पुणे में महिलाओं के खिलाफ अपराध: कांग्रेस का फडणवीस पर निशाना, 3 महीनों में 700 यौन शोषण मामले
सारांश
मुख्य बातें
महाराष्ट्र कांग्रेस अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने गुरुवार, 7 मई को पुणे में आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री देवेंद्र फडणवीस को 'नए पुणे का निर्माता' घोषित किए जाने के बाद से शहर में महिलाओं के खिलाफ अपराधों में तेज़ी से वृद्धि हुई है। उन्होंने सवाल किया कि जनवरी से मार्च के बीच केवल तीन महीनों में यौन शोषण के 700 मामले दर्ज हुए — यानी प्रतिदिन एक दुष्कर्म की घटना।
मुख्य आरोप और आँकड़े
सपकाल ने 45 मीटर ऊंचे ध्वज स्तंभ के उद्घाटन समारोह में बोलते हुए कहा कि पुणे में ड्रग्स खुलेआम बेचे जा रहे हैं, गुंडों का आतंक फैला हुआ है और गुलटेकड़ी मार्केट यार्ड में आपराधिक हस्तक्षेप बढ़ गया है। उन्होंने सीधे सवाल किया — "क्या ये घटनाएँ भी देवेंद्र फडणवीस की 'योजना' का हिस्सा हैं?"
कार्यक्रम की शुरुआत पुणे के नासरापुर की चार वर्षीय पीड़िता और महिलाओं व बच्चों के खिलाफ अपराधों के अन्य पीड़ितों को श्रद्धांजलि अर्पित करने के साथ हुई। सपकाल ने इसे "घोर घृणित और भयावह विकृति" बताया जिसने, उनके अनुसार, पूरी दुनिया को झकझोर दिया है।
भूमिगत सड़क परियोजना पर भ्रष्टाचार के आरोप
सपकाल ने पुणे में प्रस्तावित ₹34,000 करोड़ की 54 किलोमीटर लंबी भूमिगत सड़क परियोजना की भी कड़ी आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि परियोजना की घोषणा से पहले कोई जन सुनवाई नहीं हुई और निर्वाचित पार्षदों से परामर्श नहीं लिया गया। उनके अनुसार, यह परियोजना पुणे में भ्रष्टाचार को और बढ़ाएगी।
ऑपरेशन सिंदूर और विदेश नीति पर निशाना
सपकाल ने ऑपरेशन सिंदूर के संदर्भ में भी केंद्र सरकार पर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि इस दौरान संयुक्त राज्य अमेरिका ने अचानक युद्धविराम की घोषणा कर दी और कथित तौर पर भारत को अमेरिकी दबाव में व्यापार समझौते के लिए मजबूर किया गया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि अमेरिका भारत को रूस से कच्चा तेल न खरीदने का निर्देश दे रहा है, जबकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस पर मौन हैं।
RSS और तिरंगे पर विवादित दावे
सपकाल ने दावा किया कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) भारतीय ध्वज के तीन रंगों के अर्थ और भावना को विकृत करने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने यह भी दावा किया कि RSS ने स्वतंत्रता के बाद लगभग 50-55 वर्षों तक अपने कार्यालयों में तिरंगा नहीं फहराया। उन्होंने लोगों से ऐसी प्रवृत्तियों के खिलाफ खड़े होने का आह्वान किया।
आगे क्या
यह ऐसे समय में आया है जब महाराष्ट्र में विपक्ष और सत्तारूढ़ गठबंधन के बीच राजनीतिक तनाव बढ़ रहा है। सपकाल के आरोपों पर भाजपा या फडणवीस की ओर से तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। पुणे में महिला सुरक्षा और बड़े बुनियादी ढाँचे की परियोजनाओं पर यह बहस आने वाले दिनों में और तेज़ होने की संभावना है।