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खाड़ी संकट से भारत को रेमिटेंस में दस अरब डॉलर का नुकसान संभव: वी. अनंत नागेश्वरन

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खाड़ी संकट से भारत को रेमिटेंस में दस अरब डॉलर का नुकसान संभव: वी. अनंत नागेश्वरन

सारांश

खाड़ी क्षेत्र में आर्थिक रुकावटों के चलते भारत को रेमिटेंस में दस अरब डॉलर तक का नुकसान हो सकता है। मुख्य आर्थिक सलाहकार वी. अनंत नागेश्वरन के अनुसार, भारतीय श्रमिकों की कमाई और वापस लौटने में देरी की आशंका है।

मुख्य बातें

खाड़ी संकट से रेमिटेंस पर दस अरब डॉलर का नुकसान संभव है।
भारत को 124 अरब डॉलर का रेमिटेंस मिलता है।
खाड़ी देश भारतीय श्रमिकों के लिए महत्वपूर्ण गंतव्य हैं।
आर्थिक गतिविधियों में रुकावट से कमाई प्रभावित हो सकती है।
भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत है, लेकिन खतरे बरकरार हैं।

वॉशिंगटन, 15 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। भारत के मुख्य आर्थिक सलाहकार वी. अनंत नागेश्वरन ने बुधवार को चेतावनी दी कि यदि खाड़ी क्षेत्र में आर्थिक रुकावटें लंबे समय तक बनी रहती हैं, तो इससे भारत में विदेशी रेमिटेंस पर दबाव पड़ेगा। इस स्थिति में भारत को लगभग दस अरब डॉलर तक का नुकसान हो सकता है।

उन्होंने यह जानकारी यूएस-इंडिया इकोनॉमिक फोरम 2026 में दी। नागेश्वरन ने कहा कि जिन देशों में भारतीय श्रमिक काम कर रहे हैं, वहां की राजनीतिक तनाव और आर्थिक मंदी का सीधा प्रभाव भारत में भेजे जाने वाले पैसे पर पड़ेगा।

भारत को वित्त वर्ष 2024-25 में लगभग 124 अरब डॉलर का रेमिटेंस प्राप्त हुआ था, जो कि दुनिया में सबसे अधिक है। इसमें से आधा भाग खाड़ी देशों में काम करने वाले भारतीय श्रमिकों द्वारा भेजा गया था।

उन्होंने यह भी कहा कि यदि सामान्य आर्थिक गतिविधियों को फिर से शुरू करने में समय लगता है, तो इसके कारण खाड़ी देशों से आने वाले रेमिटेंस में कमी आ सकती है।

इस नुकसान का अनुमान पांच अरब डॉलर से दस अरब डॉलर के बीच हो सकता है, जो कि स्थिति की गंभीरता और समस्याओं की अवधि पर निर्भर करेगा।

नागेश्वरन ने बताया कि यह जोखिम कई कारणों से उत्पन्न हो सकते हैं, जैसे श्रमिकों का लौटना, मेजबान देशों में आर्थिक गतिविधियों का ठहरना, और रोजगार के अवसरों की अनिश्चितता।

खाड़ी क्षेत्र भारतीय प्रवासी श्रमिकों के लिए एक प्रमुख कार्य स्थल है, खासकर निर्माण, सेवा क्षेत्र और ऊर्जा के क्षेत्रों में। अगर समस्याएं लंबे समय तक बनी रहती हैं, तो इससे कमाई में कमी और काम पर लौटने में देरी हो सकती है।

यह चिंता ऐसे समय में उठी है जब विश्व स्तर पर व्यापार, ऊर्जा बाजार और पूंजी प्रवाह में अनिश्चितता बनी हुई है। नागेश्वरन ने कहा कि इन बाहरी झटकों का भारत पर असर रेमिटेंस के माध्यम से हो सकता है।

हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत स्थिति में है, क्योंकि विदेशी मुद्रा भंडार संतोषजनक है और विभिन्न स्रोतों से धन आ रहा है।

उन्होंने कहा कि हम एक मजबूत मैक्रोइकॉनॉमिक आधार के साथ इस स्थिति में प्रवेश कर रहे हैं।

भारत दुनिया में सबसे बड़ा प्रवासी जनसंख्या वाला देश है, और लाखों भारतीय विदेशी भूमि पर कार्यरत हैं। खाड़ी सहयोग परिषद के देश भारतीय श्रमिकों के लिए प्रमुख गंतव्यों में से एक हैं, इसलिए भारत के रेमिटेंस में उनकी महत्वपूर्ण भागीदारी है।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो भारतीय श्रमिकों की स्थिति और देश की अर्थव्यवस्था दोनों पर इसका नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
RashtraPress
20 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

खाड़ी संकट का भारत के रेमिटेंस पर क्या प्रभाव है?
अगर खाड़ी क्षेत्र में आर्थिक रुकावटें लंबे समय तक बनी रहती हैं, तो भारत को रेमिटेंस में करीब दस अरब डॉलर का नुकसान हो सकता है।
भारत को रेमिटेंस में कितनी राशि मिलती है?
भारत को वित्त वर्ष 2024-25 में लगभग 124 अरब डॉलर का रेमिटेंस मिला है।
खाड़ी देशों में भारतीय श्रमिकों की स्थिति कैसी है?
खाड़ी क्षेत्र भारतीय श्रमिकों के लिए एक प्रमुख कार्यस्थल है, लेकिन वहां की आर्थिक गतिविधियों में कमी से उनकी कमाई प्रभावित हो सकती है।
क्या खाड़ी संकट का प्रभाव केवल रेमिटेंस पर होगा?
नहीं, यह संकट अन्य आर्थिक गतिविधियों और श्रमिकों की वापसी पर भी प्रभाव डाल सकता है।
भारत की अर्थव्यवस्था इस संकट से कितनी प्रभावित होगी?
हालांकि भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत है, लेकिन इस संकट का असर रेमिटेंस और श्रमिकों की स्थिति पर स्पष्ट रूप से दिख सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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