अंतरराष्ट्रीय श्रमिक दिवस 2025: महिला श्रम भागीदारी 40% और सामाजिक सुरक्षा कवरेज 64% पर पहुँची

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अंतरराष्ट्रीय श्रमिक दिवस 2025: महिला श्रम भागीदारी 40% और सामाजिक सुरक्षा कवरेज 64% पर पहुँची

सारांश

भारत में महिला श्रम भागीदारी दर सात साल में 23.3% से 40% पर पहुँची — यह महज एक आँकड़ा नहीं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था में एक बड़े संरचनात्मक बदलाव का संकेत है। 10 करोड़ महिलाएं स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी हैं और 1 लाख से अधिक स्टार्टअप में महिला निदेशक हैं।

Key Takeaways

सामाजिक सुरक्षा कवरेज 2015 के 19% से बढ़कर 2025 में 64% से अधिक हो गया। महिला श्रम भागीदारी दर 2017-18 के 23.3% से बढ़कर 2025 में 40% पर पहुँची। DAY-NRLM के तहत 10 करोड़ से अधिक महिलाएं स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी हैं। जम्मू-कश्मीर के बडगाम में नया ESIC अस्पताल खुला, 50,000 से अधिक श्रमिकों को लाभ मिलेगा। भारत में 2.2 लाख से अधिक मान्यता प्राप्त स्टार्टअप हैं; 1 लाख से अधिक में कम से कम एक महिला निदेशक हैं।

अंतरराष्ट्रीय श्रमिक दिवस के अवसर पर 1 मई 2025 को सरकार ने घोषणा की कि भारत में सामाजिक सुरक्षा कवरेज 2015 के लगभग 19 प्रतिशत से बढ़कर 2025 में 64 प्रतिशत से अधिक हो गया है। साथ ही, महिला श्रम भागीदारी दर 2017-18 के 23.3 प्रतिशत से बढ़कर 2025 में 40 प्रतिशत पर पहुँच गई है। सरकारी बयान के अनुसार, महिलाएं अब न केवल कार्यबल में शामिल हो रही हैं, बल्कि नेतृत्व की भूमिकाओं में भी अपनी उपस्थिति दर्ज करा रही हैं।

महिला श्रम भागीदारी में ऐतिहासिक उछाल

आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण (PLFS) के आँकड़ों के अनुसार, महिला श्रम भागीदारी दर में पिछले सात वर्षों में लगभग 17 प्रतिशत अंकों की वृद्धि दर्ज की गई है। एक आधिकारिक बयान में कहा गया कि महिलाएं अब आय बढ़ाने वाली गतिविधियों और स्थानीय व्यवसायों में अधिक शामिल हो रही हैं, और उन्हें कौशल, सामाजिक सुरक्षा तथा औपचारिक प्रणाली तक पहुँच मिल रही है। गौरतलब है कि यह बदलाव विशेष रूप से ग्रामीण भारत में सबसे अधिक स्पष्ट है, जहाँ महिलाएं अब नियमित रूप से अर्थव्यवस्था में योगदान देने वाली बन रही हैं।

सामाजिक सुरक्षा कवरेज में विस्तार

सरकार के अनुसार, भविष्य निधि, बीमा और स्वास्थ्य सेवाओं तक बढ़ती पहुँच खासकर असंगठित क्षेत्र में काम करने वाली महिलाओं के लिए लाभकारी रही है। कर्मचारी राज्य बीमा (ESIC) योजना के तहत हाल ही में जम्मू-कश्मीर के बडगाम में एक नया ईएसआईसी अस्पताल शुरू किया गया है, जो 50,000 से अधिक श्रमिकों और उनके परिवारों को स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करेगा। यह ऐसे समय में आया है जब श्रम बाजार के औपचारिक होने की प्रक्रिया तेज़ हो रही है।

स्वयं सहायता समूह और ग्रामीण उद्यमिता

दीनदयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (DAY-NRLM) के तहत 10 करोड़ से अधिक महिलाओं को स्वयं सहायता समूहों से जोड़ा जा चुका है। यह योजना पहले वित्तीय समावेशन के उद्देश्य से शुरू हुई थी, लेकिन अब यह छोटे व्यवसायों के विशाल नेटवर्क में परिवर्तित हो गई है, जहाँ महिलाएं उत्पादन, प्रबंधन और बिक्री की भूमिकाएं निभा रही हैं। सरकार के बयान के अनुसार, कई मामलों में ये महिलाएं अपने परिवार की मुख्य कमाने वाली बन गई हैं।

