मुंबई-पुणे मिसिंग लिंक में ₹2,500 करोड़ की लागत वृद्धि पर शिवसेना (यूबीटी) का फडणवीस पर हमला, 'भीड़तंत्र' का आरोप
सारांश
मुख्य बातें
शिवसेना (यूबीटी) ने 10 जुलाई को अपने मुखपत्र 'सामना' में प्रकाशित संपादकीय के ज़रिए महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस पर तीखा हमला बोला है। पार्टी ने आरोप लगाया है कि फडणवीस सरकार मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे की 'मिसिंग लिंक' परियोजना में 'भीड़तंत्र' चला रही है और इस परियोजना में 'वैश्विक स्तर का भ्रष्टाचार' हुआ है। यह संपादकीय उस समय आया है जब महाराष्ट्र में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच टकराव अपने चरम पर है।
मुख्य आरोप: ₹7,180 करोड़ तक पहुँची लागत
सामना के संपादकीय के अनुसार, दो सुरंगों, आठ लेन की सड़क और दो पुलों वाली 13 किलोमीटर लंबी इस परियोजना की प्रारंभिक अनुमानित लागत ₹4,797.55 करोड़ थी। संपादकीय में दावा किया गया कि सामान्य लागत वृद्धि को ध्यान में रखते हुए भी यह राशि ₹5,500 करोड़ से अधिक नहीं होनी चाहिए थी, किंतु अंतिम व्यय बढ़कर ₹7,180 करोड़ तक जा पहुँचा — यानी कथित तौर पर करीब ₹2,500 करोड़ की अतिरिक्त वृद्धि।
संपादकीय में इस लागत को ₹540 करोड़ प्रति किलोमीटर बताते हुए इसे 'भ्रष्टाचार का विश्व रिकॉर्ड' करार दिया गया। इसके साथ ही आरोप लगाया गया कि पहली ही बारिश में परियोजना में भारी रिसाव शुरू हो गया, जो निर्माण गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
फडणवीस की भाषा पर निशाना
उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना ने संपादकीय में मुख्यमंत्री फडणवीस पर उनके कथित बयान को लेकर कड़ी आपत्ति जताई। संपादकीय के अनुसार, फडणवीस ने कथित तौर पर कहा था — 'हमारे भ्रष्टाचार पर सवाल उठाना महाराष्ट्र की बदनामी है। राज्य की बदनामी करने वालों से मैं सख्ती से निपटूंगा।' पार्टी ने इस भाषा को 'जनप्रतिनिधि की नहीं बल्कि गुंडों की भाषा' बताया।
संपादकीय में यह भी आरोप लगाया गया कि मुख्यमंत्री ने विधानसभा में राज्य के खर्च पर सवाल उठाने वाले नागरिकों और विपक्षी नेताओं को 'किराए के लोग' और अन्य अपमानजनक शब्दों से संबोधित किया। पार्टी ने सवाल उठाया कि क्या भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज़ उठाने वालों को जानबूझकर चुप कराने की कोशिश की जा रही है।
राजनीतिक खरीद-फरोख्त का आरोप
शिवसेना (यूबीटी) के संपादकीय में यह भी दावा किया गया कि इस तरह के कथित भ्रष्टाचार से अर्जित धन का उपयोग विधायकों और सांसदों की खरीद-फरोख्त में किया जा रहा है। संपादकीय में मुख्यमंत्री फडणवीस पर तीखी टिप्पणी करते हुए कहा गया कि उनका राज्य से कोई भावनात्मक जुड़ाव नहीं है और वे 'मुगलों और अंग्रेजों' की तरह व्यवहार कर रहे हैं, जिनकी एकमात्र नीति 'लूट कर भाग जाना' थी।
पूर्व मुख्यमंत्रियों की परंपरा से तुलना
संपादकीय में महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्रियों की नेतृत्व शैली का उल्लेख करते हुए कहा गया कि राज्य में सुसंस्कृत राजनीतिक नेतृत्व की परंपरा रही है। राज्य के पहले मुख्यमंत्री यशवंतराव चव्हाण की बुद्धिमत्ता, संयम और राजनीतिक परिपक्वता की सराहना करते हुए वसंतराव नाईक, वसंतदादा पाटिल, शरद पवार, विलासराव देशमुख, मनोहर जोशी और उद्धव ठाकरे सहित विभिन्न दलों के पूर्व मुख्यमंत्रियों का ज़िक्र किया गया। संपादकीय में कहा गया कि इन सभी नेताओं ने सार्वजनिक जीवन में भाषा की मर्यादा बनाए रखी और विधानसभा के मंच का उपयोग विपक्ष को धमकाने के लिए कभी नहीं किया।
आगे क्या
शिवसेना (यूबीटी) के इस संपादकीय हमले के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में नई गर्माहट आने की संभावना है। फडणवीस सरकार की ओर से अभी तक इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। मिसिंग लिंक परियोजना की लागत वृद्धि और निर्माण गुणवत्ता पर विपक्ष के सवाल आने वाले दिनों में विधानसभा में और तेज़ होने के आसार हैं।