला सांसदों के साथ कोई चर्चा नहीं की गई। अगर इतना प्रेम है तो क्या हमें बुलाकर चर्चा नहीं की जा सकती? बिल कल दोपहर को सर्कुलेट किया गया।
रेणुका चौधरी ने कांग्रेस नेता सोनिया गांधी का हवाला देते हुए कहा कि सोनिया गांधी ने सही कहा है कि यह एक जल्दबाजी में लाया गया बिल है। पांच राज्यों में चुनाव चल रहे हैं, महिलाएं प्रचार में लगी हुई हैं। ऐसी क्या जल्दबाजी थी कि रातोंरात स्पेशल सेशन बुलाया गया?
उन्होंने आरोप लगाया कि यह बिल महिलाओं को आरक्षण देने का नहीं, बल्कि डिलिमिटेशन का नाटक है। इनकी नीयत में खोट है। गैस सिलेंडर के दाम तीन गुना बढ़ गए हैं, बच्चों की पढ़ाई और रोजगार का कोई समाधान नहीं है। देश के मुद्दों पर चुप्पी साधे बैठे हैं। अब अचानक महिलाओं के लिए इतना प्रेम उमड़ आया है।