लखपति दीदी और स्टार्टअप इकोसिस्टम

महिला उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए लखपति दीदी योजना जैसी पहलें चलाई जा रही हैं, जिनका लक्ष्य करोड़ों महिलाओं को सालाना ₹1 लाख से अधिक कमाने में सक्षम बनाना है। इसके लिए उन्हें ऋण, कौशल और बाजार से जोड़ने की सुविधा दी जा रही है। इसके साथ ही, भारत के स्टार्टअप इकोसिस्टम में 2.2 लाख से अधिक मान्यता प्राप्त स्टार्टअप हैं, जो 23.3 लाख से अधिक रोजगार दे रहे हैं — इनमें से 1 लाख से अधिक स्टार्टअप में कम से कम एक महिला निदेशक हैं।

आगे की राह

सरकार का कहना है कि श्रम बाजार के औपचारिकीकरण और महिलाओं की बढ़ती भागीदारी से भारत की आर्थिक संरचना में दीर्घकालिक बदलाव आएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह गति बनी रही, तो महिला श्रम भागीदारी दर आने वाले वर्षों में वैश्विक औसत के करीब पहुँच सकती है। अब असली परीक्षा इन आँकड़ों को टिकाऊ रोजगार और उचित मजदूरी में बदलने की होगी।

Point of View

लेकिन यह ध्यान देना ज़रूरी है कि PLFS के आँकड़े अवैतनिक पारिवारिक श्रम और अल्पकालिक कृषि कार्य को भी 'रोजगार' में शामिल करते हैं, जिससे वास्तविक आर्थिक स्वायत्तता की तस्वीर धुंधली हो सकती है। 64% सामाजिक सुरक्षा कवरेज का दावा तब तक अधूरा है जब तक यह स्पष्ट न हो कि इसमें कितना हिस्सा असंगठित क्षेत्र की महिला श्रमिकों तक वास्तव में पहुँचा है। लखपति दीदी और DAY-NRLM जैसी योजनाओं की दिशा सही है, परंतु उनके दीर्घकालिक प्रभाव का सत्यापन स्वतंत्र एजेंसियों द्वारा होना अभी बाकी है। असली सफलता तब मानी जाएगी जब ये महिलाएं उचित मजदूरी, सामाजिक सुरक्षा और नियमित रोजगार — तीनों एक साथ — हासिल कर सकें।
NationPress
01/05/2026

Frequently Asked Questions

भारत में महिला श्रम भागीदारी दर 2025 में कितनी है?
आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण (PLFS) के अनुसार, भारत में महिला श्रम भागीदारी दर 2025 में 40 प्रतिशत है, जो 2017-18 में 23.3 प्रतिशत थी। यह सात वर्षों में लगभग 17 प्रतिशत अंकों की वृद्धि दर्शाती है।
भारत में सामाजिक सुरक्षा कवरेज में कितना सुधार हुआ है?
सरकारी आँकड़ों के अनुसार, सामाजिक सुरक्षा कवरेज 2015 के लगभग 19 प्रतिशत से बढ़कर 2025 में 64 प्रतिशत से अधिक हो गया है। यह वृद्धि भविष्य निधि, बीमा और स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुँच के विस्तार से संभव हुई है।
DAY-NRLM योजना से कितनी महिलाएं जुड़ी हैं?
दीनदयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (DAY-NRLM) के तहत 10 करोड़ से अधिक महिलाओं को स्वयं सहायता समूहों से जोड़ा गया है। यह योजना अब वित्तीय समावेशन से आगे बढ़कर उत्पादन, प्रबंधन और बिक्री के छोटे व्यवसायों के नेटवर्क में बदल गई है।
लखपति दीदी योजना का लक्ष्य क्या है?
लखपति दीदी योजना का लक्ष्य करोड़ों महिलाओं को सालाना ₹1 लाख से अधिक कमाने में सक्षम बनाना है। इसके लिए उन्हें ऋण, कौशल प्रशिक्षण और बाजार से जोड़ने की सुविधा प्रदान की जा रही है।
भारत के स्टार्टअप इकोसिस्टम में महिलाओं की भूमिका कितनी है?
भारत में 2.2 लाख से अधिक मान्यता प्राप्त स्टार्टअप हैं, जो 23.3 लाख से अधिक रोजगार दे रहे हैं। इनमें से 1 लाख से अधिक स्टार्टअप में कम से कम एक महिला निदेशक हैं, जो महिला नेतृत्व की बढ़ती भूमिका को दर्शाता है।
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