मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे पर ₹7,181 करोड़ के 'कनेक्टिंग लिंक' का उद्घाटन, यात्रा 25-30 मिनट होगी कम
सारांश
ऐतिहासिक महत्व
मुख्यमंत्री ने इतिहास से तुलना करते हुए बताया कि परियोजना स्थल वही स्थान है जहाँ 1661 में उंबरखिंड का युद्ध हुआ था, जिसमें छत्रपति शिवाजी महाराज ने 5,000 मराठों का नेतृत्व करते हुए करतालाब खान की मुगल सेना को पराजित किया था। उन्होंने इस स्थान को ऐतिहासिक रूप से महत्वपूर्ण और पवित्र बताया।
यातायात राहत और आगे की राह
मुख्यमंत्री फडणवीस ने उद्घाटन के दिन हुई भारी भीड़ के लिए जनता से माफी माँगी और आश्वासन दिया कि प्रारंभिक भीड़ कम होने के बाद 'कनेक्टिंग लिंक' से खंडाला-लोनावला घाट खंड की दीर्घकालिक यातायात समस्या से स्थायी राहत मिलेगी। इस मार्ग से प्रतिदिन करोड़ों रुपए के ईंधन खर्च में बचत होने की उम्मीद है, जिससे पर्यावरण को भी लाभ मिलेगा।
Key Takeaways
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने 1 मई 2026 को मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे पर ₹7,181 करोड़ की लागत से निर्मित 13 किलोमीटर लंबे 'कनेक्टिंग लिंक' का उद्घाटन किया, जो मुंबई और पुणे के बीच यात्रा का समय 25 से 30 मिनट कम करेगा और दूरी 6 किलोमीटर घटाएगा। उद्घाटन समारोह के कारण राजमार्ग पर भारी यातायात जाम लगा, जिसके चलते कार्यक्रम निर्धारित समय से विलंबित हुआ।
परियोजना की मुख्य विशेषताएँ
कुसगांव और खोपोली के बीच निर्मित इस 'कनेक्टिंग लिंक' को पहले 'मिसिंग लिंक' के नाम से जाना जाता था। मुख्यमंत्री फडणवीस ने इसे नया नाम देते हुए लोगों से 'कनेक्टिंग लिंक' कहने का आग्रह किया। यह परियोजना ₹70,000 करोड़ की अर्थव्यवस्था सृजित करने का अनुमान है।
इस परियोजना के अंतर्गत लोनावला क्षेत्र में यशवंतराव चव्हाण मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे की क्षमता संवर्धन के तहत 22.33 मीटर चौड़ी भूमिगत सुरंग का निर्माण किया गया है, जिसे गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स ने विश्व की सबसे चौड़ी भूमिगत सुरंग के रूप में मान्यता दी है। मुख्यमंत्री फडणवीस, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे, और सुनेत्रा पवार ने यह प्रमाण पत्र स्वीकार किया।
इंजीनियरिंग का अनूठा कमाल
परियोजना में 182 मीटर की ऊँचाई पर दुनिया का सबसे ऊँचा केबल-स्टे ब्रिज शामिल है। मुख्यमंत्री ने बताया कि इस पुल के निर्माण में सात देशों का योगदान रहा — कनाडा (मूल डिज़ाइन), ताइवान (ड्राफ्टिंग), डेनमार्क (पवन परीक्षण), ऑस्ट्रिया (केबल परीक्षण एवं सत्यापन), मलेशिया (केबल), और सिंगापुर (केबल विशेषज्ञता)। यह पुल 240 किमी प्रति घंटा की हवा की गति पर भी स्थिर रहने के लिए डिज़ाइन किया गया है, जबकि हाल के चक्रवात 'निसर्ग' में हवा की गति 130-155 किमी प्रति घंटा तक थी।
मुख्यमंत्री फडणवीस ने महाराष्ट्र राज्य सड़क विकास निगम (MSRDC) के इंजीनियरों की इस 'इंजीनियरिंग चमत्कार' के लिए सराहना की और कहा कि यह परियोजना आधुनिक इंजीनियरिंग कौशल का उत्कृष्ट उदाहरण है, जो घाट खंड के घुमावदार और खतरनाक मार्ग को सीधा, तेज और सुरक्षित बनाएगी।
राजनीतिक संदर्भ और पुरानी सरकार पर आरोप
मुख्यमंत्री ने पिछली सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि यह विचार 2010 में प्रस्तावित किया गया था, लेकिन एक रिपोर्ट में 13 कारण गिनाकर इसे 'असंभव' बताया गया था — जिसमें यह दावा भी शामिल था कि सुरंग लोनावला झील के नीचे से नहीं गुजर सकती। उन्होंने महायुति सरकार को 2015 में उस निर्णय को पलटने और कार्य प्रारंभ करने का श्रेय दिया।
उद्घाटन के दौरान मुख्यमंत्री ने सांसद सुप्रिया सुले को संबोधित किया, जो स्वयं यातायात जाम में फंसी थीं। उन्होंने कहा,