गडकरी ने लॉन्च किया भारत का पहला बैरियर-लेस MLFF टोल सिस्टम, NH-48 पर बिना रुके कटेगा टोल

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गडकरी ने लॉन्च किया भारत का पहला बैरियर-लेस MLFF टोल सिस्टम, NH-48 पर बिना रुके कटेगा टोल

सारांश

भारत ने पहली बार बैरियर-लेस टोलिंग की दुनिया में कदम रखा — NH-48 के चोरयासी प्लाजा पर MLFF सिस्टम से वाहन बिना रुके टोल देंगे। ANPR और फास्टैग की जुगलबंदी से जाम, प्रदूषण और ईंधन खर्च घटाने का वादा है। यह उस डिजिटल हाईवे क्रांति की शुरुआत है जिसे भारत दशकों से चाहता था।

Key Takeaways

नितिन गडकरी ने 1 मई 2026 को भारत का पहला MLFF बैरियर-लेस टोल सिस्टम लॉन्च किया। यह सिस्टम गुजरात के NH-48 पर चोरयासी टोल प्लाजा (सूरत-भरूच सेक्शन) पर शुरू किया गया। ANPR कैमरे और फास्टैग तकनीक से वाहन बिना रुके चलते-चलते टोल भुगतान करेंगे। 10 अप्रैल 2026 से सभी नेशनल हाईवे टोल प्लाजा पर केवल डिजिटल भुगतान (फास्टैग/UPI) लागू। देश में फास्टैग का उपयोग 98% से अधिक हो चुका है। NHAI ने सभी फास्टैग जारी करने वाले बैंकों को वाहन रजिस्ट्रेशन नंबर (VRN) की तत्काल जाँच के निर्देश दिए।

केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने शुक्रवार, 1 मई 2026 को भारत का पहला मल्टी-लेन फ्री फ्लो (MLFF) बैरियर-लेस टोलिंग सिस्टम लॉन्च करने की घोषणा की। यह अत्याधुनिक प्रणाली गुजरात के सूरत-भरूच सेक्शन पर स्थित NH-48 के चोरयासी टोल प्लाजा पर शुरू की गई है, जहाँ अब वाहन बिना रुके चलते-चलते ही टोल भुगतान कर सकेंगे। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के अनुसार, यह भारत के राष्ट्रीय राजमार्ग आधुनिकीकरण की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल है।

MLFF सिस्टम कैसे काम करता है

यह प्रणाली ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन (ANPR) और फास्टैग जैसी उन्नत तकनीकों पर आधारित है। वाहन के टोल प्लाजा से गुज़रते ही कैमरे नंबर प्लेट पढ़ लेते हैं और फास्टैग अथवा लिंक्ड खाते से स्वचालित रूप से शुल्क कट जाता है। इस पूरी प्रक्रिया में न बैरियर उठता है, न वाहन को रुकना पड़ता है।

मंत्रालय ने बताया कि इस सिस्टम में मानव हस्तक्षेप न्यूनतम है, जिससे टोल संचालन अधिक पारदर्शी और कुशल होगा। यह तकनीक अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप है और यूरोप व अमेरिका में पहले से सफलतापूर्वक लागू है।

यात्रियों और लॉजिस्टिक्स पर असर

मंत्रालय के अनुसार, MLFF सिस्टम से यात्रा का समय घटेगा, हाईवे पर लगने वाले जाम में कमी आएगी, ईंधन की बचत होगी और वाहनों से होने वाला प्रदूषण भी कम होगा। गडकरी ने कहा कि यह प्रणाली

Point of View

लेकिन असली परीक्षा स्केलअप में है — फिलहाल यह केवल एक टोल प्लाजा पर पायलट है। भारत में फास्टैग की 98% पहुँच एक मज़बूत नींव ज़रूर है, पर ANPR की सटीकता, नंबर प्लेट की गुणवत्ता और विवाद निपटान तंत्र जैसे व्यावहारिक सवाल अभी अनुत्तरित हैं। यह ऐसे समय में आया है जब सरकार पर हाईवे टोल दरों को लेकर पहले से आलोचना है — बिना रुकावट के टोल काटना तकनीकी सफलता है, लेकिन जब तक पारदर्शी शिकायत निवारण प्रणाली नहीं बनती, जनता का भरोसा जीतना चुनौती रहेगी।
NationPress
01/05/2026

Frequently Asked Questions

भारत का MLFF बैरियर-लेस टोल सिस्टम क्या है?
MLFF (मल्टी-लेन फ्री फ्लो) एक ऐसी टोलिंग प्रणाली है जिसमें वाहन बिना रुके टोल प्लाजा से गुज़रते हैं और ANPR कैमरे व फास्टैग के ज़रिए स्वचालित रूप से शुल्क कट जाता है। भारत में इसे पहली बार NH-48 के गुजरात स्थित चोरयासी टोल प्लाजा पर 1 मई 2026 को लॉन्च किया गया।
MLFF टोल सिस्टम कहाँ लागू किया गया है?
फिलहाल यह सिस्टम गुजरात में सूरत-भरूच सेक्शन के NH-48 पर चोरयासी टोल प्लाजा पर शुरू किया गया है। यह भारत का पहला MLFF टोल प्लाजा है।
MLFF सिस्टम से आम यात्रियों को क्या फायदा होगा?
मंत्रालय के अनुसार, इससे टोल पर लगने वाला इंतज़ार खत्म होगा, हाईवे पर जाम कम होगा, ईंधन की बचत होगी और वाहन प्रदूषण घटेगा। माल ढुलाई और लॉजिस्टिक्स की आवाजाही भी तेज़ और सस्ती होगी।
क्या सभी नेशनल हाईवे पर डिजिटल टोल भुगतान अनिवार्य हो गया है?
हाँ, केंद्र सरकार ने 10 अप्रैल 2026 से सभी नेशनल हाईवे टोल प्लाजा पर केवल फास्टैग और UPI जैसे डिजिटल माध्यमों से भुगतान अनिवार्य कर दिया है। नकद भुगतान की सुविधा बंद कर दी गई है।
फास्टैग की मौजूदा स्थिति क्या है और NHAI ने क्या निर्देश दिए हैं?
देश में फास्टैग का उपयोग 98% से अधिक वाहनों में हो चुका है। NHAI ने सभी फास्टैग जारी करने वाले बैंकों को निर्देश दिया है कि वे फास्टैग से जुड़े वाहन रजिस्ट्रेशन नंबर (VRN) की तुरंत जाँच सुनिश्चित करें।
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