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क्या भारत के निजी अस्पताल क्षेत्र का आकार 2030 तक लगभग दोगुना होकर 202 अरब डॉलर होगा?

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क्या भारत के निजी अस्पताल क्षेत्र का आकार 2030 तक लगभग दोगुना होकर 202 अरब डॉलर होगा?

सारांश

भारत के निजी अस्पताल क्षेत्र में उल्लेखनीय वृद्धि की संभावनाएं हैं। एक नई रिपोर्ट के अनुसार, यह क्षेत्र 2030 तक लगभग दोगुना होकर 202 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है। जानिए इसके पीछे क्या कारण हैं और यह स्वास्थ्य सेवाओं को कैसे प्रभावित करेगा।

मुख्य बातें

2030 तक भारत के निजी अस्पताल क्षेत्र का आकार 202 अरब डॉलर होगा।
भारत को 24 लाख अतिरिक्त हॉस्पिटल बेड की आवश्यकता है।
मेडिकल टूरिज्म 16.2 बिलियन डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है।
एआरपीओबी में वृद्धि दर्ज की गई है।
निजी निवेश और सरकारी पहलों से क्षेत्र में तेजी आ रही है।

नई दिल्ली, 11 नवंबर (राष्ट्र प्रेस)। भारत के निजी अस्पताल क्षेत्र का आकार 2025 में अनुमानित 122.3 अरब डॉलर से बढ़कर 2030 तक 202.5 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है। मंगलवार को जारी एक रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई है।

क्रेडिट रेटिंग एजेंसी ब्रिकवर्क रेटिंग्स की रिपोर्ट में कहा गया कि भारत को 24 लाख अतिरिक्त हॉस्पिटल बेड की आवश्यकता है, जिसके लिए लगभग 2 अरब वर्ग फुट जगह की जरूरत होगी।

रिपोर्ट के अनुसार, बढ़ती मांग, निजी निवेश, सरकारी पहलों और एआई और टेलीमेडिसिन जैसी तकनीकों को अपनाने से यह क्षेत्र तेजी से आगे बढ़ेगा।

इस क्षेत्र ने 2025 की तीसरी तिमाही में 3.5 अरब डॉलर मूल्य के 72 सौदे दर्ज किए, जो कुल सौदों के मूल्य में तिमाही आधार पर 166 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है।

रिपोर्ट में कहा गया कि 2024 में, भारत के अस्पताल क्षेत्र में महत्वपूर्ण विलय और अधिग्रहण (एम एंड ए) हुए, जो निवेशकों की मजबूत रुचि और देश भर में स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार की दिशा में एक रणनीतिक बदलाव को दर्शाता है।

ब्रिकवर्क रेटिंग्स के रिसर्च हेड राजीव शरण ने कहा, "मजबूत मांग, मजबूत वित्तीय प्रदर्शन, जोखिम प्रबंधन और प्रमुख अस्पताल समूह की ओर से मजबूत विस्तार रणनीतियों के कारण भारत में निजी अस्पताल उद्योग की क्रेडिट रेटिंग 'सकारात्मक' रहने का अनुमान है।"

रिपोर्ट में कहा गया कि भारत का मेडिकल टूरिज्म बाजार, जिसका मूल्य 2025 में 8.7 बिलियन डॉलर था, 2030 तक लगभग दोगुना होकर 16.2 बिलियन डॉलर हो जाएगा, जो कि सस्ती, उच्च-गुणवत्ता वाली देखभाल और सुव्यवस्थित वीजा प्रक्रियाओं के कारण संभव होगा।

मेडिकल टूरिज्म इंडेक्स में दसवें स्थान पर मौजूद भारत ने 2023-24 में 7.3 मिलियन विदेशी मरीजों को आकर्षित किया, जो विशेष उपचारों की बढ़ती मांग को दिखाता है।

रिपोर्ट में कहा गया कि प्रमुख अस्पतालों ने एआरपीओबी (एवरेज रेवेन्यू पर ऑक्यूपाइड बेड) में वृद्धि दर्ज की है, जो अब लगभग 38,000 रुपए से बढ़कर 74,000 रुपए प्रति बेड प्रति दिन हो गया है।

इसमें आगे कहा गया है कि विशेषज्ञता और भुगतानकर्ता मिश्रण में सुधार और उच्च-मूल्य वाली प्रक्रियाओं की बढ़ती मांग के कारण आने वाले वर्षों में एआरपीओबी में वृद्धि होने की उम्मीद है।

संपादकीय दृष्टिकोण

यह स्पष्ट है कि भारत के निजी अस्पताल क्षेत्र में तेज़ी से वृद्धि हो रही है। यह न केवल स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार का संकेत है, बल्कि निवेशकों की रुचि और नए तकनीकी उपायों के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण भी दर्शाता है।
RashtraPress
15 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत के निजी अस्पताल क्षेत्र का आकार 2030 तक क्या होगा?
2030 तक भारत के निजी अस्पताल क्षेत्र का आकार लगभग 202.5 अरब डॉलर होने का अनुमान है।
भारत को कितने नए हॉस्पिटल बेड की आवश्यकता है?
भारत को 24 लाख अतिरिक्त हॉस्पिटल बेड की आवश्यकता है।
क्या मेडिकल टूरिज्म में वृद्धि हो रही है?
हां, भारत का मेडिकल टूरिज्म बाजार 2030 तक लगभग 16.2 बिलियन डॉलर हो जाएगा।
एआरपीओबी में बढ़ोतरी का क्या कारण है?
विशेषज्ञता और उच्च-मूल्य वाली प्रक्रियाओं की बढ़ती मांग के कारण एआरपीओबी में वृद्धि हो रही है।
भारत में स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार कैसे हो रहा है?
निजी निवेश और सरकारी पहलों के माध्यम से स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार हो रहा है।
राष्ट्र प्रेस
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