वाइब्रेंट गुजरात रीजनल कॉन्फ्रेंस: उद्योगपतियों ने कहा — सूरत में निवेश, रोजगार और निर्यात को मिलेगी नई रफ्तार

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वाइब्रेंट गुजरात रीजनल कॉन्फ्रेंस: उद्योगपतियों ने कहा — सूरत में निवेश, रोजगार और निर्यात को मिलेगी नई रफ्तार

सारांश

सूरत में वाइब्रेंट गुजरात रीजनल कॉन्फ्रेंस महज एक उद्योग सम्मेलन नहीं — यह साउथ गुजरात की औद्योगिक महत्वाकांक्षाओं का मंच बन गया है। देशी-विदेशी निवेशकों की मौजूदगी और 2047 के विकसित भारत के विजन को जोड़ते हुए उद्योगपतियों ने इसे गुजरात के भविष्य की नींव बताया।

Key Takeaways

वाइब्रेंट गुजरात रीजनल कॉन्फ्रेंस का आयोजन 1 मई को सूरत में हुआ, जिसमें देश-विदेश के उद्योगपतियों ने भाग लिया। केपी ग्रुप के डॉ. फारूक पटेल ने कहा कि इस सम्मेलन से साउथ गुजरात के साथ-साथ पूरे गुजरात और देश को फायदा होगा। हरि कृष्णा एक्सपोर्ट्स के संस्थापक और चेयरमैन सावजी ढोलकिया ने इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन का परिणाम बताया। डोनेट लाइफ के संस्थापक नीलेश मंडलेवाला ने कहा कि गुजरात का इन्फ्रास्ट्रक्चर निवेश के लिए अनुकूल है और विदेशी निवेशकों की रुचि बढ़ी है। यूनो मिंडा के चेयरमैन निर्मल मिंडा ने कहा कि इस समिट से गुजरात 2047 के विकसित भारत के लक्ष्य में बड़ी भूमिका निभाएगा।

सूरत में आयोजित वाइब्रेंट गुजरात रीजनल कॉन्फ्रेंस में 1 मई को देश-विदेश के उद्योगपतियों ने एक स्वर में कहा कि यह समिट गुजरात और पूरे देश में निवेश, रोजगार और निर्यात के नए द्वार खोलेगी। विदेशी निवेशकों की बढ़ती भागीदारी को उद्योग जगत ने इस सम्मेलन की सबसे बड़ी उपलब्धि बताया। यह आयोजन ऐसे समय में हो रहा है जब केंद्र सरकार 2047 तक 'विकसित भारत' के लक्ष्य को साकार करने की दिशा में राज्यों को औद्योगिक हब के रूप में विकसित करने पर जोर दे रही है।

साउथ गुजरात को मिलेगा सबसे बड़ा फायदा

केपी ग्रुप के डॉ. फारूक पटेल ने समाचार एजेंसी राष्ट्र प्रेस से बात करते हुए कहा कि वाइब्रेंट गुजरात के तहत हो रही इस रीजनल कॉन्फ्रेंस से पूरे साउथ गुजरात को बड़ा फायदा होने वाला है। उन्होंने कहा,

Point of View

लेकिन असली कसौटी यह है कि ये घोषणाएँ ज़मीन पर कितनी उतरती हैं। सूरत पहले से ही हीरा, कपड़ा और रसायन उद्योगों का गढ़ है, इसलिए नए निवेश की संभावना वास्तविक है — परंतु रोजगार के आँकड़े अक्सर निवेश की घोषणाओं से पीछे रह जाते हैं। विदेशी निवेशकों की भागीदारी उत्साहजनक है, लेकिन उनके वास्तविक एमओयू और क्रियान्वयन की पारदर्शी निगरानी के बिना ये सम्मेलन महज 'नेटवर्किंग इवेंट' बनकर रह जाते हैं। 2047 के विकसित भारत के लक्ष्य को देखते हुए, इस तरह के मंचों की जवाबदेही तय करना अब ज़रूरी हो गया है।
NationPress
01/05/2026

Frequently Asked Questions

वाइब्रेंट गुजरात रीजनल कॉन्फ्रेंस क्या है?
वाइब्रेंट गुजरात रीजनल कॉन्फ्रेंस, वाइब्रेंट गुजरात ग्लोबल समिट का एक क्षेत्रीय विस्तार है, जिसका उद्देश्य राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में निवेश आकर्षित करना और उद्योगों को सरकार के विजन से जोड़ना है। 1 मई को सूरत में आयोजित इस सम्मेलन में देश-विदेश के प्रमुख उद्योगपतियों ने भाग लिया।
इस समिट से सूरत और साउथ गुजरात को क्या फायदा होगा?
केपी ग्रुप के डॉ. फारूक पटेल के अनुसार, इस रीजनल कॉन्फ्रेंस से साउथ गुजरात में निवेश बढ़ेगा, रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और निर्यात में भी बढ़ोतरी होगी। विदेशी निवेशकों की भागीदारी से यह प्रभाव और व्यापक होने की उम्मीद है।
उद्योगपतियों ने इस समिट को प्रधानमंत्री मोदी के विजन से कैसे जोड़ा?
हरि कृष्णा एक्सपोर्ट्स के संस्थापक सावजी ढोलकिया और यूनो मिंडा के चेयरमैन निर्मल मिंडा ने इस समिट को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य से जोड़ा। उनका कहना था कि इस तरह के आयोजन गुजरात को उस लक्ष्य में अग्रणी भूमिका दिलाएंगे।
गुजरात में निवेश के लिए इन्फ्रास्ट्रक्चर कैसा है?
डोनेट लाइफ के संस्थापक नीलेश मंडलेवाला के अनुसार, सरकार ने गुजरात को निवेश के लिए पूरी तरह तैयार किया है और यहाँ का इन्फ्रास्ट्रक्चर उद्योगों के लिए काफी अनुकूल है। विदेशी निवेशकों की बढ़ती रुचि इसका प्रमाण है।
वाइब्रेंट गुजरात समिट की शुरुआत किसने की थी?
नीलेश मंडलेवाला ने बताया कि वाइब्रेंट गुजरात की नींव प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रखी थी। समय के साथ इसका दायरा और महत्व लगातार बढ़ता जा रहा है, और अब इसमें देश के साथ-साथ विदेशी निवेशक भी बड़ी संख्या में भाग लेते हैं।
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